अहंकार नहीं, आत्मस्वरूप की पहचान ही मनुष्य के जीवन का सच्चा धर्म : श्रीपाद सेवाप्रिय हरिदास प्रभुजी

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जन्माष्टमी का संदेश—भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रानी की भक्ति में ही जीवन की सार्थकता

गरोठ। श्री खाटू श्याम मंदिर परिसर गरोठ में आयोजित तीन दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस, गुरुवार 03 सितंबर को कथा व्यास श्रीपाद सेवाप्रिय हरिदास प्रभुजी ने भगवान श्रीकृष्ण की जन्म कथा एवं जन्माष्टमी पर्व के आध्यात्मिक महत्व का अत्यंत भावपूर्ण वर्णन किया। उन्होंने कहा कि मनुष्य का जीवन केवल शरीर तक सीमित नहीं है, बल्कि वह आत्मस्वरूप है। जब मनुष्य अपने वास्तविक स्वरूप को पहचान लेता है, तब उसके जीवन में धर्म, भक्ति और सदाचार का वास्तविक प्रवेश होता है।

कथा व्यास ने कहा कि अहंकार मनुष्य के पतन का कारण है। हमें पद, प्रतिष्ठा, धन, शरीर अथवा सांसारिक उपलब्धियों को अपना वास्तविक स्वरूप नहीं मानना चाहिए। मनुष्य को यह समझना होगा कि हम कोई शरीर नहीं, बल्कि परमात्मा के अंशरूप आत्मा हैं। अपने आत्मस्वरूप को समझकर धर्म के प्रति समर्पित होकर कार्य करना ही मानव जीवन की सार्थकता है।

उन्होंने युगों की चर्चा करते हुए बताया कि सनातन परंपरा में चार युग—सतयुग, त्रेतायुग, द्वापरयुग और कलियुग माने गए हैं। वर्तमान समय को कलियुग कहा गया है। भगवान श्रीकृष्ण का प्राकट्य द्वापर युग में हुआ, लेकिन उनके द्वारा दिया गया धर्म, कर्म और भक्ति का संदेश आज भी मानव जीवन के लिए उतना ही प्रासंगिक है।

कथा व्यास ने कहा कि मनुष्य के जीवन में ऐसे अनेक सद्गुण होने चाहिए, जो उसे धर्म और परमात्मा के निकट ले जाते हैं। सदाचार, सत्य, दया, करुणा, क्षमा, संयम, विनम्रता, श्रद्धा और सेवा भाव जैसे गुण मनुष्य के जीवन को श्रेष्ठ बनाते हैं। केवल धार्मिक उपाधियां धारण कर लेने से धर्म नहीं आता, बल्कि धर्म मनुष्य का स्वभाव और आचरण बनना चाहिए।

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी केवल उत्सव नहीं, आत्मजागरण का पर्व
जन्माष्टमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्रीपाद सेवाप्रिय हरिदास प्रभुजी ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मोत्सव केवल आनंद और उत्सव मनाने का अवसर नहीं है, बल्कि यह अपने भीतर भगवान के प्राकट्य का संदेश देता है। जब मनुष्य के भीतर प्रेम, सत्य, करुणा, समर्पण और भक्ति का जन्म होता है, तभी वास्तविक अर्थों में उसके जीवन में श्रीकृष्ण का प्राकट्य होता है।

उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा रानी की भक्ति ही प्रेम, समर्पण और आत्मिक आनंद का मार्ग है। संसार में भटकता हुआ मनुष्य जब अपने मन को भगवान की भक्ति से जोड़ता है, तब उसे जीवन का वास्तविक उद्देश्य समझ में आता है।

कथा के दौरान श्रीकृष्ण जन्म प्रसंग का वर्णन करते हुए वातावरण भक्तिमय हो गया। श्रद्धालुओं ने भगवान श्रीकृष्ण के जयकारों के साथ कथा का आनंद लिया। श्रीमद् भागवत कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को अपने जीवन में धर्म, भक्ति, सेवा, सदाचार और आत्मस्वरूप की पहचान को अपनाने का संदेश दिया गया।
श्री खाटु श्याम मंदिर सेवा समिति गरोठ के अध्यक्ष जगदीश अग्रवाल आज 04 सितंबर शुक्रवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर श्रीमद् भागवत कथा का भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव प्रसंग के साथ कथा का विश्राम होगा।सायंकाल 07 बजे श्रीमकृष्ण सजो प्रतियोगिता होकर 7.30 बजे महाआरती के साथ मावा मिश्री एवं शुद्ध देसी घी से निर्मित ड्रायफुट की धनिया पंचेरी की महाप्रसादी का वितरण होने के साथ रात्रि 08 बजे से पुरुष वर्ग एवं महिला वर्ग की मटकी फोड़ प्रतियोगिता होगी जिसमें मटकी फोड़ने वाले प्रतिभागियों को हजारों रुपयों की राशि का नगद पुरुस्कार दिये जायेगे।रात्रि 11 बजे महाअभिषेक होकर रात्रि 12 बजे भगवान की महाआरती की जाकर भक्तों में माक्खन मिश्री का प्रसाद का वितरण किया जायेगा।

Dashpur Disha
Author: Dashpur Disha

दशपुर दिशा समाचार पत्र भारत के प्रेस महापंजीयक कार्यालय नई दिल्ली से पंजीकृत है। दशपुर दिशा मालवांचल में खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित समाचार पत्र है। www. dashpurdisha.com हमारी अधिकृत वेबसाइट है।

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