दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस (राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय, मंदसौर) के प्राचार्य डॉ. ज्योति स्वरूप दुबे पर राजनीति करने के आरोपों के बाद उच्च शिक्षा विभाग ने उन्हें शोकॉज नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई मंदसौर विधायक विपिन जैन की शिकायत के बाद की गई, जिसमें उन्होंने प्राचार्य पर प्रोटोकॉल उल्लंघन और पक्षपातपूर्ण रवैये का आरोप लगाया।
डॉ. दुबे पर यह आरोप तब से लग रहे हैं, जब से उन्होंने मंदसौर कॉलेज में प्राचार्य का पदभार ग्रहण किया। आते ही प्राचार्य ने एबीवीपी के पदाधिकारी के कार्यक्रम के लिए कॉलेज के स्टाफ को बैठक में आने के लिए सूचना पत्र जारी कर दिया था। इसके बाद कुशाभाऊ ठाकरे ऑडिटोरियम के उपयोग के लिए एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उनसे संपर्क किया था। तब डॉ.दुबे ने कथित तौर पर कहा था कि यह ऑडिटोरियम “भाजपा का ही है।”

हाल ही में, 5 जुलाई 2025 को कॉलेज में आयोजित दीक्षारंभ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाजपा जिलाध्यक्ष राजेश दीक्षित, अध्यक्षता में प्रदेश प्रवक्ता यशपाल सिंह सिसौदिया, और विशेष अतिथि के रूप में नगर पालिका अध्यक्ष रमादेवी गुर्जर व एबीवीपी के प्रकाश परमार को आमंत्रित किया गया। इस आयोजन में स्थानीय विधायक विपिन जैन को नजरअंदाज करने का आरोप है, जिसे प्रोटोकॉल का उल्लंघन माना गया।

उच्च शिक्षा विभाग का शोकॉज नोटिस
विधायक जैन की शिकायत पर उच्च शिक्षा विभाग के आयुक्त प्रबल सिपाहा ने डॉ. दुबे को कारण बताओ नोटिस जारी किया। नोटिस में कहा गया कि दीक्षारंभ समारोह में विधायक विपिन जैन को आमंत्रित न करना प्रोटोकॉल का उल्लंघन और शासकीय कर्तव्यों के प्रति लापरवाही है। यह कृत्य मध्य प्रदेश सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 और गंभीर कदाचार की श्रेणी में आता है। नोटिस में डॉ. दुबे से 15 दिनों के भीतर लिखित स्पष्टीकरण मांगा गया है, अन्यथा उनकी दो वार्षिक वेतन वृद्धियां रोकने और एकपक्षीय कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

विधायक विपिन जैन की प्रतिक्रिया
मंदसौर विधायक विपिन जैन ने कहा, “डॉ. दुबे ने प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर राजनीति से प्रेरित व्यवहार किया है। मुझे 18 महीने के कार्यकाल में एक भी बार कॉलेज के कार्यक्रमों में नहीं बुलाया। इसलिए ऐसे व्यक्ति को इस पद पर रहने का कोई अधिकार नहीं। मैं आयुक्त से उनके निलंबन की मांग करूंगा।”
आगे की कार्रवाई
डॉ. दुबे को 15 दिनों के भीतर आयुक्त के समक्ष अपना स्पष्टीकरण प्रस्तुत करना होगा। यदि समयसीमा में जवाब नहीं मिला, तो विभाग एकपक्षीय कार्रवाई कर सकता है। इस मामले में कॉलेज प्रशासन और स्थानीय राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









