दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मन्दसौर। शामगढ़ क्षेत्र की प्राथमिक स्कूल शिक्षिका माया राठौर के नियम विरुद्ध अटैचमेंट के मामले में शिक्षा विभाग ने जांच दल का गठन कर लिया है। यह कदम जून 2025 में मामले के खुलासे के बाद उठाया गया है, जब कलेक्टर ने तत्काल निलंबन के निर्देश दिए थे। हालांकि, शिक्षा विभाग ने अब तक न तो निलंबन किया और न ही कोई ठोस कार्रवाई। जिला शिक्षाधिकारी ने बताया कि जांच दल का गठन किया है, जल्द ही जांच दल अपनी रिपोर्ट सौंपेगा, जिसके आधार पर विभाग कार्रवाई करेगा।

क्या है पूरा मामला
4 सितंबर 2024 को माया राठौर का तबादला मिडिल स्कूल शामगढ़ से ग्राम छायन रुंडी के लिए हुआ था। इसके बावजूद, शिक्षिका ने न तो छायन रुंडी में जॉइनिंग दी और न ही वहां पढ़ाया। इसके बजाय, बालक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के संकुल प्राचार्य बाबूलाल जांगड़े के मौखिक आदेश पर वह अपने मनपसंद गांव छायन में पढ़ाती रहीं। दूसरी ओर, उनका वेतन छायन रुंडी (कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल संकुल) से लगातार मिलता रहा।
कन्या हायर सेकेंडरी संकुल की भूमिका
कन्या हायर सेकेंडरी स्कूल के संकुल प्राचार्य बंशीलाल कारपेंटर ने स्पष्ट किया कि माया राठौर ने कभी उनके संकुल में जॉइनिंग नहीं दी और न ही उनका वेतन बिल बनाया गया। फिर भी, शिक्षिका के नाम पर 10 महीने तक करीब 80 हजार रुपये मासिक वेतन, यानी कुल 8 लाख रुपये का भुगतान हुआ।
सवालों के घेरे में दोनों संकुल प्राचार्य
– बाबूलाल जांगड़े (बालक हायर सेकेंडरी): शिक्षिका को छायन में पढ़ाने की अनुमति किसके आदेश पर दी? जब उनके संकुल के पोर्टल पर शिक्षिका दर्ज नहीं थी, तो 10 महीने तक वेतन बिल कैसे बनता रहा?
– बंशीलाल कारपेंटर (कन्या हायर सेकेंडरी): जब शिक्षिका उनके संकुल में एक दिन भी नहीं आई, तो उन्होंने इसकी जानकारी अधिकारियों को क्यों नहीं दी? 10 महीने तक स्कूलों का निरीक्षण क्यों नहीं किया?
शिक्षा विभाग पर सवाल
जून 2025 में मामले का खुलासा होने और कलेक्टर के निलंबन के निर्देशों के बावजूद, जिला शिक्षा विभाग ने कोई कार्रवाई नहीं की। जिला शिक्षा अधिकारी इस मामले पर स्पष्ट बयान देने से भी बच रही थी। जांच दल के गठन को कई लोग महज लीपापोती मान रहे हैं।
जांच दल की रिपोर्ट के बाद विभागीय कार्रवाई की उम्मीद है। यदि जांच निष्पक्ष हुई, तो दोनों संकुल प्राचार्यों पर भी गाज गिर सकती है। इस मामले ने शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और संकुल प्राचार्यों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
नियमों के विरूद्ध कर दिया संलग्नीकरण
31 जून को छायन में स्कूली बच्चों और ग्रामीणों में सड़क जाम कर धरना दिया था। इस मामले की जानकारी लगने के बाद कलेक्टर ने जिला शिक्षाधिकारी को निर्देशित किया था कि शिक्षिका के विरूद्ध कार्रवाई की जाए लेकिन जिला शिक्षाधिकारी टेरेसा मिंज ने कार्रवाई करने की बजाय शिक्षिका को प्रोत्साहित करने के लिए उसका प्राथमिक शाला छायन में ही संलग्नीकरण (अटैचमेंट) कर दिया।
मध्यप्रदेश शासन के सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा स्थानांतरण नीति 2025 में स्पष्ट उल्लेख है कि कोई संलग्नीकरण नहीं किया जा सकता है। प्रदेशभर में किसी भी विभाग में वर्तमान में सलंग्नीकरण नहीं हो रहे हैं लेकिन जिला शिक्षाधिकारी ने स्वास्थ्य कारण बताकर संलग्नीकरण कर दिया। इसकी शिकायत कलेक्टर को भी हुई है।
यह कहना है इनका –
हमने जांच दल का गठन कर दिया, जांच दल जो रिपोर्ट देगा उसके आधार पर आगे की कार्रवाई करेंगे। अटैचमेंट हटाने की कार्रवाई भी करेंगे – टेरेसा मिंज, जिला शिक्षाधिकारी मन्दसौर
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









