सुप्रीम कोर्ट में केस इसलिए हाईकोर्ट ने पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता मामले में की सुनवाई स्थगित

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जबलपुर। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने पैरामेडिकल कॉलेजों को विश्वविद्यालय से संबद्धता और बिना मान्यता के छात्रों को दाखिला देने के मामले में सुनवाई अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी है। यह निर्णय सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के मद्देनजर लिया गया है। जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस प्रदीप मित्तल की खंडपीठ ने 12 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रखा था, जिसे बुधवार को जारी किया गया।

पैरामेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार पर झूठे शपथ पत्र का आरोप
लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विशाल बघेल ने पैरामेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार डॉ. शैलोज जोशी पर हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अलग-अलग शपथ पत्र दाखिल करने का आरोप लगाया। हाईकोर्ट में दावा किया गया कि बिना मान्यता या संबद्धता के किसी भी कॉलेज में छात्रों को दाखिला नहीं दिया गया, जबकि सुप्रीम कोर्ट में स्वीकार किया गया कि सत्र 2023-24 में 21,894 छात्रों को दाखिला दिया गया। याचिकाकर्ता ने बताया कि एक भी कॉलेज को मध्य प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय से संबद्धता प्राप्त नहीं है। इस झूठे शपथ पत्र के लिए रजिस्ट्रार के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई थी, लेकिन हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट में मामला लंबित होने के कारण कोई कार्रवाई करने से इनकार कर दिया।

नर्सिंग मामले से पृथक करने की मांग खारिज
पैरामेडिकल काउंसिल ने आग्रह किया था कि इस मामले को नर्सिंग मामले से अलग किया जाए, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने इस पर कार्रवाई स्थगित की है। याचिकाकर्ता ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट की रोक के कारण इस आवेदन पर विचार नहीं किया जा सकता। हाईकोर्ट ने इस पर कोई आदेश पारित करने से इनकार कर दिया।

आगे की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पैरामेडिकल काउंसिल के रजिस्ट्रार द्वारा दिए गए शपथ पत्र की जांच फिलहाल नहीं की जा सकती, क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। इस मामले में अगली सुनवाई और कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों पर निर्भर करेगी।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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