मंदसौर। सुवासरा तहसील के ग्राम बसई में उद्योग विभाग की शासकीय भूमि पर कंपोजिट देशी-विदेशी शराब दुकान के संचालन को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। मामले में सुवासरा विधायक एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह डंग के पूर्व निजी सचिव सुमेर सिंह चंद्रावत ने गंभीर सवाल उठाते हुए प्रशासन और आबकारी विभाग से जांच तथा कार्रवाई की मांग की है।
सुमेर सिंह का आरोप है कि ग्राम बसई स्थित सर्वे नंबर 116(S), कुल रकबा 20.180 हेक्टेयर भूमि शासकीय है और इसे उद्योग विभाग को आवंटित किया जा चुका है। उनका कहना है कि कलेक्टर मंदसौर न्यायालय के प्रकरण क्रमांक 0027/अ-20(1)/2020-21 में पारित आदेश दिनांक 09 जुलाई 2021 तथा 05 नवंबर 2024 के खसरा अमल के दस्तावेज इस स्थिति की पुष्टि करते हैं।

टीन शेड में दुकान चलाने का आरोप
सुमेर सिंह के मुताबिक, उक्त शासकीय भूमि पर बिना विधिक लीज अथवा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के कंटेनर और टीन शेड रखकर शराब दुकान संचालित की जा रही है। उनका दावा है कि यदि भूमि पर सक्षम अनुमति के बिना इस तरह का व्यावसायिक उपयोग किया जा रहा है तो यह मध्य प्रदेश भू-राजस्व संहिता की धारा 248 के तहत अतिक्रमण का मामला बन सकता है।
उन्होंने प्रशासन से मौके का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने और भूमि संबंधी दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की है।
मुख्य मार्ग पर होर्डिंग और दिशा-सूचक को लेकर भी सवाल
मामले में शराब दुकान के प्रचार को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। सुमेर सिंह का आरोप है कि मुख्य मार्ग पर शराब दुकान की ओर संकेत करता हुआ बड़ा होर्डिंग लगाया गया है, जिसमें तीर के निशान के माध्यम से पीछे स्थित कंटेनर की ओर रास्ता बताया जा रहा है।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के ‘स्टेट ऑफ तमिलनाडु बनाम के. बालू’ मामले में शराब दुकानों से संबंधित दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए इस पूरे मामले की जांच की मांग की है। हालांकि, इन प्रावधानों का स्थानीय दुकान पर वास्तविक रूप से उल्लंघन हुआ है या नहीं, यह सक्षम विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
दुकान का स्थान बदले जाने का भी आरोप
सुमेर सिंह ने वर्ष 2026-27 के लाइसेंसी यश शर्मा पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पूर्व निर्धारित पक्के परिसर के बजाय पीछे रास्ते में कंटेनर रखकर शराब दुकान संचालित की जा रही है।
आबकारी नियमों में दुकान के स्वीकृत स्थल और उसकी चौहद्दी से संबंधित प्रावधानों का हवाला देते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि यदि दुकान का स्थल बदला गया है तो क्या इसके लिए सक्षम अधिकारी से विधिवत अनुमति ली गई थी?
‘डायरी सिस्टम’ पर भी उठे सवाल
मामले में ‘डायरी सिस्टम’ के जरिए शराब बिक्री किए जाने को लेकर भी आरोप लगाए गए हैं। सुमेर सिंह का कहना है कि क्षेत्र में शराब बिक्री की व्यवस्था और दुकान संचालन की वास्तविक स्थिति की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
उन्होंने आबकारी विभाग की भूमिका पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यदि शिकायतों और दस्तावेजों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती है तो इससे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े होना स्वाभाविक है।
पंचनामा बनाकर कार्रवाई की मांग
सुमेर सिंह ने प्रशासन से मांग की है कि राजस्व विभाग की टीम मौके पर पहुंचकर सर्वे नंबर 116(S) की भूमि का निरीक्षण एवं पंचनामा तैयार करे। साथ ही उद्योग विभाग की भूमि पर रखे कंटेनर एवं अन्य निर्माण की वैधता की जांच की जाए।
उन्होंने नियमों के विपरीत शराब दुकान संचालित पाए जाने पर दुकान को बंद करने तथा संबंधित लाइसेंसी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।








