पीजी कॉलेज प्राचार्य डॉ.ज्योतिस्वरूप दुबे नहीं मानते कलेक्टर का आदेश

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पूर्व प्राचार्य की पेंशन 17 महीने बाद भी लंबित, प्राचार्य डॉ. ज्योतिस्वरूप दुबे पर दुर्भावना और हठधर्मिता के गंभीर आरोप

दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। शासकीय राजीव गांधी स्नातकोत्तर महाविद्यालय मंदसौर के सेवानिवृत्त प्राध्यापक एवं पूर्व प्राचार्य ने वर्तमान प्राचार्य डॉ. ज्योतिस्वरूप दुबे पर गंभीर आरोप लगाते हुए कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग से गुहार लगाई है कि उनकी पेंशन को जानबूझकर, दुर्भावना और प्रतिशोध की भावना से रोका जा रहा है। सेवानिवृत्ति के 17 महीने बीत जाने के बावजूद उनका पूरी पेंशन का प्रकरण जिला पेंशन कार्यालय में प्रस्तुत तक नहीं किया गया है।

सेवानिवृत्त प्राध्यापक ने 30 जून 2024 को अर्द्धवार्षिकी पूर्ण कर रिटायरमेंट लिया था। उनके खिलाफ चली विभागीय जांच 13 मार्च 2025 को समाप्त होकर उन्हें क्लीन चिट मिल चुकी है। इसके बावजूद प्राचार्य डॉ. दुबे ने पेंशन प्रकरण आगे नहीं भेजा। सितंबर 2025 की अंतिम पेंशन (एरियर) भी रोक दी गई, जिससे दीपावली के समय परिवार को आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा।

ये है शिकायत में प्रमुख आरोप-
– सेवानिवृत्ति के 14 महीने बाद नियम-विरुद्ध तरीके से “शासकीय/अशासकीय संस्था में सेवारत न होने का प्रमाण-पत्र” मांगा गया, जबकि मध्यप्रदेश सिविल सेवा पेंशन नियम 1976 के संशोधित नियम 64 में इसका कोई प्रावधान नहीं है।
– कोषालय की आपत्ति और आधारभूत नियमों की प्रमाणित प्रति मांगने पर भी नहीं दी गई।
– कलेक्टर को 28 अक्टूबर 2025 और उसके बाद भी कई आवेदन दिए गए, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।
– प्राचार्य द्वारा व्यक्तिगत रूप से कई पत्रों और व्यक्तिगत मुलाकात की अनदेखी की गई।

कलेक्टर का सख्त रुख, फिर भी कोई राहत नहीं
जनसुनवाई में कलेक्टर श्रीमती अदिती गर्ग ने सभी विभागीय अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि
“बिना अधिकृत कारण के किसी भी सेवानिवृत्त कर्मचारी की पेंशन नहीं रोकी जाएगी। अनावश्यक विलंब करने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।”

कलेक्टर ने यह भी कहा था कि पेंशन से जुड़ी कोई फाइल लंबित नहीं रहनी चाहिए और पीड़ित व्यक्ति सीधे जनसुनवाई में शिकायत कर सकते हैं। इसके बावजूद पूर्व प्राचार्य की पेंशन प्रकरण में आज तक कार्रवाई नहीं हो सकी और न ही प्राचार्य के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई।

जनता, कर्मचारियों और जनप्रतिनिधियों के साथ भी असहयोगात्मक व्यवहार
महाविद्यालय के कर्मचारी, सेवानिवृत्त प्राचार्य,जनप्रतिनिधि और शहर के लोग भी प्राचार्य डॉ.ज्योतिस्वरूप दुबे के रवैये से क्षुब्ध हैं। दीपावली के दौरान कॉलेज ग्राउंड में पटाखा मार्केट के लिए एक गेट न खोलने का मामला भी लोगों के गुस्से का कारण बना था। कर्मचारियों का कहना है कि प्राचार्य का व्यवहार न केवल आमजन, बल्कि अपने सहकर्मियों और पूर्व प्राचार्य के प्रति भी असहयोगात्मक और अहंकारपूर्ण रहा है। कुछ माह पूर्व मन्दसौर विधायक विपिन जैन ने भी शासन स्तर पर डॉ.दुबे के मनमाने रवैये की शिकायत की थी जिसके बाद उच्च शिक्षा विभाग ने इन्हें कारण बताओ सूचना पत्र दिया था।

सेवानिवृत्त प्राध्यापक ने अंतिम बार 25 नवंबर 2025 को प्राचार्य को पत्र लिखकर सितंबर व अक्टूबर 2025 की अंतिम पेंशन जारी करने और मांगी गई जानकारी देने की मांग की, लेकिन उसका भी कोई जवाब प्राचार्य डॉ.ज्योतिस्वरूप दुबे ने नहीं दिया।

फिलहाल मामला कलेक्टर कार्यालय में लंबित है। सूत्रों का कहना है कि अब उच्च शिक्षा विभाग और जिला प्रशासन से उच्च स्तरीय हस्तक्षेप की मांग उठ रही है, क्योंकि कलेक्टर के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद प्राचार्य द्वारा उनकी अवहेलना करना गंभीर प्रशासनिक अनुशासनहीनता का मामला बनता जा रहा है।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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