शामगढ़ कृषि उपजमंडी में टेंडर घोटाले का आरोप: ऑनलाइन प्रक्रिया में ऑफलाइन दस्तावेज मांगकर 2 आवेदन किए निरस्त!

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दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल

मन्दसौर। कृषि उपज मंडी शामगढ़ में 80 मीट्रिक टन क्षमता के टोल कांटे की स्थापना के लिए निकाले गए ऑनलाइन टेंडर में बड़ा घोटाला करने के आरोप मंडी प्रबंधन पर लगा है। ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया होने के बावजूद ऑफलाइन दस्तावेज मांगकर 6 में से 2 आवेदनों को निरस्त कर दिया गया। इस प्रक्रिया में अनियमितता का आरोप लग रहा है, क्योंकि भारसाधक अधिकारी और प्रभारी तहसीलदार की अनुपस्थिति में उपयंत्री ऋषि सिंह और मंडी सचिव पर्वत सिंह यादव ने लिफाफे खोलकर स्वीकृति और निरस्ती का निर्णय ले लिया।

टेंडर में धांधली का ये लगा आरोप
80 मीट्रिक टन टोल कांटे के लिए बीओटी आधार पर निविदा निकाली गई थी, जिसकी अंतिम तिथि 11 अगस्त 2025 थी। जबकि मंडी सचिव पर्वत सिंह यादव के अनुसार, ऑनलाइन टेंडर जमा करने की अंतिम तिथि 18 अगस्त थी, जबकि ऑफलाइन दस्तावेज जमा करने की तारीख 20 अगस्त थी। 18 अगस्त तक 4 टेंडर प्राप्त हुए, और 20 अगस्त को प्राप्त 2 टेंडरों को अमान्य कर दिया गया। हालांकि, मंडी सचिव यह स्पष्ट नहीं कर पाए कि जब टेंडर प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन थी, तो ऑफलाइन दस्तावेज क्यों मांगे गए और 2 टेंडर कैसे निरस्त किए गए। सूत्र बताते है कि बाकी बचे दो टेंडरों में से एक को स्वीकृति के लिए चुना जाना तय माना जा रहा है।

विधायक ने दिए जांच के आदेश
शुक्रवार को मंडी में 74.70 लाख की लागत से बने तीन टीन शेड और 43.83 लाख की लागत से बने सीसी रोड के लोकार्पण समारोह में विधायक हरदीप सिंह डंग ने पारदर्शिता की बात कही। जब पत्रकारों ने टेंडर में धांधली का मुद्दा उठाया, तो विधायक ने मामले की जांच कराने की बात कही। उनके इस बयान के बाद मंडी के अधिकारी और कर्मचारी सकते में आ गए।

मंडी सचिव का कहना है
मंडी सचिव पर्वत सिंह यादव ने कहा, “ऑनलाइन टेंडर की अंतिम तिथि 18 अगस्त थी, और ऑफलाइन दस्तावेज की 20 अगस्त। 20 अगस्त को प्राप्त दो टेंडर अमान्य किए गए। टेंडर ऑनलाइन ही खुलेंगे और राशि भी ऑनलाइन तय होगी, जो सबके सामने होगी।” वहीं, उपयंत्री ऋषि सिंह से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उनका फोन स्विच ऑफ रहा।

पारदर्शिता पर सवाल
टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी और भारसाधक अधिकारी की अनुपस्थिति में लिफाफे खोलने की कार्रवाई ने मंडी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। विधायक द्वारा जांच की घोषणा के बाद अब यह देखना होगा कि इस मामले में क्या कार्रवाई होती है और क्या दोषियों पर कोई सख्त कदम उठाया जाएगा।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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