शिक्षा विभाग ने निलंबन अवधि में किया स्थानांतरण शासन ने किया निरस्त, इसके बावजूद संकुल प्राचार्य ने शिक्षक को कर दिया स्थानांतरित शाला के लिए रिलीव! हाईकोर्ट ने कहा—आदेश अनावश्यक और अनुचित

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3 जून के आदेश के बाद बोरखेड़ी घाटा में ही पदस्थ माने जाएंगे भगतराम पितावजा, वेतन देने के भी निर्देश

दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने प्राथमिक शिक्षक भगतराम पितावजा को बड़ी राहत देते हुए उन्हें शासकीय प्राथमिक विद्यालय बोरखेड़ी घाटा से शासकीय प्राथमिक विद्यालय रलायता भेजने संबंधी आदेश को निरस्त कर दिया है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक द्वारा 3 जून 2026 को स्थानांतरण आदेश निरस्त किए जाने के बाद शिक्षक की पदस्थापना बोरखेड़ी घाटा में ही है।
मामला रिट याचिका क्रमांक 35883/2026 से संबंधित है। याचिका पर सुनवाई माननीय न्यायमूर्ति श्री पवन कुमार द्विवेदी ने 9 सितंबर 2026 को की।

स्थानांतरण के बाद निरस्त हुआ आदेश
प्रकरण के अनुसार भगतराम पितावजा प्राथमिक शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं। उन्हें उनके वर्तमान पदस्थापना स्थल प्राथमिक विद्यालय बोरखेड़ी घाटा से 16 जून 2025 के आदेश द्वारा शासकीय प्राथमिक विद्यालय रलायता स्थानांतरित किया गया था। बाद में लोक शिक्षण संचालनालय, भोपाल के संचालक ने 3 जून 2026 को उक्त स्थानांतरण आदेश निरस्त कर दिया और उनकी पदस्थापना बोरखेड़ी घाटा में ही बनाए रखी। आदेश निरस्त करने के पीछे का तर्क ये था कि शिक्षा विभाग मन्दसौर ने उन्हें निलंबन के दौरान ही स्थानांतरित कर दिया था।

इसके बावजूद विकासखंड शिक्षा अधिकारी, गरोठ द्वारा 9 जून 2026 को उन्हें रलायता में कार्यभार ग्रहण करने के लिए कार्यमुक्त किया गया था। स्थानांतरण निरस्त होने के बाद इस आदेश में संशोधन किया गया और शिक्षक ने 12 जून 2026 को बोरखेड़ी घाटा स्थित विद्यालय में अपनी ज्वाइनिंग प्रस्तुत की।

प्राचार्य के आदेश को दी थी हाईकोर्ट में चुनौती
इसके बाद विद्यालय के संकुल प्राचार्य द्वारा 18 अगस्त 2026 को आदेश जारी कर शिक्षक को तत्काल शासकीय प्राथमिक विद्यालय रलायता, भानपुरा में कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए। शिक्षक ने इसी आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता एल.सी. पाटने ने न्यायालय को बताया कि उच्च अधिकारी द्वारा स्थानांतरण आदेश निरस्त किए जाने के बाद शिक्षक की पदस्थापना बोरखेड़ी घाटा में ही है। ऐसे में प्राचार्य द्वारा उन्हें दोबारा स्थानांतरित स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश देना उच्च अधिकारियों के आदेश के विपरीत है।

शासन ने बताया भ्रम की स्थिति
मामले में शासन की ओर से अधिवक्ता राघव राज सिंह ने पक्ष रखते हुए कहा कि संबंधित प्राचार्य ने संभवतः मूल स्थानांतरण आदेश दिनांक 16 जून 2025 का पालन करने के उद्देश्य से आदेश जारी किया था और हो सकता है कि उन्हें बाद में स्थानांतरण निरस्त किए जाने के आदेश की जानकारी नहीं थी। शासन की ओर से इसे जानबूझकर की गई मनमानी के बजाय भ्रम की स्थिति में पारित आदेश बताया गया।

हाईकोर्ट ने कहा- आदेश अनावश्यक और अनुचित
दोनों पक्षों को सुनने तथा प्रकरण की फाइल का अवलोकन करने के बाद हाईकोर्ट ने कहा कि लोक शिक्षण संचालनालय के संचालक के 3 जून 2026 के स्पष्ट आदेश के अनुसार याचिकाकर्ता की वर्तमान पदस्थापना शासकीय प्राथमिक विद्यालय बोरखेड़ी घाटा में है।
न्यायालय ने कहा कि 18 अगस्त 2026 का कार्यमुक्त करने संबंधी आदेश उच्च अधिकारियों के निर्देशों के विपरीत होने के साथ-साथ पूरी तरह अनावश्यक और अनुचित है। हाईकोर्ट ने उक्त आदेश को निरस्त (Quashed) कर दिया।

बोरखेड़ी घाटा में ही कार्यरत मानने और वेतन देने के निर्देश
हाईकोर्ट ने शिक्षक भगतराम पितावजा को 3 जून 2026 के आदेश के अनुसार शासकीय प्राथमिक विद्यालय बोरखेड़ी घाटा में ही कार्य जारी रखने की अनुमति दी है। साथ ही न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उन्हें बोरखेड़ी घाटा में निरंतर सेवा में कार्यरत मानते हुए वहीं का वेतन प्राप्त करने का अधिकार होगा।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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