पांच साल पहले लोकायुक्त ने जावरा नगरपालिका की सीएमओ के लिए रिश्वत लेने वाले बाबू को रंगेहाथों पकड़ा था
दशपुर दिशा । दीपक सोनी

रतलाम। जावरा में बहुचर्चित नगर पालिका रिश्वतकांड में विशेष न्यायालय रतलाम ने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए जावरा नगर पालिका की तत्कालीन सीएमओ नीता जैन एवं लिपिक विजय सिंह शक्तावत को चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। यह निर्णय 19 फरवरी 2026 को विशेष न्यायाधीश द्वारा सुनाया गया। न्यायालय ने दोनों आरोपियों को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी करार दिया।
क्या था पूरा मामला
मामला मार्च 2021 का है। जावरा नगर पालिका में ठेकेदार के अंतिम भुगतान के बदले रिश्वत मांगने की शिकायत सामने आई थी। पेटी कांट्रेक्टर पवन भावसार ने लोकायुक्त संगठन से शिकायत की थी कि भुगतान जारी करने के एवज में रिश्वत की मांग की जा रही है। शिकायत के आधार पर लोकायुक्त संगठन उज्जैन ने ट्रैप कार्रवाई की योजना बनाई।
12 मार्च 2021 को हुई थी ट्रैप कार्रवाई
12 मार्च 2021 को लोकायुक्त टीम ने जावरा नगर पालिका कार्यालय में दबिश दी। कार्रवाई के दौरान लिपिक विजय सिंह शक्तावत की जेब से 18,500 रुपये की रिश्वत राशि से भरा लिफाफा बरामद किया गया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि उक्त राशि तत्कालीन सीएमओ नीता जैन तक पहुंचाई जानी थी।
कार्रवाई का नेतृत्व लोकायुक्त इंस्पेक्टर बसंत श्रीवास्तव ने किया था। जांच के दौरान रिश्वत मांगने से संबंधित बातचीत की रिकॉर्डिंग भी महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत की गई, जिसने मामले को मजबूत आधार दिया।
पांच साल बाद आया फैसला
करीब पांच वर्षों तक चले न्यायिक परीक्षण के बाद विशेष न्यायालय रतलाम ने दोनों आरोपियों को दोषी पाया। अदालत ने चार-चार वर्ष के सश्रम कारावास के साथ अर्थदंड भी लगाया।
अपने फैसले में न्यायालय ने स्पष्ट कहा कि लोकसेवकों द्वारा पद का दुरुपयोग कर अवैध रूप से धन की मांग करना गंभीर अपराध है और ऐसे मामलों में कठोर दंड आवश्यक है, ताकि प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
प्रशासनिक हलकों में हलचल
फैसले के बाद जावरा सहित पूरे रतलाम जिले के प्रशासनिक व राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई है। लंबे समय से लंबित इस मामले में आए निर्णय को भ्रष्टाचार के विरुद्ध कड़ा संदेश माना जा रहा है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस फैसले से शासन-प्रशासन में पारदर्शिता को बल मिलेगा और भविष्य में अधिकारी-कर्मचारी ऐसे कृत्यों से बचने के लिए सतर्क रहेंगे।
Author: Dashpur Disha
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