फर्जी हॉलमार्क की ज्वेलरी का सौदागर डीपी ज्वेलर्स मंदसौर में प्रदर्शनी लगाकर बेच रहा ज्वेलरी!

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

शिकायत सही पाए जाने पर हॉलमार्क लाइसेंस हो चुका निरस्त, रतलाम सराफा एसोसिएशन ने भी किया था एसोसिएशन से बाहर

मंदसौर। सोने-चांदी के आभूषणों का कथित बड़ा व्यापारी बताने वाला डीपी ज्वेलर्स इन दिनों मंदसौर के हर्ष विलास पैलेस रेलवे स्टेशन के पास में 14, 15 और 16 अप्रैल 2026 को तीन दिवसीय एक्सक्लूसिव ज्वेलरी एक्जीबिशन एंड सेल चला रहा है। कंपनी लाखों परिवारों के भरोसे, पारदर्शिता और बेहतरीन डिजाइनों का दावा कर रही है, लेकिन इसकी पुरानी गतिविधियों पर सवाल उठ रहे हैं।

वर्ष 2016 में रतलाम स्थित डीपी ज्वेलर्स के खिलाफ प्रशांत जैन नामक व्यक्ति ने फर्जी हॉलमार्क की ज्वेलरी बेचने की शिकायत बीआईएस को की थीं। जानकारी के अनुसार प्रशांत जैन ने डीपी ज्वेलर्स से आभूषण खरीदे थे जो शंका होने पर शिकायत की गई थी। शिकायत के आधार पर ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड्स की जांच टीम रतलाम पहुंची थी। जांच में पाया था कि कंपनी नकली हॉलमार्क का उपयोग कर रही थी। इसके बाद बीआईएस ने डीपी ज्वेलर्स का हॉलमार्क लाइसेंस निरस्त कर दिया था।
इस कार्रवाई के बाद फर्जी हॉलमार्क की ज्वेलरी बेचकर रतलाम की छवि खराब करने पर रतलाम सर्राफा एसोसिएशन ने भी डीपी को एसोसिएशन से बाहर कर दिया था। ये खबरे पूरे मध्यप्रदेश में मीडिया की सुर्खियां बनी थी।

नियमों के विरूद्ध लग रही मंदसौर में सोने चांदी के आभूषणों की प्रदर्शनी
नगर में रतलाम के एक बड़े सोने चांदी के आभूषणों के विक्रेता द्वारा दिनांक 14, 15 व 16 अप्रैल को नगर के निजी वैवाहिक रिसोर्ट में प्रदर्शनी लगाई जा रही है। जानकारी के अनुसार उक्त प्रदर्शनी लगाने के पूर्व आवश्यक वैधानिक अनुमतियों एवं नियमों का पालन नहीं किया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार इस प्रकार के प्रदर्शनी लगाने के लिए भू-उपयोग एवं व्यावसायिक अनुमति होना आवश्यक है लेकिन मंदसौर में जहां यह प्रदर्शनी लगाई जा रही है उस हर्ष विलास फोर्ट में मूलत: वैवाहिक आयोजनों हेतु संचालित किया जाता है। म.प्र. नगर पालिक निगम अधिनियम, 1956 की धारा 249 एवं 366 के तहत, किसी भी सामाजिक स्थल का उपयोग व्यावसायिक खुदरा विक्रय हेतु बिना टेम्परेरी ट्रेड लायसेंस के करना अवैध है। प्रदर्शनी स्थल पर भारी विद्युत साज-सज्जा की गई है। नियमों के अनुसार म.प्र. अग्नि शमन एवं आपातकालीन सेवा अधिनियम, 2013 की धारा 16 व 18 के तहत, अस्थाई संरचनाओं हेतु पृथक से फायर फिटनेस सर्टिफिकेट अनिवार्य होता है, जिसका भी अभाव बताया जा रहा है। शासन के नियमों के अनुसार ज्वेलरी तौल हेतु प्रयुक्त कांटे का विधिक माप विज्ञान अधिनियम, 2009 की धारा 24 के तहत स्थानीय निरीक्षक को पूर्व सूचना देना अनिवार्य है। बिना सत्यापन कांटे का उपयोग धारा 33 के तहत दंडनीय है, प्रदर्शनी को लेकर नाप तौल विभाग में कोई जानकारी नहीं दी गई है। वहीं म.प्र. शासन की अधिसूचना के अनुसार जीएसटी नियम 13८ एफ के तहत 2 लाख रूपये से अधिक की ज्वेलरी के अंत:राज्यीय परिवहन हेतु ई-वे बिल अनिवार्य है। आयोजक द्वारा बिना वैध ई-वे बिल एव अतिरिक्त व्यापार स्थल दर्ज किए बिना विक्रय किया जाना जीएसटी अधिनियम की धारा 122 का उल्लंघन है। अधिनियम, 2016 की धारा 14 व 15 के तहत बिना 6-डिजीट हॉलमार्क के ज्वेलरी का प्रदर्शन एवं विक्रय एक संज्ञेय अपराध है। म.प्र. राज्य सुरक्षा अधिनियम, 1990 एवं पुलिस एक्ट की धारा 31 के तहत इतने उच्च मूल्य के व्यावसायिक आयोजन हेतु स्थानीय प्रशासन/पुलिस की लिखित अनुमति एवं सुरक्षा एनओसी आवश्यक है।

स्थानीय व्यापारियों के साथ खिलवाड़
उपरोक्त अनुमतियों के बिना इस प्रदर्शनी का संचालन जन-सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है। ऐसी प्रदर्शनी से किसी बड़ी आपराधिक वारदात (जैसे चोरी या लूट) की संभावना बनी रहती है, जिसका दायित्व प्रशासन पर आ सकता है। साथ ही, इससे राज्य व केंद्र शासन को राजस्व की भारी हानि होगी। उक्त आयोजक का मन्दसौर में कोई अधिकृत शोरूम या स्थानीय व्यापारिक लाइसेंस नहीं है। बिना स्थानीय पंजीकरण के इस प्रकार की ज्वेलरी प्रदर्शनी लगाना स्थानीय व्यापार नियमों के विरुद्ध होकर अवैध है। इससे सबसे बड़ा नुकसान स्थानीय व्यापारियों को होता है जो कि अपना व्यापार पूरी तरह से नियमों के साथ करते है लेकिन इस प्रकार के बड़े व्यापारी बाहर से आकर शासन को राजस्व का नुकसान पहुंचाने के साथ – साथ स्थानीय व्यापारियों को भी नुकसान पहुंचा रहे है इन पर कोई कार्यवाही नहीं होने से स्थानीय व्यापारी खून के आंसू रोने को मजबूर है।

प्रशासन करे कार्यवाही
इस प्रकार के बड़े व्यापारी बाहर से आकर मंदसौर में अपना व्यापार कर चले जाते है जो खुले आम नियमों की धज्जियां उड़ा देते है। इस प्रकार की प्रदर्शनियों पर तत्काल प्रभाव से प्रशासन को रोक लगानी चाहिए और इन पर कड़ी कार्यवाही करना चाहिए।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

error: Content is protected !!