इंदौर। मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (MPPSC) ने एक बार फिर अपनी कार्यशैली से अभ्यर्थियों को निराश किया है। आयोग ने सहायक प्राध्यापक (कंप्यूटर विज्ञान और कंप्यूटर एप्लीकेशन) 2024 के लिए जारी विज्ञापन (क्रमांक 30/2024 और 33/2024) को निरस्त कर दिया है। इसके साथ ही, आवेदकों को शुल्क वापसी का भरोसा दिया गया है। यह पहला मौका नहीं है जब MPPSC ने इस तरह का कदम उठाया हो; इससे पहले खाद्य सुरक्षा अधिकारी भर्ती परीक्षा को भी रद्द किया जा चुका है।
विज्ञापन निरस्त होने का कारण
MPPSC ने उच्च शिक्षा विभाग, मध्य प्रदेश शासन के आदेश (क्रमांक एफ 1/1/0115/2025-Sec-1-38, दिनांक 28.04.2025) का हवाला देते हुए बताया कि कंप्यूटर विज्ञान और कंप्यूटर एप्लीकेशन के लिए सह-विषयों का निर्धारण और शैक्षणिक अर्हता में संशोधन के कारण यह निर्णय लिया गया है। हालांकि, अभ्यर्थियों का कहना है कि यह बहाना पुराना है और आयोग की लापरवाही को छिपाने का एक तरीका मात्र है।
शुल्क वापसी की प्रक्रिया
आयोग ने विज्ञप्ति में कहा है कि जिन अभ्यर्थियों ने ऑनलाइन आवेदन किया था, वे 1 जून 2025 से 15 जून 2025 तक आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से शुल्क वापसी के लिए आवेदन कर सकेंगे। लेकिन सवाल यह है कि क्या शुल्क वापसी से अभ्यर्थियों के खोए समय और मेहनत की भरपाई हो पाएगी
अभ्यर्थियों का गुस्सा
MPPSC की इस हरकत से अभ्यर्थी आक्रोश में हैं। वर्षों से सहायक प्राध्यापक बनने की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों का कहना है कि आयोग की कार्यप्रणाली उनकी मेहनत और भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है। एक अभ्यर्थी, राहुल वर्मा (बदला हुआ नाम), ने कहा, “हमने दिन-रात मेहनत की, लेकिन एक विज्ञप्ति ने सब बर्बाद कर दिया। शुल्क वापसी से क्या होगा? हमारा समय और करियर कौन लौटाएगा?”
MPPSC की कार्यशैली पर सवाल
पिछले कुछ वर्षों में MPPSC की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। परीक्षाओं को टालना, प्रश्न पत्रों में गलतियां, और विज्ञापनों को निरस्त करना आयोग के लिए आम बात हो गई है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि MPPSC का मुख्य ध्यान अपनी छवि बचाने पर है, न कि निष्पक्ष और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने पर।क्या है आगे की राह?अभ्यर्थी अब मांग कर रहे हैं कि MPPSC पारदर्शी तरीके से भर्ती प्रक्रिया को पूरा करे और भविष्य में इस तरह की मनमानी न हो। कुछ अभ्यर्थी सामाजिक मीडिया पर एकजुट होकर आंदोलन की तैयारी कर रहे हैं। दूसरी ओर, MPPSC ने इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, सिवाय विज्ञप्ति के।
MPPSC की इस ताजा कार्रवाई ने एक बार फिर साबित कर दिया कि आयोग की प्राथमिकता अभ्यर्थियों का भविष्य नहीं, बल्कि औपचारिकताएं निभाना है। सवाल यह है कि आखिर कब तक मध्य प्रदेश के युवाओं का भविष्य इस तरह अनिश्चितता के भंवर में फंसा रहेगा?
Author: Dashpur Disha
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