उच्च न्यायालय के आदेश के बाद प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति पर निर्णय के लिए सहमति-असहमति प्रक्रिया शुरू
दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, जबलपुर ने प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस और उत्कृष्ट संस्थानों में प्रभारी प्राचार्य की नियुक्तियों को नियम-विरुद्ध और अवैध करार दिया है। न्यायमूर्ति विवेक जैन की एकल पीठ ने उच्च शिक्षा विभाग को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि विभाग ने इस प्रक्रिया का मजाक बना दिया है। WP35532/2024 डॉ. यशवंत कुमार मिश्रा बनाम मध्यप्रदेश शासन) में 4 सितंबर 2025 को पारित आदेश में विभाग को 30 दिनों के भीतर सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश दिए गए।
डॉ.यशवंत कुमार मिश्रा और डॉ.मंजू शर्मा जैसे वरिष्ठ प्राध्यापकों को नजरअंदाज कर उनके कनिष्ठ प्राध्यापकों को प्रभारी प्राचार्य नियुक्त किया गया था। इस पर उच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया और नियुक्ति प्रक्रिया को अवैध ठहराया।

सहमति-असहमति प्रक्रिया
उच्च न्यायालय के आदेश के पालन में उच्च शिक्षा विभाग ने 18 सितंबर 2025 को पत्र क्रमांक/12/निर्माण/83 जारी कर सभी अतिरिक्त संचालकों को 20 सितंबर तक प्राध्यापकों से सहमति/असहमति लेने के निर्देश दिए। इस प्रक्रिया में 55 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस और 12 स्वशासी महाविद्यालयों के प्राध्यापकों से प्रपत्र-01 के कॉलम 6 में चयनित प्राचार्य के अधीन कार्य करने की सहमति/असहमति दर्ज करने को कहा गया। प्राचार्यों को प्राध्यापकों से प्रपत्र-03 पर हस्ताक्षरित सहमति/असहमति लेने के लिए निर्देशित किया गया।
67 पदों में 145 नम्बर वाला प्राचार्य कैसे
मंदसौर के प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में वर्तमान प्रभारी प्राचार्य डॉ.ज्योतिस्वरूप दुबे की नियुक्ति भी सवालों के घेरे में है। पीएम एक्सीलेंस कॉलेज में प्राचार्यों के लिए आए आवेदन में उनकी मेरिट सूची में रैंक 145 है, जबकि केवल 67 कॉलेजों के लिए प्रभारी प्राचार्य की नियुक्ति होनी थी। ऐसे में मेरिट क्रमांक 1 से 67 तक के प्राध्यापकों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए थी। वरिष्ठ प्राध्यापकों की अनदेखी कर डॉ.दुबे की नियुक्ति पर सवाल उठ रहे हैं।
वरिष्ठ प्राध्यापक की शिकायत
कॉलेज में पदस्थ वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ.आर.के.वर्मा (वाणिज्य) ने आरोप लगाया कि उन्हें सहमति/असहमति प्रपत्र की जानकारी नहीं दी गई। 20 सितंबर 2025 को रात 9:45 बजे अन्य स्रोतों से जानकारी मिलने पर उन्होंने असहमति पत्र आयुक्त उच्च शिक्षा भोपाल, अतिरिक्त संचालक उज्जैन, और प्राचार्य मंदसौर को ईमेल किया। 21 सितंबर को निर्माण शाखा और राजपत्रित शिक्षा भोपाल को भी मेल भेजा।
डॉ.वर्मा ने आरोप लगाया कि प्रभारी प्राचार्य डॉ.डी.सी.गुप्ता (डॉ. दुबे के अवकाश पर होने के कारण) ने उनके मेल को आबद्ध करने और अतिरिक्त संचालक उज्जैन को भेजने से इनकार कर दिया। उन्होंने आयुक्त उच्च शिक्षा से इस मामले में कार्रवाई और सूचना छिपाने वालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।
विभाग पर दबाव के आरोप
प्रांतीय शासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ ने आरोप लगाया कि विभाग अप्रत्यक्ष रूप से शिक्षकों पर दबाव बना रहा है। इससे वरिष्ठ और कनिष्ठ प्राध्यापकों के बीच तनाव बढ़ सकता है। संघ ने सवाल उठाया कि जब विभाग के पास अंतिम वरिष्ठता सूची ही उपलब्ध नहीं है, तो पारस्परिक वरिष्ठता का निर्धारण कैसे होगा?
संघ की मांग – फैसला शासन स्तर से हो
संघ ने मांग की है कि प्रभारी प्राचार्य और क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालक के पदों पर केवल वरिष्ठतम प्राध्यापकों की नियुक्ति हो। साथ ही, चयनित प्राचार्य की वरिष्ठता और मेरिट का फैसला शासन स्तर पर हो, न कि क्षेत्रीय अतिरिक्त संचालकों को मनमानी का अधिकार दिया जाए।
वैमनस्यता बढ़ेगी
प्रांतीय शासकीय महाविद्यालय प्राध्यापक संघ के प्रांत अध्यक्ष डॉ. आनंद शर्माने कहा कि यह आदेश शिक्षकों के लिए अपमानजनक है और इससे प्राचार्य-शिक्षक संबंधों में वैमनस्यता बढ़ सकती है। विभाग न्यायालय में हार के डर से शिक्षकों को डराने का प्रयास कर रहा है, ताकि वे अपनी वरिष्ठता का दावा न करें और विभाग की गलतियों को स्वीकार कर लें।
जानकारी का परीक्षण कर आयुक्त कार्यालय को भेजेंगे
अतिरिक्त संचालक उच्च शिक्षा उज्जैन संभाग डॉ.एच.एल.अनिजवाल ने कहा कि प्राचार्यों से प्राप्त जानकारी का परीक्षण कर आयुक्त कार्यालय को प्रेषित किया जाएगा। डॉ. वर्मा के मेल की जांच भी करवाई जाएगी।
यह मामला उच्च शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और वरिष्ठता के सिद्धांतों पर सवाल उठा रहा है, जिसका समाधान शीघ्र होने की उम्मीद है।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









