दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। जिले में स्थित गांधीसागर बांध, जो कि प्रदेश का सबसे बड़ा मानव निर्मित जलाशय है, लंबे समय से अवैध मछली परिवहन की समस्या से जूझ रहा है। पिछले कई वर्षों से चंबल नदी के इस जलाशय से मछलियों के अवैध आखेटन और परिवहन की खबरें सामने आती रही हैं। वर्ष 2023 में मछलियों की कमी के कारण ठेकेदार द्वारा ठेका छोड़ दिए जाने के बाद स्थिति और गंभीर हो गई थी। इसके परिणामस्वरूप, अवैध मछली परिवहन में वृद्धि हुई और मछलियों की तस्करी पश्चिम बंगाल जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक होने की बात सामने आई। पुलिस ने कई बार अवैध मछली परिवहन करते हुए लोगों को पकड़ा, लेकिन इस गैरकानूनी गतिविधि पर पूरी तरह अंकुश नहीं लग सका।
मछली की कमी और ठेका रद्द होने की पृष्ठभूमि
वर्ष 2023 में गांधीसागर जलाशय में मछलियों की संख्या में कमी के कारण ठेकेदार ने काम छोड़ दिया था। इसके बाद मध्यप्रदेश मत्स्य महासंघ द्वारा कोई नया ठेका जारी नहीं किया गया था। इस वजह से जलाशय में मछलियों का अवैध आखेटन और परिवहन बेरोकटोक चलता रहा। स्थानीय मछुआरों और व्यवसायियों के बीच भी इस स्थिति को लेकर असंतोष था, क्योंकि अवैध परिवहन से न केवल जलाशय की जैव-विविधता पर असर पड़ रहा था, बल्कि वैध मछली व्यवसाय भी प्रभावित हो रहा था।

मत्स्य महासंघ का नया कदम
इस समस्या से निपटने के लिए मध्य प्रदेश मत्स्य महासंघ सहकारी मर्यादित, भोपाल ने 25 जुलाई 2025 को एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए गांधीसागर, मोहिनी, और सगढ़ जलाशयों से मछली आखेटन और विक्रय के लिए अल्पकालीन निविदा सूचना जारी की है। इस निविदा के माध्यम से मत्स्य महासंघ का लक्ष्य जलाशयों से मछली के वैध और व्यवस्थित आखेटन को बढ़ावा देना है, ताकि अवैध परिवहन पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।
निविदा की प्रमुख शर्तें
गांधीसागर जलाशय के लिए निविदा में धरोहर राशि 289.94 लाख रुपये निर्धारित की गई है, जबकि निविदा प्रपत्र का मूल्य 15,000 रुपये रखा गया है। निविदा प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होगी। इच्छुक ठेकेदार 26 जुलाई 2025, दोपहर 3:00 बजे से 5 अगस्त 2025, दोपहर 3:00 बजे तक निविदा प्रपत्र और दरें अपलोड कर सकते हैं। निविदाएं 6 अगस्त 2025 को दोपहर 3:30 बजे खोली जाएंगी। इस पारदर्शी प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मछली आखेटन और विक्रय का कार्य केवल अधिकृत ठेकेदारों द्वारा ही किया जाए।
अवैध परिवहन पर रोक और भविष्य की संभावनाएं
इस निविदा के लागू होने से गांधीसागर जलाशय से अवैध मछली परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण की उम्मीद है। इससे न केवल जलाशय की मछली संपदा का संरक्षण होगा, बल्कि स्थानीय मछुआरों और वैध व्यवसायियों को भी लाभ मिलेगा। साथ ही, मत्स्य महासंघ की यह पहल मछली व्यवसाय को संगठित और पारदर्शी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकती है।
गांधीसागर जलाशय जैसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन का संरक्षण और इसका उचित उपयोग न केवल पर्यावरणीय दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए भी आवश्यक है। मत्स्य महासंघ की इस नई निविदा से अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगने और मछली व्यवसाय को नई दिशा मिलने की संभावना है। यह कदम मंदसौर जिले के मछुआरा समुदाय और संबंधित व्यवसायियों के लिए एक सकारात्मक बदलाव ला सकता है।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









