✍️ दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
भोपाल। मध्यप्रदेश में नर्सिंग कॉलेज घोटाले ने एक बार फिर सुर्खियां बटोरी हैं। इस बार मामला नर्सिंग कॉलेजों की परीक्षाओं की कॉपियों की जांच से जुड़ा है, जहां बड़े पैमाने पर गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। जानकारी के अनुसार, चार साल बाद आयोजित की गई नर्सिंग परीक्षाओं की कॉपियों की जांच में शिक्षकों द्वारा लॉगिन और पासवर्ड को अनधिकृत व्यक्तियों के साथ साझा करने का मामला सामने आया है। इससे 70,000 से अधिक छात्रों की 2.23 लाख कॉपियों की जांच पर सवालिया निशान लग गया है।
क्या है पूरा मामला
मध्य प्रदेश में नर्सिंग कॉलेज घोटाला पहले से ही चर्चा में रहा है। 2020 से 1.25 लाख से अधिक नर्सिंग छात्रों की परीक्षाएं नहीं हो पाई थीं, जिसके कारण राज्य में नए नर्सिंग स्टाफ की भारी कमी देखी गई। इस घोटाले में कई कॉलेजों को फर्जी पाया गया था, जो केवल कागजों पर चल रहे थे या किराए के एक कमरे में संचालित हो रहे थे। इन कॉलेजों को मान्यता देने में इंडियन नर्सिंग काउंसिल (INC), मध्य प्रदेश नर्सिंग काउंसिल (MPNRC) और मध्य प्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी (MPMSU) की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं।
अब ताजा खुलासे में पता चला है कि चार साल बाद जब परीक्षाएं आयोजित की गईं, तो कॉपियों की जांच में बड़े पैमाने पर धांधली हुई। कुछ शिक्षकों ने अपने लॉगिन और पासवर्ड को अन्य लोगों के साथ साझा किया, जिससे जांच प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठे हैं। इस गड़बड़ी ने न केवल शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित किया है, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य को भी खतरे में डाल दिया है।
हाईकोर्ट ने दिए सख्त निर्देश
जबलपुर हाईकोर्ट ने इस मामले में सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने उन अधिकारियों की सूची पेश करने का आदेश दिया है, जो अपात्र संस्थाओं को मान्यता देने के लिए जिम्मेदार हैं। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सभी 375 नर्सिंग कॉलेजों की जांच करने और 26 जुलाई तक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया था। हालांकि, इस जांच में CBI के कुछ इंस्पेक्टरों के भी घोटाले में शामिल होने की बात सामने आई, जिसके बाद 13 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिसमें दो CBI इंस्पेक्टर भी शामिल हैं।
छात्रों में आक्रोश, भविष्य पर संकट
नर्सिंग छात्रों में इस घोटाले को लेकर भारी आक्रोश है। 2021-22 बैच की एक छात्रा पूजा भालसे ने बताया कि दाखिले के समय उन्हें बताया गया था कि मेडिकल यूनिवर्सिटी के साथ संबद्धता में देरी के कारण परीक्षाएं रुकी हैं, लेकिन अब सच्चाई सामने आने पर उन्हें धोखा महसूस हो रहा है। छात्रों का कहना है कि इस घोटाले का खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है, जबकि असली दोषी भोपाल और जबलपुर में बैठे लोग हैं।
CBI की जांच और आगे की कार्रवाई
CBI ने इस मामले में अपनी जांच तेज कर दी है। 21 डिफिशिएंट नर्सिंग कॉलेजों के संचालकों को भोपाल बुलाया गया है, जहां उनके भविष्य पर फैसला लिया जाएगा। इसके अलावा, हाईकोर्ट ने साफ किया है कि जब तक घोटाले की पूरी सच्चाई सामने नहीं आती, तब तक परीक्षाओं को आयोजित करने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
मध्य प्रदेश का नर्सिंग घोटाला न केवल शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार को उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे लापरवाही और धांधली से लाखों छात्रों का भविष्य दांव पर लग जाता है। इस मामले में हाईकोर्ट और CBI की सख्ती से उम्मीद है कि दोषियों को सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सकेगा। फिलहाल, छात्रों और उनके अभिभावकों को इंसाफ का इंतजार है।
Author: Dashpur Disha
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