मंदसौर। श्रमजीवी गृह निर्माण सहकारी संस्था मर्यादित की रामटेकरी कॉलोनी की भूमि पर भू-माफियाओं की कुदृष्टि के कारण कॉलोनी के मालिकों में आक्रोश व्याप्त है। इस कॉलोनी के लिए लंबे समय से संघर्षरत कई सदस्यों का स्वर्गवास हो चुका है, और अब उनकी संतानों को न्याय के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। भू-माफियाओं की अवैध गतिविधियों के कारण कॉलोनी के मालिक अपनी साफ-सुथरी भूमि पर घर नहीं बना पा रहे हैं।
कानूनी स्थिति और इतिहास
संस्था के पक्ष में कानूनी दस्तावेज स्पष्ट हैं। 04 मार्च 1972 को गौरधनदास बैरागी द्वारा संस्था के नाम रजिस्ट्री की गई। नगर पालिका ने 25 अगस्त 1976 को पूरी कॉलोनी का नामांतरण संस्था के पक्ष में किया, और 16 जून 1977 को संस्था के सदस्यों के पक्ष में नामांतरण हुआ। भवन निर्माण की अनुमति 24 मार्च 1977 को सीतामऊ में जारी की गई। इसके अतिरिक्त, संस्था के पक्ष में कोर्ट के कई निर्णय आए:
– प्रथम कोर्ट का निर्णय: 24 दिसंबर 1993
– मंदसौर में अपील का निर्णय: 18 मई 2001
– हाईकोर्ट का निर्णय: 30 जून 2011
– सुप्रीम कोर्ट में शासन की अपील खारिज: 08 फरवरी 2016
– सुप्रीम कोर्ट का अंतिम आदेश: 22 मार्च 2023

सुप्रीम कोर्ट के आदेश (पैरा 25/ए) में स्पष्ट निर्देश हैं कि संस्था के पक्ष में सभी अनुमतियां और नामांतरण लागू किए जाएं। साथ ही, किसी को भी संस्था के कार्यों में हस्तक्षेप करने या करने देने की मनाही है। इसके बावजूद, भू-माफियाओं द्वारा कॉलोनी के मालिकों को परेशान किया जा रहा है। 14 अप्रैल 2015 को हाईकोर्ट के आदेश पर मंदसौर कोर्ट के निर्देशानुसार कलेक्टर भू-अभिलेख द्वारा भूमि का सीमांकन कर फील्ड बुक तैयार की गई और प्रतिवेदन कोर्ट में प्रस्तुत किया गया।
भू-मालिकों का विरोध प्रदर्शन
रविवार को रामटेकरी कॉलोनी के सभी भू-मालिक एकत्र हुए और अवैध गतिविधियों के खिलाफ आक्रोश व्यक्त किया। इस दौरान रवीन्द्र पाण्डेय, अजय कांठेड़, राहुल धनगर, हेमंत चंडालिया, गौरव शर्मा, अनिल गुप्ता, अरविंद जोशी, बलवंत राठौर, राजेश सकलेचा, पुरुषोत्तम तिवारी, सुशील गुप्ता, प्रहलाद सिंह सिसोदिया, रमेश शर्मा, नीरज अग्रवाल, ओ.पी. अग्रवाल, मोहन धनगर, नितिन कोठारी, विनोद कोठारी सहित अन्य उपस्थित रहे।
मांग और अपील
कॉलोनी के मालिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का पालन सुनिश्चित किया जाए और भू-माफियाओं की अवैध गतिविधियों पर रोक लगाई जाए, ताकि वे अपनी भूमि पर बिना किसी बाधा के घर बना सकें। मालिकों ने प्रशासन से न्याय की गुहार लगाई है और चेतावनी दी है कि यदि अवैध गतिविधियां नहीं रुकीं, तो वे और सशक्त कदम उठाएंगे।
संस्था का इतिहास
श्रमजीवी गृह निर्माण सहकारी संस्था के सदस्यों में स्व. कैलाश नारायण पाण्डेय, जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी और अधिवक्ता थे, जैसे प्रमुख व्यक्तित्व शामिल रहे। कॉलोनी के लिए दशकों से चला आ रहा संघर्ष अब भी जारी है, और मालिकों को उम्मीद है कि प्रशासन और कोर्ट के आदेशों का सम्मान करते हुए उनकी समस्या का समाधान होगा।
Author: Dashpur Disha
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