इलाज में लापरवाही से महिला की मौत का आरोप : पमनानी हॉस्पिटल के संचालक डॉ.सुरेश पमनानी और डॉ.एस.एस वर्मा पर गैर-इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज करने की मांग

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कलेक्टर की जनसुनवाई में हुई शिकायत के बाद सीएमएचओ ने जांच समिति गठन कर मांगी रिपोर्ट, डॉ.सुरेश पमनानी बोले मै तो सर्विस प्रोवाइडर हूं, छुट्टी के समय पेशेंट को पेशाब की दिक्कत थी

दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। मंदसौर के मेवातीपुरा, मदारपुरा निवासी शोएब खान ने पमनानी अस्पताल और इसके डॉक्टर एस.एस. वर्मा पर अपनी पत्नी शाहीदा बी की मृत्यु के लिए इलाज में लापरवाही का गंभीर आरोप लगाया है। शोएब ने कलेक्टर कार्यालय में जनसुनवाई प्रकरण क्र. 568397, दिनांक 26/08/2025 के तहत शिकायत दर्ज कराई, जिसमें उन्होंने अस्पताल और डॉक्टर के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने की मांग की है।

शिकायत में अस्पताल पर गम्भीर आरोप
शोएब के अनुसार, उनकी पत्नी शाहीदा बी को प्रसव के लिए 4 जुलाई 2025 को पमनानी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां 45,000 रुपये का डिलीवरी पैकेज तय किया गया। शिकायत में कहा गया है कि अस्पताल की नर्सों और कर्मचारियों का व्यवहार शुरू से ही ठीक नहीं था, और वे शाहीदा के साथ डांट-फटकार करते थे। प्रसव के दौरान अस्पताल द्वारा महिला चिकित्सक उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन डिलीवरी पुरुष चिकित्सक डॉ. एस.एस. वर्मा ने की।

शोएब का आरोप है कि डिलीवरी के बाद डॉ. वर्मा द्वारा शाहीदा की अंदरूनी सफाई ठीक ढंग से नहीं की गई, जिसके कारण उनके पेट में गंदा पानी भर गया और आंतरिक रक्तस्राव शुरू हो गया। इससे मूत्र मार्ग में रुकावट और दोनों किडनियों में खराबी आ गई। अस्पताल ने इस स्थिति को छिपाकर शाहीदा को अन्य बीमारी का हवाला देकर इंदौर के एमवाय अस्पताल रेफर कर दिया।

इंदौर और उदयपुर में भी हुआ उपचार
इंदौर के एमवाय अस्पताल में डॉक्टरों ने बताया कि अपर्याप्त सफाई के कारण गंदा पानी और रक्तस्राव से किडनी में समस्या उत्पन्न हुई। शाहीदा वहां सात दिन भर्ती रहीं। इसके बाद परिजन उन्हें उदयपुर के पैसिफिक अस्पताल ले गए, जहां 12 दिन के उपचार के दौरान सात बार डायलिसिस किया गया। वहां के चिकित्सकों ने भी यही पुष्टि की कि डिलीवरी के बाद की लापरवाही ही किडनी की समस्या का कारण बनी।

उदयपुर में छुट्टी के बाद शाहीदा को मंदसौर के अनुयोग अस्पताल में डायलिसिस के लिए भेजा गया, जहां 4-5 बार डायलिसिस हुआ। लेकिन 10 अगस्त 2025 को उपचार के दौरान शाहीदा की मृत्यु हो गई। अनुयोग अस्पताल के डॉक्टरों ने भी पमनानी अस्पताल की लापरवाही को मृत्यु का कारण बताया।

आर्थिक और मानसिक क्षति हुई
शोएब ने बताया कि उपचार के दौरान सीटी स्कैन, सोनोग्राफी, डायलिसिस और अन्य जांचों पर करीब 10 लाख रुपये खर्च हुए, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति डगमगा गई। शाहीदा की मृत्यु से उनके पति, पांच वर्षीय बेटे मोहम्मद उबैद और नवजात बेटी को अपूरणीय क्षति हुई। शोएब ने अस्पताल के संचालक सुरेश पमनानी और डॉ. एस.एस. वर्मा को इस मानसिक और आर्थिक नुकसान का जिम्मेदार ठहराया।

अस्पताल पर सिलसिलेवार लापरवाही का आरोप
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया कि पमनानी अस्पताल में पिछले एक महीने में डिलीवरी के 4-5 मामलों में महिलाओं की मृत्यु हुई है, फिर भी प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की। शोएब ने आरोप लगाया कि अस्पताल संचालक अयोग्य और लापरवाह डॉक्टरों को नियुक्त कर रिसर्च सेंटर के नाम पर प्रैक्टिस करा रहा है।

कलेक्टर के आदेश पर मुख्य स्वास्थ्य एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ.गोविंद सिंह चौहान ने इस गंभीर शिकायत की जांच के लिए तीन सदस्यीय जांच दल नियुक्त किया है, जिसमें डॉ. संगीता पाटीदार (स्त्री रोग विशेषज्ञ), डॉ. प्रीति मानावत (सर्जिकल विशेषज्ञ), और डॉ. सिद्धार्थ पाटीदार (मेडिकल ऑफिसर) शामिल हैं। जांच दल को सात दिनों में अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया है।

शोएब ने पमनानी अस्पताल के संचालक सुरेश पमनानी और डॉ. एस.एस.वर्मा के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज करने और उचित कार्रवाई की मांग की है। इस मामले ने मंदसौर में चिकित्सा सेवाओं की गुणवत्ता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं, और अब प्रशासन की कार्रवाई का इंतजार है।

यह कहना इनका है-
मेरा काम सर्विस प्रोवाइडर का है, मेरे यहां पेशेंट आया तब भी ठीक था और गया तब भी ठीक था। डॉ.वर्मा ने इलाज किया है। डिलीवरी का पेशेंट था, जब गया तब ठीक था केवल पेशाब कम आ रहा था –डॉ.सुरेश पमनानी, संचालक पमनानी हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर मन्दसौर

शिकायतकर्ता ने बताया कि हॉस्पिटल ने हमें अंधेरे में रखा, समय पर पूरी जानकारी नहीं दी। पत्नी को 8वें महीने में दिक्कत हुई थी, सिविल से रेफर किया मेडिकल कॉलेज तो हम पमनानी में ले गए। लड़की हुई थी, बच्चा आईसीयू में रहा। पेशाब में दिक्कत हुई, डॉ.वर्मा ने मामूली इन्फेक्शन बताकर MY इंदौर में रेफर किया। My के डॉक्टरों ने बताया कि यूरिन रुकने के कारण किडनी डैमेज में हो गई। सफाई सही नहीं करने के कारण खून के थक्के जम गए थे। कुछ समय तक डायलिसिस चली। उसके बाद पत्नी की डेथ हो गई – शोएब खान

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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