दमोह। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में शिक्षा विभाग में फर्जीवाड़े का सनसनीखेज मामला सामने आया है। फर्जी दस्तावेजों के सहारे सरकारी स्कूलों में नौकरी कर रहे 24 शिक्षकों को बर्खास्त कर दिया गया है। जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय की जांच में इनके शैक्षणिक प्रमाण-पत्र और अंकसूचियां जाली पाई गईं। कलेक्टर सुधीर कोचर के सख्त निर्देश पर यह कार्रवाई अमल में लाई गई।
जिला शिक्षा अधिकारी एसके नेमा ने बताया कि कुछ शिकायतों के बाद शिक्षकों के दस्तावेजों की बारीकी से जांच शुरू की गई। इस दौरान चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि 24 शिक्षकों ने फर्जी दस्तावेजों के दम पर नौकरी हासिल की थी। इनमें से कई शिक्षक वर्षों से स्कूलों में पढ़ा रहे थे। जांच पूरी होने के बाद सभी की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गईं। साथ ही, इनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई के लिए पुलिस अधीक्षक को एफआईआर दर्ज करने हेतु पत्र भेजा गया है।

कलेक्टर सुधीर कोचर ने दो टूक कहा, “बच्चों के भविष्य के साथ धोखा करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।” उन्होंने आगे बताया कि जिले में अन्य शिक्षकों के दस्तावेजों की भी जांच जारी है और अगर कोई और गड़बड़ी मिली तो उस पर भी कड़ा एक्शन लिया जाएगा।
बताया जाता है कि यह घोटाला तब उजागर हुआ, जब कुछ शिक्षकों ने तबादले के लिए आवेदन किया और उनके दस्तावेजों की पड़ताल में अनियमितताएं पकड़ में आईं। इस मामले ने शिक्षा विभाग में फर्जी दस्तावेजों के जरिए नौकरी पाने की गहरी जड़ें जमा चुकी समस्या को एक बार फिर उजागर कर दिया है। स्थानीय लोग इस कार्रवाई की सराहना कर रहे हैं, लेकिन साथ ही सवाल उठा रहे हैं कि इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा इतने समय तक कैसे छिपा रहा?
आगे की कार्रवाई पर नजर
जिला प्रशासन ने साफ कर दिया है कि इस तरह की गड़बड़ियों पर नकेल कसने के लिए जांच का दायरा और बढ़ाया जाएगा। यह कार्रवाई न केवल दोषियों को सजा दिलाने का काम करेगी, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वास को भी मजबूत करेगी।
Author: Dashpur Disha
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