वरिष्ठ पत्रकार कैलाश सनोलिया ने प्रेसवार्ता कर किया खुलासा – 253 दिनों में केवल दो बार पानी की लेब टेस्टिंग करवाई, अरबों के बजट वाली नपा के पास लेब टेस्टिंग के लिए 4100 रुपए कमी?
नागदा। सूचना के अधिकार (आरटीआई) से सामने आए एक चौंकाने वाले खुलासे ने नागदा नगर पालिका परिषद की लापरवाही को उजागर कर दिया है। शहर की करीब एक लाख आबादी को 253 दिनों में से 251 दिन बिना लैब टेस्ट का पानी पिलाया गया। वरिष्ठ पत्रकार और आरटीआई कार्यकर्ता कैलाश सनोलिया ने इस मामले का पर्दाफाश करते हुए दावा किया कि नपा परिषद ने केवल दो दिन (6 फरवरी और 4 जून 2025) को ही पानी के सैंपल प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, उज्जैन को जांच के लिए भेजे। इस लापरवाही ने नपा के शुद्ध पेयजल आपूर्ति के दावों की पोल खोल दी है।

आरटीआई से उजागर हुआ सच
गुरुवार को एक निजी होटल में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैलाश सनोलिया ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और नपा से प्राप्त दस्तावेज पेश किए। इनके अनुसार, 1 जनवरी 2025 से 10 सितंबर 2025 तक 253 दिनों में सिर्फ दो बार पानी की जांच हुई। बाकी 251 दिन 17 हजार जल उपभोक्ताओं को बिना शुद्धता जांचे पानी सप्लाई किया गया। सनोलिया ने कहा कि यह जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ है, जिसके लिए नपा के अधिकारी और जनप्रतिनिधि जिम्मेदार हैं।
दो सैंपल की देरी से आई रिपोर्ट
नपा ने 6 फरवरी और 4 जून को भेजे गए सैंपलों की जांच रिपोर्ट क्रमशः 11 और 8 दिन बाद प्राप्त की। इस दौरान भी बिना शुद्धता जांचे पानी की आपूर्ति जारी रही। सवाल उठता है कि जनता की सेहत के साथ इस लापरवाही के लिए कौन जिम्मेदार है?
मटमैला पानी, झूठे दावे
चंबल में बाढ़ के दौरान सितंबर में एक सप्ताह तक नलों से मटमैला और बदबूदार पानी सप्लाई हुआ। जनता के सवाल उठाने पर जलकार्य प्रभारी प्रकाश जैन ने 7 सितंबर को सोशल मीडिया पर लाइव होकर दावा किया कि पानी शुद्ध है और प्रतिदिन सैंपल उज्जैन भेजे जा रहे हैं। लेकिन आरटीआई से पता चला कि उनके लाइव के तीसरे दिन ही सैंपल जांच के लिए भेजा गया। इसके लिए प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 4100 रुपये की फीस मांगी, जो नपा ने आज तक अदा नहीं की। नतीजतन, उस सैंपल की जांच रिपोर्ट भी नपा को नहीं मिली।
एक अरब का बजट, 4100 रुपये की कमी
नागदा नपा का वार्षिक बजट एक अरब रुपये है, लेकिन सैंपल जांच के लिए महज 4100 रुपये की फीस नहीं दी गई। यह नपा की लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी को दर्शाता है। नायन ग्राम स्थित फिल्टर प्लांट की लैब खराब होने के कारण सैंपल उज्जैन भेजे जाते हैं, लेकिन इसकी प्रक्रिया में भी ढिलाई बरती जा रही है।
नेता-अफसर पीते हैं आरओ वॉटर
हैरानी की बात है कि नपा के अधिकारी और जनप्रतिनिधि खुद नलों का पानी नहीं पीते। वे अपने कार्यालयों में आरओ वॉटर की कैन मंगवाते हैं। इससे साफ है कि 24 करोड़ रुपये की जल आवर्धन योजना के तहत बने फिल्टर प्लांट के पानी की गुणवत्ता पर उन्हें भी भरोसा नहीं है। जनसुनवाई में जब अभिभाषक संघ अध्यक्ष विजय वर्मा ने नपा सीएमओ प्रेमकुमार सुमन को नल का पानी पीने को कहा, तो उन्होंने बहाना बना लिया।
जनप्रतिनिधियों की खींचतान
नपा में सत्तापक्ष और विपक्ष की आपसी खींचतान के चलते जनता के हितों की अनदेखी हो रही है। भाजपा बहुमत वाली परिषद के जनप्रतिनिधि इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए हैं। जनता की सेहत से जुड़े इस मामले में कोई जवाबदेही तय नहीं की जा रही।
नागदा की जनता को बिना लैब टेस्ट का पानी पिलाने का यह मामला न केवल नपा की लापरवाही को उजागर करता है, बल्कि जनता के स्वास्थ्य के प्रति उनकी उदासीनता को भी दर्शाता है। सवाल यह है कि आखिर कब तक जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ होता रहेगा और इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?
Author: Dashpur Disha
दशपुर दिशा समाचार पत्र भारत के प्रेस महापंजीयक कार्यालय नई दिल्ली से पंजीकृत है। दशपुर दिशा मालवांचल में खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित समाचार पत्र है। www. dashpurdisha.com हमारी अधिकृत वेबसाइट है।









