मंदसौर। मंदसौर जिला शिक्षा विभाग में क्रमोन्नति को लेकर एक बड़ा घोटाला सामने आया है। इस मामले में माननीय इंदौर उच्च न्यायालय ने स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव, वल्लभ भवन, भोपाल पर 11 अगस्त 2025 को 5000 रुपये का अर्थदंड लगाया है। यह कार्रवाई भालोट हायर सेकेंडरी स्कूल, मंदसौर के शिक्षक कमल सिंह तोमर की याचिका पर की गई, जिन्होंने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाई।
कमल सिंह तोमर ने बताया कि उनकी क्रमोन्नति वर्ष 2018 में होनी थी, लेकिन विभाग में जड़ से लेकर पत्तों तक फैले भ्रष्टाचार के कारण यह प्रक्रिया रुकी रही। मंदसौर जिला शिक्षा कार्यालय से लेकर भोपाल के वल्लभ भवन तक भ्रष्टाचार की जड़ें फैली हुई हैं। तोमर ने इस सिस्टम के खिलाफ न केवल आवाज उठाई, बल्कि उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाकर सत्य को उजागर किया। उनकी इस लड़ाई ने पूरे शिक्षा विभाग में हड़कंप मचा दिया है।

कमल सिंह तोमर, जो भालोट हायर सेकेंडरी स्कूल में शिक्षक और पूर्व प्रभारी प्राचार्य रह चुके हैं, ने अपने कार्यकाल में अनुकरणीय कार्य किए। वे समय पर स्कूल पहुंचने, देर तक रुकने, विद्यार्थियों को स्वयं पढ़ाने, स्टाफ को प्रेरित करने, और वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशों का समयबद्ध पालन करने के लिए जाने जाते हैं। उन्होंने चुनाव ड्यूटी और अन्य कार्यों को पूरी निष्ठा से निभाया। स्कूल में सीसीटीवी चेक करना, निरंतर निरीक्षण, नकल-मुक्त परीक्षाएं कराना, और कमजोर विद्यार्थियों के लिए सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक अतिरिक्त कक्षाएं आयोजित करना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा।
उनके प्रयासों का नतीजा यह रहा कि कक्षा 10वीं का परिणाम 94% और 12वीं का 81% रहा, जिसमें सभी विद्यार्थी प्रथम और द्वितीय श्रेणी में उत्तीर्ण हुए। स्कूल में पेयजल, शौचालय, पंखे, रंगाई-पुताई, बगीचा, हाई मास्ट लाइट, फाइबर नेट कनेक्शन, आईटी लैब, और वीटीएम लैब जैसी सुविधाएं स्थापित की गईं। खेल सामग्री और जनप्रतिनिधियों के सहयोग से स्कूल का सर्वांगीण विकास किया गया। इसके अलावा, विद्यार्थियों की समस्याओं का त्वरित समाधान, शुल्क में कमी, और अनुशासनहीनता पर दंड जैसे कदम उठाए गए।
विभागीय भ्रष्टाचार और अन्याय
2018 में प्रभारी प्राचार्य के रूप में कार्यरत तोमर के साथ कुछ रसूखदार अधिकारियों ने संगठित होकर अन्याय किया। ग्रामीणों के साथ मिलकर उनके खिलाफ साजिश रची गई। इस अन्याय के खिलाफ तोमर ने विभाग में पत्राचार किया, लेकिन सुनवाई न होने पर उन्होंने उच्च न्यायालय का रुख किया। माननीय न्यायमूर्ति श्री विजय कुमार शुक्ला ने इस मामले की सुनवाई करते हुए विभाग की लापरवाही पर सख्त रुख अपनाया। चार याचिकाओं की सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि विभाग जानबूझकर जवाब देने में देरी कर रहा था। कोर्ट ने प्रमुख सचिव पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया और अंतिम अवसर प्रदान किया।
कमल सिंह तोमर की इस लड़ाई ने यह साबित कर दिया कि “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं।” उनकी इस पहल ने न केवल भ्रष्टाचार के खिलाफ एक मिसाल कायम की, बल्कि शिक्षा विभाग के कर्मचारियों में भी डर का माहौल पैदा कर दिया। विभाग ने उन्हें उच्च पद का प्रलोभन भी दिया, लेकिन तोमर ने न्याय के रास्ते को चुना।
Author: Dashpur Disha
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