शिक्षा विभाग की लापरवाही: दो साल पहले मृतक हो चुके शिक्षक को ई-अटेंडेंस न लगाने पर जारी हुई ‘कारण बताओ’ नोटिस

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मन्दसौर। मध्यप्रदेश के रीवा जिले का शिक्षा विभाग एक बार फिर सुर्खियों में है, लेकिन इस बार किसी सकारात्मक उपलब्धि के लिए नहीं। विभागीय लापरवाही का एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसमें दो वर्ष पूर्व मृत हो चुके एक शिक्षक को ई-अटेंडेंस न लगाने के लिए ‘कारण बताओ’ नोटिस जारी कर दिया गया। यह घटना न केवल विभाग की डिजिटल प्रणाली की कमजोरी को उजागर करती है, बल्कि शिक्षकों के बीच आक्रोश को भी बढ़ा रही है।

मृतक शिक्षक को नोटिस: विभाग की ‘भूल’ या सिस्टम की खराबी
जिले के जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय द्वारा हाल ही में ई-अटेंडेंस व्यवस्था को सख्ती से लागू करने के तहत सैकड़ों शिक्षकों को नोटिस जारी किए गए। इनमें से एक नोटिस का शिकार बने शासकीय शिक्षक देवतादीन कोल, जिनकी मृत्यु 29 अप्रैल 2023 को हो चुकी थी। विभाग ने 12 नवंबर 2025 को जारी इस नोटिस में उनसे ई-अटेंडेंस न लगाने का स्पष्टीकरण मांगा गया। नोटिस में स्पष्ट रूप से उल्लेख है कि “अनुपस्थिति के कारण स्पष्टीकरण प्रस्तुत करें”।

मृतक शिक्षक का मृत्यु प्रमाण पत्र

परिवार और सहकर्मियों के अनुसार, देवतादीन कोल की मृत्यु के बाद विभाग ने उनका रिकॉर्ड पोर्टल पर अपडेट नहीं किया, जिसके चलते यह ‘भूल’ हुई। यह मामला रीवा संभाग के संयुक्त संचालक लोक शिक्षण के स्तर पर भी देखा गया है, जहां इसी तरह के प्रशिक्षण शिविरों में अनुपस्थिति के नाम पर मृत शिक्षकों को नोटिस भेजे जा चुके हैं।
एक समान घटना सीधी जिले में भी सामने आई, जहां संभाग स्तर के प्रशिक्षण में अनुपस्थिति का हवाला देकर मृत शिक्षक को नोटिस जारी किया गया। आजाद अध्यापक शिक्षक संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष विजय तिवारी ने इसे “दुर्भाग्यपूर्ण और अमानवीय” बताते हुए कड़ी निंदा की है।

सेवानिवृत्त और स्थानांतरित शिक्षकों पर भी नोटिस
यह नोटिस केवल मृतक शिक्षकों तक सीमित नहीं है। विभाग ने थोक के भाव में सेवानिवृत्त हो चुके शिक्षकों और अन्य जिलों में स्थानांतरित हो चुके कर्मचारियों को भी ई-अटेंडेंस न लगाने के लिए नोटिस भेजे हैं। प्रदेश स्तर पर ई-अटेंडेंस अनिवार्य होने के बाद से अब तक करीब 1,500 से अधिक शिक्षकों और प्राचार्यों को ऐसे नोटिस मिल चुके हैं।

शिक्षक संगठनों का कहना है कि यह नोटिस केवल “कमाई का जरिया” बन गए हैं, क्योंकि इनका जवाब न देने पर जुर्माना या अन्य कार्रवाई की धमकी दी जाती है। एक शिक्षक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “विभाग का पोर्टल अपडेट नहीं है, फिर भी हमें जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। यह न्यायोचित नहीं।”

उच्च न्यायालय में लंबित मामला
ई-अटेंडेंस को लेकर विवाद लंबे समय से चला आ रहा है। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय में यह मामला प्रचलन में है, जहां शिक्षक संगठन अनिवार्यता पर सवाल उठा रहे हैं। उनका तर्क है कि पर्सनल मोबाइल पर हाजिरी लगाना गोपनीयता का उल्लंघन है और विभाग को सरकारी डिवाइस उपलब्ध करानी चाहिए। जबलपुर जिले में एक शिक्षिका ने नोटिस के जवाब में यही लिखा, जिससे विभाग में हड़कंप मच गया। शिक्षकों की मांग है कि न्यायालय के निर्णय तक ई-अटेंडेंस को बाध्यकारी न बनाया जाए

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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