दशपुर दिशा । दीपक सोनी
जावरा। रतलाम जिले की जावरा तहसील में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने किसानों के हित में एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में अतिवृष्टि, पीला मोजेक वायरस और अन्य बीमारियों से प्रभावित खरीफ फसलों के नुकसान का जिक्र करते हुए तत्काल आकलन, मुआवजा वितरण, फसल बीमा क्लेम की प्रक्रिया और अन्य राहत उपायों की मांग की गई है। कमेटी ने उम्मीद जताई है कि प्रशासन राजनीति से ऊपर उठकर किसानों की समस्याओं का समाधान करेगा।
यह ज्ञापन हाल की भारी बारिश और वायरस प्रकोप से प्रभावित किसानों की पीड़ा को उजागर करता है। रतलाम जिले में इस वर्ष जून से अब तक 46 इंच से अधिक बारिश दर्ज की गई है, जिससे निचले खेतों में जलभराव हो गया है। विशेष रूप से सोयाबीन की फसल पूरी तरह नष्ट हो चुकी है, लेकिन कृषि विभाग और प्रशासन की ओर से अभी तक नुकसान का कोई आकलन नहीं किया गया। इससे किसान एग्रीकल्चर इंश्योरेंस बीमा क्लेम और मुआवजा प्राप्त करने से वंचित हैं।

ज्ञापन में उठाए गए प्रमुख मुद्दे निम्नलिखित हैं:
1.सोयाबीन फसल का पूर्ण नुकसान: जावरा तहसील में अतिवृष्टि और पीला मोजेक वायरस से सोयाबीन की फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई है। प्रशासन और कृषि विभाग ने अभी तक नुकसान का आकलन नहीं किया, जिससे बीमा क्लेम और मुआवजा प्रक्रिया रुकी हुई है। पीला मोजेक वायरस सोयाबीन के पत्तों को पीला कर देता है, पौधों की वृद्धि रोकता है और फलियां सड़ जाती हैं। मध्य प्रदेश के अन्य जिलों जैसे मंदसौर, नीमच और रतलाम में भी इसी तरह का प्रकोप देखा गया है, जहां किसानों ने फसल को श्रद्धांजलि देकर विरोध प्रदर्शन किए।
2.तत्काल आकलन और मुआवजा घोषणा: सोयाबीन फसल के नुकसान का फौरन आकलन करवाकर मुआवजा राहत राशि की घोषणा की जाए। किसान आर्थिक संकट से जूझ रहे हैं।
3.अन्य खरीफ फसलों का बीमा क्लेम: सोयाबीन के अलावा उड़द, मक्का, मूंगफली जैसी फसलें भी अतिवृष्टि और बीमारी से प्रभावित हुई हैं। इनका बीमा बैंकों और सहकारी समितियों के किसान क्रेडिट कार्ड लोन के साथ जुड़ा है। नुकसान आकलन कर बीमा राशि तत्काल प्रदान की जाए।
4.ऋण खाते में बीमा राशि जमा: किसानों ने किसान क्रेडिट कार्ड से कृषि ऋण लिया था, लेकिन फसल खराब होने से वे किस्त चुकाने में असमर्थ हैं। बीमा क्लेम राशि सीधे ऋण खाते में जमा कराई जाए।
5.टोल फ्री नंबर की समस्या: फसल नुकसान पर बीमा शिकायत के लिए 72 घंटे के अंदर टोल फ्री नंबर पर कॉल करने की शर्त है, लेकिन नंबर बंद आते हैं। बीमा कंपनियां जानबूझकर शिकायतें टाल रही हैं। प्रदेश-व्यापी एक ही नंबर की व्यवस्था भी अव्यवहारिक है, इसे हटाया जाए।
6.बीमा पॉलिसी दस्तावेज की कमी: एग्रीकल्चर इंश्योरेंस पॉलिसी किसानों को उपलब्ध नहीं कराई जाती, जिससे क्लेम से वंचित रह जाते हैं। किसान शर्तों से अनभिज्ञ हैं। बीमा कंपनी को आदेश दिए जाएं कि पॉलिसी नंबर सहित दस्तावेज तत्काल प्रदान करें।
7.सैटेलाइट सर्वे की कमियां: सैटेलाइट से नुकसान आकलन संभव नहीं, क्योंकि फलियां दिख सकती हैं लेकिन पानी से सड़ जाती हैं या वायरस से दाने नहीं बनते। इस व्यवस्था को समाप्त कर कृषि विभाग की टीम से भौतिक आकलन कराया जाए।
8.एक्सप्रेसवे से जल निकासी समस्या: दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (8 लाइन) के किनारे खेतों से पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है, जिससे जलभराव से फसल नष्ट हो गई। तत्काल पानी निकासी की कार्रवाई हो।
9.पिछले वर्षों की लापरवाही: कई वर्षों से प्रशासन और बीमा कंपनियों की लापरवाही से किसान बीमा से वंचित रहे। इसका निष्पक्ष निरीक्षण कर दोषियों पर कार्रवाई हो और हुए नुकसान पर बीमा क्लेम प्रदान किया जाए।
10.सीमांकन व्यवस्था में सुधार: सैटेलाइट सर्वे के दुरुपयोग से सीमांकन प्रभावित हो रहा है। इसे समाप्त कर पटवारी के माध्यम से विधिवत सीमांकन कराया जाए।
ब्लॉक कांग्रेस कमेटी ने कहा कि रतलाम जिले में सोयाबीन मुख्य फसल है, जो 2.10 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोई जाती है। इस वर्ष अतिवृष्टि से जड़ सड़न, फली झुलसा और सफेद मक्खी प्रकोप बढ़ गया है। पड़ोसी जिलों नीमच और मंदसौर में भी किसानों ने कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन कर मुआवजे की मांग की है, जहां कलेक्टरों ने दो दिनों में रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं। कमेटी ने प्रशासन से अपील की है कि किसानों को तत्काल राहत प्रदान कर आर्थिक संकट से बचाया जाए, वरना व्यापक आंदोलन की चेतावनी दी है।
Author: Dashpur Disha
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