दशपुर दिशा । दीपक सोनी
जावरा। रतलाम जिले के जावरा शहर में स्मार्ट मीटर की वजह से उपभोक्ताओं का गुस्सा भड़क रहा है। बिजली पीड़ित उपभोक्ता समिति के अनुसार, टेस्टिंग मीटर और मुख्य स्मार्ट मीटर के बीच रीडिंग में भारी अंतर पाया गया है, जो 700 यूनिट से अधिक है। इससे उपभोक्ताओं को अतिरिक्त बिलिंग का सामना करना पड़ रहा है। मध्य प्रदेश विद्युत वितरण कंपनी (मध्य क्षेत्र) के अधिकारी इस मुद्दे पर मौन साधे हुए हैं, जबकि राज्य स्तर पर स्मार्ट मीटर से जुड़ी शिकायतें बढ़ रही हैं।
समिति का आंदोलन और कंपनी की प्रतिक्रिया
बिजली पीड़ित उपभोक्ता समिति ने दो महीने से जावरा के करीब 27 हजार बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं को लेकर 6 अगस्त 2025 को कंपनी कार्यालय का घेराव किया था। मुख्य मांगें थीं- बिना सहमति के लगाए गए स्मार्ट मीटर हटाना और बढ़े हुए बिजली बिलों को कम कर समायोजित करना। इस दौरान हेल्पडेस्क पर लगभग 1,700 लिखित शिकायतें जमा की गईं।

हालांकि, आंदोलन के बाद कंपनी ने समिति सदस्यों के खिलाफ शहर थाने में शासकीय कार्य में बाधा का आरोप लगाते हुए एफआईआर की मांग की। इसकी जानकारी मिलते ही करणीसेना के जीवनसिंह शेरपुर ने मंडल के अधिकारियों को मौके पर फटकार लगाई। आंदोलन के बाद कंपनी ने निराकरण कैंप लगाने, विवादित कनेक्शन जोड़ने और मीटर हटाने पर ऊपरी मार्गदर्शन लेने का लिखित आश्वासन दिया था।
पहला मामला: 705 यूनिट का फर्क, स्मार्ट मीटर फेल
समिति सदस्य असलम मेव ने बताया कि निलेश मेहता के प्रतिष्ठान पर 1 अगस्त 2025 को बिजली विभाग के दो लाइनमैन ने सर्विस नंबर एन-2216 पर थ्री-फेज स्मार्ट मीटर के समांतर टेस्टिंग मीटर लगाया। शुरुआती रीडिंग- स्मार्ट मीटर: 5,047.4 यूनिट, टेस्टिंग मीटर: 11,137 यूनिट।
गुरुवार को टेस्टिंग मीटर हटाने और 1 माह 17 दिन की खपत की गणना के दौरान रीडिंग- स्मार्ट मीटर: 5,853.2 यूनिट, टेस्टिंग मीटर: 12,698.5 यूनिट। इस अवधि में स्मार्ट मीटर ने 805.8 यूनिट खपत दिखाई, जबकि टेस्टिंग मीटर ने 1,561.1 यूनिट। यानी टेस्टिंग मीटर ने स्मार्ट मीटर से 705 यूनिट अधिक रिकॉर्ड किया, जो समान आनी वाली थी। समिति के पास फोटो, वीडियो और सबूत मौजूद हैं, जो स्मार्ट मीटर की खराबी को उजागर करते हैं।
दूसरा मामला: 7 यूनिट प्रतिदिन का अतिरिक्त बोझ
दूसरा मामला बिजली उपभोक्ता अजीज नाथू खान का है। समिति सदस्य असलम मेव के अनुसार, मीटर सर्विस नंबर 13,850 पर 24 घंटे के लिए समांतर टेस्टिंग मीटर लगाया गया। टेस्टिंग मीटर की तुलना में स्मार्ट मीटर ने 7 यूनिट अधिक खपत दर्ज की। 30 दिनों की गणना में यह अंतर 21 यूनिट तक पहुंच जाता है, जिससे उपभोक्ताओं को अनावश्यक बोझ पड़ रहा है।
राज्य स्तर पर स्मार्ट मीटर विवाद
यह समस्या जावरा तक सीमित नहीं है। मध्य प्रदेश में स्मार्ट मीटर लगाने का लक्ष्य 2027 तक 50 लाख मीटर है, लेकिन भोपाल, सागर और अन्य शहरों से बढ़े बिलों की शिकायतें आ रही हैं। ऊर्जा मंत्री लक्ष्मण सिंह पटेल ने भी बिल बढ़ोतरी की शिकायतों को स्वीकार किया है और विभाग से जांच के आदेश दिए हैं। कांग्रेस नेता अजय सिंह ने स्मार्ट मीटर लगाने वाली सऊदी कंपनी अल्फानार इंडिया पर पाकिस्तानी मूल के कर्मचारियों के कारण डेटा लीक का आरोप लगाया है। रतलाम जिले में 6 अगस्त को हुए घेराव के बाद भी समस्याएं बरकरार हैं।
उपभोक्ताओं की मांग
समिति ने मांग की है कि स्मार्ट मीटरों की तत्काल जांच हो, दोषपूर्ण मीटर हटाए जाएं और अतिरिक्त बिलिंग का समायोजन किया जाए। यदि कार्रवाई न हुई तो बड़ा आंदोलन छेड़ने की चेतावनी दी गई है। कंपनी के हेल्पलाइन 1912 पर शिकायत दर्ज कराने की सलाह दी जा रही है, लेकिन उपभोक्ता पारदर्शिता की कमी से नाराज हैं। यह मामला मध्य प्रदेश में बिजली वितरण व्यवस्था की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहा है।
Author: Dashpur Disha
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