भानपुरा में सरकारी अस्पताल में पांच डॉक्टरों की नियुक्ति का सपना अब भी अधूरा, दो महीने बाद भी पांच में से एक ने भी नहीं की जॉइनिंग

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दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल

मंदसौर। जिले के भानपुरा सिविल अस्पताल में स्वास्थ्य सुविधाओं को बेहतर करने के लिए सरकार ने पांच डॉक्टरों की नियुक्ति का आदेश जारी किया था, लेकिन दो महीने बीत जाने के बाद भी इनमें से एक भी डॉक्टर ने जॉइन नहीं किया। यह स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की अनिच्छा को उजागर करती है।

नियुक्ति आदेश और वास्तविकता का अंतर
संचालनालय लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, भोपाल द्वारा 27 जून 2025 को जारी पत्र (क्रमांक/01/विज्ञप्त/सेल-संविदा/2025/631) के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न शासकीय अस्पतालों में 789 बंधपत्र चिकित्सकों की पदस्थापना की गई थी। इसमें भानपुरा सिविल अस्पताल के लिए पांच चिकित्सकों—डॉ. आमिर मुंशी, डॉ. सुमित सिंह, डॉ. सुप्रिया कुमारी, डॉ. बेग मिर्जा और डॉ. चेष्टा गोविल—को नियुक्त किया गया था।

बंधपत्र की शर्तों के अनुसार, इन चिकित्सकों को आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी के अधीन अपनी उपस्थिति दर्ज करानी थी। ऐसा न करने पर बंधपत्र का उल्लंघन माना जाएगा, और शासन द्वारा उचित कार्यवाही की जा सकती है। हालांकि, दो महीने बाद भी इन पांच में से किसी ने जॉइनिंग नहीं दी, जिससे स्थानीय लोगों में निराशा है।

बीएमओ का दावा: पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध
भानपुरा ब्लॉक मेडिकल ऑफिसर (बीएमओ) डॉ. गौरव सिजेरिया ने दावा किया कि भानपुरा सिविल अस्पताल और क्षेत्र में पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा, “केवल 4-5 जगहों पर डॉक्टरों की कमी है। एक डॉक्टर आज नावली पीएचसी में जॉइन करने वाला है, और कल एक महिला डॉक्टर ने भानपुरा अस्पताल में जॉइन किया है।” हालांकि, नियुक्त पांच डॉक्टरों की गैरमौजूदगी पर उनका जवाब संतोषजनक नहीं रहा।

राजनीतिक शोर, लेकिन जमीनी हकीकत शून्य
स्थानीय विधायक चंदरसिंह सिसौदिया के समर्थकों और भाजपा कार्यकर्ताओं ने इन नियुक्तियों पर खूब प्रचार किया। पोस्टरों और सुर्खियों के जरिए इसे बड़ी उपलब्धि के रूप में पेश किया गया, लेकिन वास्तविकता में कोई डॉक्टर जॉइन न करने से यह प्रचार खोखला साबित हुआ है।

ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की अनिच्छा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में मध्यप्रदेश में हजारों बंधपत्र चिकित्सकों ने ग्रामीण क्षेत्रों में जॉइनिंग नहीं की। भानपुरा का यह मामला भी उसी समस्या का हिस्सा है। ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, दूरदराज के स्थान और अन्य कारणों से डॉक्टर इन क्षेत्रों में काम करने से कतराते हैं।

भानपुरा सिविल अस्पताल में पांच डॉक्टरों की नियुक्ति का आदेश तो जारी हुआ, लेकिन जमीनी स्तर पर इसका कोई असर नहीं दिखा। ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए सरकार को ठोस कदम उठाने होंगे, ताकि बंधपत्र चिकित्सकों को जॉइनिंग के लिए प्रेरित किया जा सके। अन्यथा, कागजी आदेश और प्रचार के भरोसे ग्रामीण क्षेत्रों की स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की उम्मीद अधूरी ही रहेगी।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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