दशपुर दिशा । दीपक सोनी
जावरा। जावरा शहर एक गंभीर स्वास्थ्य आपदा की दहलीज पर खड़ा नजर आ रहा है। जिस मुख्य सड़क से प्रतिदिन जनप्रतिनिधि, अधिकारी, व्यापारी और आम नागरिक आवाजाही करते हैं, उसी सड़क के किनारे बहते गंदे नाले में दबी पड़ी पेयजल पाइपलाइन प्रशासन की घोर लापरवाही की गवाही दे रही है। यह नज़ारा किसी खतरे की घंटी नहीं, बल्कि सीधे-सीधे मौत को न्यौता देने जैसा है।
नाले के गंदे पानी से होकर घरों तक पहुंच रहा पेयजल
शहर के वीआईपी गेट हाउस और राजीव कॉलोनी को जोड़ने वाले प्रमुख मार्ग पर यह भयावह स्थिति सामने आई है, जहां पीने के पानी की पाइपलाइन सड़े-गले कचरे, कीचड़ और बदबूदार नाले के जहरीले पानी के बीच से होकर गुजर रही है। हालात इतने चिंताजनक हैं कि इस पाइपलाइन से सप्लाई होने वाला पानी अब शुद्ध पेयजल नहीं, बल्कि धीरे-धीरे ज़हर में तब्दील होता नजर आ रहा है।
एक कॉलोनी नहीं, हजारों परिवारों की जान खतरे में
सूत्रों के अनुसार यह पाइपलाइन चौपाटी क्षेत्र स्थित जनपद पंचायत कार्यालय के समीप बनी मुख्य जल टंकी से जुड़ी हुई है, जिससे राजीव कॉलोनी के साथ-साथ आसपास की कई अन्य कॉलोनियों में भी पानी की सप्लाई की जाती है। ऐसे में यदि यह एक पाइपलाइन दुषित होती है, तो हजारों परिवार रोजाना जहरीला पानी पीने को मजबूर हो सकते हैं।
इंदौर के भगीरथपुरा जैसी त्रासदी की आशंका
इंदौर के भगीरथपुरा क्षेत्र में दुषित पानी से हुई मौतों ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। इसके बाद प्रदेशभर में पेयजल पाइपलाइनों की जांच और सुधार की बात कही गई, लेकिन जावरा में हालात देखकर ऐसा लगता है कि प्रशासन अब भी आंख मूंदे बैठा है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी स्थिति में हैजा, पीलिया, टाइफाइड, डायरिया जैसी घातक बीमारियां कभी भी फैल सकती हैं।
शिकायतें हुईं, जनसुनवाई भी… लेकिन नतीजा शून्य
राजीव कॉलोनी सहित प्रभावित क्षेत्रों के रहवासियों ने नगर पालिका और संबंधित विभागों को कई बार शिकायतें कीं। जनसुनवाई में भी मामला उठाया गया, यहां तक कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर भी शिकायत दर्ज कराई गई, लेकिन न तो पाइपलाइन बदली गई और न ही नाले की सफाई हुई। हर बार फाइलें दबा दी गईं और जनता को सिर्फ आश्वासन मिले।
VIP रोज गुजरते हैं, लेकिन मौत का जाल नहीं दिखता?
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस सड़क से यह गंदा नाला और पाइपलाइन गुजर रही है, उसी मार्ग से रोजाना अधिकारी और जनप्रतिनिधि निकलते हैं। बावजूद इसके इस गंभीर खतरे पर किसी की नजर नहीं जाती, या जानबूझकर नजर फेर ली जाती है।
क्या प्रशासन किसी मौत का इंतजार कर रहा है?

जनता का सवाल साफ है—
क्या जावरा प्रशासन भी किसी बड़ी बीमारी या मौत के बाद ही जागेगा?
क्या जावरा को भी इंदौर के भगीरथपुरा जैसी त्रासदी झेलनी पड़ेगी?
अब जावरा की जनता सिर्फ कार्रवाई नहीं, जवाब चाहती है। यह सिर्फ तस्वीरों में दिखने वाली गंदगी नहीं, बल्कि प्रशासनिक संवेदनहीनता का जीता-जागता प्रमाण है।
Author: Dashpur Disha
दशपुर दिशा समाचार पत्र भारत के प्रेस महापंजीयक कार्यालय नई दिल्ली से पंजीकृत है। दशपुर दिशा मालवांचल में खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित समाचार पत्र है। www. dashpurdisha.com हमारी अधिकृत वेबसाइट है।









