सामुदायिक भवन निर्माण के नाम पर लाखों का घोटाला: जिला पंचायत सीईओ की जांच के बाद भी कार्रवाई शून्य

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दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
गरोठ। जिले के गरोठ जनपद की ग्राम पंचायत पीपलखेड़ा में सामुदायिक भवन निर्माण के नाम पर लाखों रुपये के घोटाले का मामला सामने आया है। सरपंच अर्जुन नाडावत और पंचायत सचिव ने मिलकर मांगु का डेरा में सामुदायिक भवन के लिए स्वीकृत 9 लाख रुपये से अधिक की राशि को फर्जी बिलों के जरिए निकाल लिया, लेकिन मौके पर कोई निर्माण कार्य नहीं हुआ। इस घोटाले की शिकायत के बाद जिला पंचायत सीईओ अनुकूल जैन ने 11 जून को तीन सदस्यीय जांच दल गठित कर तीन दिन में रिपोर्ट मांगी थी, जांच रिपोर्ट के एक महीने बाद भी कार्रवाई शून्य है।

यह है पूरा मामला
विमुक्त, घुमक्कड़ एवं अर्द्धघुमक्कड़ जनजाति कल्याण विभाग ने सामुदायिक भवन निर्माण के लिए 19.98 लाख रुपये स्वीकृत किए थे, जिसमें से अप्रैल माह में 9 लाख 10 हजार 208 रुपये पंचायत के खाते में जमा हुए। आरोप है कि सरपंच और सचिव ने सीमेंट, गिट्टी, बालू, पानी के टैंकर, मशीन और सरिया जैसे सामग्री के फर्जी बिल बनाकर राशि निकाल ली, लेकिन मौके पर एक भी ईंट नहीं लगाई गई। जांच में यह बात सामने आई कि कोई निर्माण कार्य शुरू ही नहीं हुआ था। इसके बावजूद, घोटाला उजागर होने के बाद अब दोषी तीव्र गति से निर्माण कार्य शुरू करवाने में जुट गए हैं।

शिकायतकर्ता को धमकाने का आरोप
घोटाले की शिकायत करने वाले ग्रामीणों पर सरपंच अर्जुन नाडावत ने दबाव बनाया। आरोप है कि उन्होंने पुलिस बुलाकर शिकायतकर्ताओं पर थाने में झूठा प्रकरण दर्ज करने की धमकी दी। डर के कारण एक ग्रामीण ने लिखित में दे दिया कि वह कोई कार्रवाई नहीं चाहता। इस घटना ने स्थानीय लोगों में आक्रोश पैदा कर दिया है।

जांच में देरी, कार्रवाई पर सवाल
जिला पंचायत सीईओ अनुकूल जैन ने दो दिन पहले एक अखबार से बातचीत में कहा था कि जनहित के कार्यों का दुरुपयोग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और जांच रिपोर्ट के आधार पर जल्द कार्रवाई होगी। इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। जानकारों का कहना है कि ऐसे मामलों में सरपंच को पंचायती राज अधिनियम की धारा 40 के तहत पद से हटाने और सचिव को निलंबित करने की कार्रवाई होनी चाहिए।

राजस्व हानि और भ्रष्टाचार का खेल
यह घोटाला न केवल फर्जी बिलों तक सीमित है, बल्कि इससे पंचायत को लाखों रुपये की राजस्व हानि भी हुई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नेताओं के दबाव में अधिकारी जांच को लटकाते हैं, जिससे भ्रष्टाचार करने वालों का मनोबल बढ़ता है। जनपद सीईओ और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा इस मामले में संज्ञान न लेने से ग्रामीणों में नाराजगी है।
जिला पंचायत की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। स्थानीय लोग और जागरूक नागरिक इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यदि दोषियों के खिलाफ जल्द कार्रवाई नहीं हुई, तो यह भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का एक और उदाहरण बन सकता है।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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