समाज के सहयोग से 6 दिन में नागराजजी की बावड़ी ने लिया मूल स्वरूप, जल गंगा संवर्धन अभियान की बड़ी सफलता

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मंदसौर। मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मेहनत ने मंदसौर की प्राचीन नागराजजी की बावड़ी को मात्र 6 दिनों में इसके मूल स्वरूप में लौटा दिया। मध्यप्रदेश शासन के निर्देशन में चल रहे जल गंगा संवर्धन अभियान के तहत इस बावड़ी की सफाई और संरक्षण कार्य ने जन सहयोग से एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।

नगर पालिका मंदसौर के वार्ड क्रमांक 12 में स्थित इस ऐतिहासिक बावड़ी की सफाई के लिए सामाजिक कार्यकर्ताओं, नगर पालिका, वार्ड पार्षदों, जनप्रतिनिधियों, सफाई कर्मचारियों और आसपास के रहवासियों ने मिलकर 6 दिनों तक लगातार श्रमदान किया। नतीजतन, बावड़ी अब अपने मूल स्वरूप में नजर आ रही है। खास बात यह है कि मई माह की भीषण गर्मी में भी बावड़ी में 50 फीट नीचे से पानी उपलब्ध है, जो जल संरक्षण के लिए एक बड़ी उपलब्धि है।

जल गंगा संवर्धन अभियान की शपथ के साथ जताया संकल्प
इस अवसर पर आयोजित शपथ समारोह में वार्ड पार्षद सुनीता भावसार, सामाजिक कार्यकर्ता विनय दुबेला,और सुदीप शर्मा ने कहा कि प्राचीन धरोहरों को सहेजना और सुरक्षित रखना हम सभी की नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने बताया कि यह बावड़ी न केवल ऐतिहासिक धरोहर है, बल्कि जल संकट के समय में यह नगर के लिए पेयजल का महत्वपूर्ण स्रोत भी बन सकती है।

नागराजजी की बावड़ी: ऐतिहासिक महत्व और भविष्य की संभावनाएं
स्थानीय रहवासियों ने बताया कि अतीत में भीषण जल संकट के दौरान इस बावड़ी का उपयोग नल जल सप्लाई के लिए किया जा चुका है। अगर इसका नियमित रखरखाव और सफाई होती रहे, तो यह भविष्य में भी मंदसौर के लिए पेयजल का एक प्रमुख स्रोत बन सकती है। बावड़ी के मरम्मत और संरक्षण की योजना पर भी चर्चा की गई।

जन सहयोग और सामाजिक कार्यकर्ताओं की सराहना
इस अवसर पर नवांकुर संस्था के प्रतिनिधि दिनेश सोलंकी, हरिओम गंधर्व,मंजू भावसार,रतनलाल चौहान सहित वार्ड के रहवासी और सामाजिक कार्यकर्ता उपस्थित रहे। रहवासियों ने सामाजिक कार्यकर्ताओं की इस पहल की खुलकर प्रशंसा की और इसे जल संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।

**हरिओम गंधर्व** ने बताया कि यह अभियान न केवल बावड़ी को पुनर्जनन देने में सफल रहा, बल्कि इसने समाज में जल संरक्षण के प्रति जागरूकता भी पैदा की है। उन्होंने कहा कि अगर हम सब मिलकर अपनी धरोहरों को सहेजने का संकल्प लें, तो आने वाली पीढ़ियों के लिए जल संकट की समस्या को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

यह अभियान मध्यप्रदेश जनअभियान परिषद के जल गंगा संवर्धन अभियान का एक जीवंत उदाहरण है, जो यह दर्शाता है कि सामूहिक प्रयासों से प्राचीन जल स्रोतों को पुनर्जनन देकर जल संकट से निपटा जा सकता है।

Dashpur Disha
Author: Dashpur Disha

दशपुर दिशा समाचार पत्र भारत के प्रेस महापंजीयक कार्यालय नई दिल्ली से पंजीकृत है। दशपुर दिशा मालवांचल में खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित समाचार पत्र है। www. dashpurdisha.com हमारी अधिकृत वेबसाइट है।

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