बिना पंजीयन चल रहे 174 अस्पतालों पर स्वास्थ्य विभाग की सख्ती, ग्वालियर में सबसे अधिक, इंदौर के 14 भी निशाने पर

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भोपाल। प्रदेश में स्वास्थ्य विभाग ने बिना पंजीयन के संचालित हो रहे 174 अस्पतालों को लेकर सख्त रुख अपनाया है। इनमें सबसे अधिक 59 अस्पताल ग्वालियर जिले में हैं, जबकि इंदौर में भी 14 ऐसे अस्पताल चिह्नित किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त ने सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएमएचओ) को चेतावनी पत्र जारी करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि यदि इन अस्पतालों का जल्द पंजीयन नहीं हुआ, तो संबंधित सीएमएचओ जिम्मेदार माने जाएंगे और उनके खिलाफ कार्रवाई होगी।

ग्वालियर सबसे आगे, इंदौर भी पीछे नहीं
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में 174 अस्पताल बिना वैध पंजीयन के चल रहे हैं। इनमें से ग्वालियर जिले में 59 अस्पतालों की संख्या सबसे अधिक है। इंदौर में 14 अस्पतालों का नाम सूची में शामिल है, जिनमें से कुछ के नाम संशोधन के कारण पुराने रजिस्ट्रेशन में बदलाव नहीं हुआ। वहीं, कुछ अस्पताल बंद हो चुके हैं, लेकिन विभाग के पास इसकी अद्यतन जानकारी नहीं होने से मामला और जटिल हो गया है।
इंदौर के 14 अस्पतालों की सूची
इंदौर में बिना पंजीयन संचालित हो रहे अस्पतालों में शामिल हैं:
1.जगतगुरु दत्तात्रेय हॉस्पिटल एंड रिसर्च सेंटर, सिंहासा
2.अमोल हॉस्पिटल, वायएन रोड
3.श्री हरी हॉस्पिटल, अंबिकापुरी कॉलोनी
4.दिव्यज्योति हेल्थ केयर सेंटर, कैलोद
5.सौरभ हॉस्पिटल, खजूरी बाजार
6.एलएनसीटी आयुर्वेद हॉस्पिटल, कनाड़िया
7.शेख हबीब हॉस्पिटल, कोहिनूर कॉलोनी
8.ममता हॉस्पिटल, राऊ
9.द्वारकाधीश हॉस्पिटल, कछालिया
10.श्री चौबीस अवतार हॉस्पिटल, बेटमा रोड़
11.श्री गुरुकृपा हॉस्पिटल, शिक्षक नगर
12.यशलोक हॉस्पिटल, सुदामा नगर

नर्सिंग होम एक्ट शाखा प्रभारी शिवेंद्र अवस्थी ने बताया कि इनमें से कई अस्पतालों ने नवीनीकरण के लिए आवेदन ही नहीं किया। कुछ अस्पताल बंद हो चुके हैं, जबकि दो अस्पतालों को नोटिस जारी कर दिया गया है।

400 रीन्युअल आवेदन लंबित, प्रक्रिया में देरी क्यों
स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक, इंदौर में ही करीब 400 अस्पतालों के रीन्युअल आवेदन लंबित हैं। पंजीयन प्रक्रिया में देरी का कारण दस्तावेजों की कमी बताया जा रहा है। आवेदन के बाद परीक्षण में विभिन्न विभागों की एनओसी, डॉक्टरों की डिग्री और अन्य जरूरी कागजात पूरे नहीं पाए जाते। अस्पतालों को दोबारा दस्तावेज जमा करने के लिए कहा जाता है, लेकिन इस प्रक्रिया में समय लग जाता है। हर साल 28 फरवरी तक पंजीयन के लिए आवेदन जमा करने की समय सीमा होती है। इस बार विभाग ने इसे बढ़ाकर 28 मार्च किया था, लेकिन इसके बावजूद 174 अस्पताल पंजीयन नहीं करवा सके। हाल ही में हुई संभागीय बैठक में यह मुद्दा जोर-शोर से उठा।
स्वास्थ्य विभाग की चेतावनी
स्वास्थ्य विभाग के आयुक्त ने सभी सीएमएचओ को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे अपने-अपने जिलों में बिना पंजीयन चल रहे अस्पतालों पर तत्काल कार्रवाई करें। आयुक्त ने कहा कि यह स्थिति मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता पर सवाल उठाती है। यदि समय रहते पंजीयन प्रक्रिया पूरी नहीं हुई, तो संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाएगा। क्या कहते हैं जिम्मेदार? इंदौर के स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कुछ अस्पतालों के नाम में संशोधन के कारण पुराने रजिस्ट्रेशन में बदलाव नहीं हो सका। वहीं, कई अस्पताल प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं ले रहे। शिवेंद्र अवस्थी ने बताया कि विभाग लगातार कार्रवाई कर रहा है और बंद हो चुके अस्पतालों की जानकारी अपडेट करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।
मरीजों की सुरक्षा पर सवाल
बिना पंजीयन के चल रहे अस्पतालों से मरीजों के लिए खतरा बढ़ गया है। ऐसे अस्पतालों में सुविधाओं, डॉक्टरों की योग्यता और आपात स्थिति में व्यवस्था की कोई गारंटी नहीं होती। स्वास्थ्य विभाग की इस पहल से उम्मीद है कि अनियमितताओं पर लगाम लगेगी और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी। प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए यह कदम कितना प्रभावी साबित होगा, यह आने वाले दिनों में देखने वाली बात होगी। फिलहाल, विभाग की नजर इन 174 अस्पतालों पर टिकी है।

Dashpur Disha
Author: Dashpur Disha

दशपुर दिशा समाचार पत्र भारत के प्रेस महापंजीयक कार्यालय नई दिल्ली से पंजीकृत है। दशपुर दिशा मालवांचल में खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित समाचार पत्र है। www. dashpurdisha.com हमारी अधिकृत वेबसाइट है।

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