‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ के नारों के बीच परिवहन की मार, बस में बैठने तक से रोकने के आरोप; एसडीएम को ज्ञापन देकर तत्काल कार्रवाई की मांग
जावरा। ग्रामीण क्षेत्रों से स्कूल-कॉलेज पहुंचने वाले विद्यार्थियों के सामने परिवहन व्यवस्था बड़ी परेशानी बनती जा रही है। निजी बस संचालकों पर छात्र-छात्राओं को बस में बैठाने से मना करने और कई मामलों में विद्यार्थियों से पूरा किराया वसूलने के आरोपों ने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पढ़ाई के लिए रोजाना सफर करने वाले ग्रामीण विद्यार्थियों को अगर बस में जगह तक नहीं मिलेगी, तो फिर ‘शिक्षा सबके लिए’ के दावे आखिर किस काम के?

इसी मुद्दे को लेकर छात्र नेताओं ने अब प्रशासन के खिलाफ आवाज बुलंद की है। छात्र नेता जितेन्द्र यादव के नेतृत्व में दीपक पाटीदार नवेली, अमित राठौर, रोहित पाटीदार, पवन पाटीदार, हरीश पाटीदार, पंकज, शिवराज और ललित सेन सहित छात्र-छात्राओं ने अनुविभागीय अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की।
बस संचालकों की मनमानी से पढ़ाई पर असर
छात्र नेताओं ने आरोप लगाया कि ग्रामीण विद्यार्थी स्कूल और महाविद्यालय पहुंचने के लिए निजी बसों पर निर्भर हैं। लेकिन कई बार बस संचालक विद्यार्थियों को बस में बैठाने से ही इनकार कर देते हैं। वहीं कुछ मामलों में छात्र-छात्राओं से पूरा किराया वसूले जाने की शिकायत भी सामने आई है।
ऐसे में सवाल यह है कि ग्रामीण विद्यार्थी आखिर पढ़ने जाएं तो जाएं कैसे? परिवहन व्यवस्था की अनदेखी का सीधा असर उनकी शिक्षा पर पड़ रहा है।
छात्राओं के सामने ज्यादा गंभीर संकट
छात्र नेताओं ने ग्रामीण छात्राओं की समस्या को विशेष रूप से गंभीर बताया। उनका कहना है कि सरकार एक ओर ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ जैसे अभियान चलाकर बालिकाओं को उच्च शिक्षा के लिए प्रोत्साहित कर रही है, लेकिन दूसरी ओर सुरक्षित और नियमित परिवहन सुविधा के अभाव में ग्रामीण छात्राओं के सामने पढ़ाई जारी रखने का संकट खड़ा हो रहा है।
नारे मंचों से अच्छे लगते हैं, लेकिन उनकी असली परीक्षा गांव की बेटी के कॉलेज तक सुरक्षित पहुंचने में होती है।
अब जांच और कार्रवाई की मांग
ज्ञापन के माध्यम से प्रशासन से मांग की गई कि संबंधित निजी बसों की तत्काल जांच कराई जाए। विद्यार्थियों को बस में बैठने से रोकने तथा नियम विरुद्ध किराया वसूलने वाले बस संचालकों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
छात्र नेताओं ने स्पष्ट कहा कि परिवहन की समस्या के कारण किसी भी विद्यार्थी की पढ़ाई नहीं रुकनी चाहिए। खासकर ग्रामीण छात्राओं के लिए सुरक्षित, नियमित और सम्मानजनक परिवहन व्यवस्था सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।
अब देखना यह है कि ज्ञापन के बाद प्रशासन बस संचालकों की कथित मनमानी पर लगाम कसता है या ग्रामीण विद्यार्थियों की यह परेशानी भी फाइलों में दबकर रह जाती है।
Author: Dashpur Disha
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