अंकुर अपार्टमेंट में अवैध निर्माण का ‘खेल’: सीएमओ सुधीर सिंह और इंजीनियरों ने अवैध निर्माणों को बना लिया धंधा !

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दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। मंदसौर नगरपालिका क्षेत्र में अवैध निर्माण की बाढ़ ने शहर के योजनाबद्ध विकास को खतरे में डाल दिया है। नगरपालिका के मुख्य नगरपालिका अधिकारी सुधीर सिंह और इंजीनियरों पर भ्रष्टाचार और अवैध निर्माणकर्ताओं के साथ सांठगांठ के गंभीर आरोप लग रहे हैं। स्थानीय लोग दावा करते हैं कि नगरपालिका छोटे-मोटे अतिक्रमण जैसे हाथ ठेले और गुमटियों पर तो कार्रवाई करती है, लेकिन बड़े अवैध निर्माणों पर जानबूझकर चुप्पी साध लेती है।

अंकुर अपार्टमेंट मामला: नाले पर कब्जा, नियमों की उड़ाई धज्जियां
रामटेकरी स्थित अंकुर अपार्टमेंट का मामला अवैध निर्माण का ज्वलंत उदाहरण है। नगरपालिका ने 15 जून 2022 को बेबीचन पिता अचकुंज और शिजा पति बेबीचन को सर्वे क्रमांक 398/1, 398/2, 398/3, 398/4 पर 983 वर्गफीट के आवासीय निर्माण की अनुमति दी थी। अनुमति के अनुसार, भवन के लिए 594 वर्गफीट (3.23 मीटर x 6.7 मीटर) के प्लॉट पर भूतल, प्रथम तल और द्वितीय तल पर कुल 983 वर्गफीट (प्रत्येक तल पर 327.77 वर्गफीट) निर्माण की अनुमति थी। शर्तों में भवन के आगे 2 मीटर (177 वर्गफीट) और पीछे 1 मीटर (88.5 वर्गफीट) मार्जिन ऑफ सेटबैक (एमओएस) खुला छोड़ना और नाले पर निर्माण न करना शामिल था।

हालांकि, निर्माणकर्ताओं ने स्वीकृत नक्शे और नगर तथा ग्राम निवेश, नीमच द्वारा 22 अगस्त 1992 को जारी पत्र क्रमांक 547 के अनुमोदित प्लान (जिसमें एबीसीडी ब्लॉक स्वीकृत था) का उल्लंघन करते हुए 736 वर्गफीट प्रति तल, यानी कुल 2205 वर्गफीट का अवैध निर्माण किया। यह अनुमति से 1222 वर्गफीट अधिक है। निर्माणकर्ताओं ने नाले पर कब्जा कर लिया और प्लॉट की सीमा से बाहर निर्माण किया। निर्माणकर्ता ने एक फिट ऊंचा उठाकर और नाले पर अतिक्रमण कर निर्माण कर लिया जिससे अंकुर अपार्टमेंट क्षेत्र में जलभराव की समस्या उत्पन्न हो रही है, जो बारिश के मौसम में और ज्यादा विकराल समस्या बन सकती है।

रामटेकरी निवासी सत्यनारायण मांदलिया ने इसकी शिकायत नगरपालिका को की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने संयुक्त संचालक, नगरीय प्रशासन, उज्जैन को शिकायत की। संयुक्त संचालक राजीव निगम ने सीएमओ सुधीर सिंह को तीन पत्र जारी किए, लेकिन नगरपालिका ने केवल नोटशीट पर लिखा कि नाले पर अवैध निर्माण हुआ है। कार्रवाई अब तक शून्य है।

ये है नपा इंजीनियरों की वो नोटशीट जिस पर लिखा है कि अवैध निर्माण हुआ है

शिकायतकर्ता सत्यनारायण मांदलिया ने कहा, “सीएमओ और इंजीनियर भ्रष्ट हैं। अवैध निर्माणकर्ताओं के साथ उनकी सांठगांठ है। तीन पत्रों के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। मैं जल्द न्यायालय की शरण लूंगा।”

अवैध निर्माण और फर्जी कंपाउंडिंग का चल रहा धंधा
शहर में दर्जनों निर्माणाधीन भवनों में मार्जिन ऑफ सेटबैक (एमओएस) नियमों का खुलेआम उल्लंघन हो रहा है। बिना अनुमति के बेसमेंट बनाए जा रहे हैं और स्वीकृत नक्शे से अधिक निर्माण किया जा रहा है। जागरूक नागरिकों की शिकायतों पर कार्रवाई के बजाय, निर्माणकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि निर्माण को कैसे नियमों में फिट किया जाए। निर्माण पूरा होने पर, अगर शिकायतें जारी रहती हैं, तो नगरपालिका कंपाउंडिंग की सलाह देती है, भले ही वह भवन कंपाउंडिंग नियमों के दायरे में न हो। शहर में सैकड़ों ऐसी बिल्डिंगें हैं, जिनके अवैध निर्माण को फर्जी कंपाउंडिंग के जरिए वैध कर दिया गया।

मंदसौर के बीपीएल चौराहे पर होटल फॉर्च्यून का अवैध निर्माण और उसकी कथित फर्जी कंपाउंडिंग में नगरपालिका अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध है। संजीत रोड पर मालवा हॉस्पिटल के पास अनुमति से अधिक निर्माण की शिकायतें भी सामने आई हैं, लेकिन नगरपालिका ने शिकायतकर्ताओं को गुमराह करने के अलावा कोई कार्रवाई नहीं की।

सीएमओ गलत जानकारियां देकर उच्च अधिकारियों को कर रहा गुमराह
सीएमओ सुधीर सिंह के मंदसौर नगरपालिका में पदस्थ होने के बाद से अवैध निर्माणों में कथित तौर पर तेजी आई है। उन पर निजी अस्पतालों को फर्जी तरीके से व्यावसायिक उपयोग प्रमाण पत्र जारी करने, लोकायुक्त में अवैध निर्माणों की शिकायतों में झूठे जवाब देने, और सीएम हेल्पलाइन व कलेक्टर को गलत जानकारी भेजकर शिकायतें बंद करने की साजिश रचने के आरोप हैं। निजी अस्पतालों को व्यावसायिक अनुमति देने का मामला लोकायुक्त में भी पहुंच चुका है।

अंकुर अपार्टमेंट मामले में संयुक्त संचालक द्वारा जारी पत्र, जो सीएमओ ने रद्दी की टोकरी में डाल रखा है

सीएमओ और इंजीनियरों को छोड़कर सभी को दिखता है अवैध निर्माण
स्थानीय लोगों का कहना है कि नगरपालिका के सीएमओ, इंजीनियर और पटवारी को छोड़कर सभी को अवैध निर्माण दिखाई देते हैं। शिकायतकर्ताओं को नजरअंदाज किया जाता है या निर्माणकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि अवैध निर्माण को ढंककर करें या कंपाउंडिंग करवा लें। नागरिकों का कहना है कि इस मिलीभगत के चलते मंदसौर का योजनाबद्ध विकास प्रभावित हो रहा है।

कुछ जागरूक नागरिकों और पत्रकारों ने आयुक्त, नगरीय प्रशासन एवं विकास, भोपाल से मांग की है कि अवैध निर्माणों और नगरपालिका अधिकारियों की कथित मिलीभगत की उच्चस्तरीय जांच हो। साथ ही, दोषी अधिकारियों और निर्माणकर्ताओं पर सख्त कार्रवाई की जाए ताकि मंदसौर में अवैध निर्माण पर लगाम लग सके।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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