जिला पंचायत में साधारण सभा की बैठक में जिपं सदस्य रिंकेश डपकरा ने लगाए थे आरोप, जांच में पुष्टि हुई लेकिन कार्रवाई नहीं
दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। जिला चिकित्सालय मंदसौर के ब्लड बैंक में रक्तदाताओं से ली जाने वाली राशि में भ्रष्टाचार और अनियमितता का मामला सामने आया है। जिला पंचायत सदस्य रिंकेश डपकरा ने 12 मार्च 2025 को जिला पंचायत की बैठक में इस मुद्दे को उठाते हुए गंभीर आरोप लगाए थे। डपकरा ने दावा किया था कि ब्लड बैंक प्रभारी और टेक्नीशियन, जो शासकीय कर्मचारी हैं, अवैध तरीके से प्रति माह 70-80 हजार रुपये बोनस के नाम पर वसूल रहे हैं। उन्होंने इस राशि की रिकवरी और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।

जांच दल का गठन और निष्कर्ष
मामले की गंभीरता को देखते हुए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी गोविंद सिंह चौहान ने 20 मार्च 2025 को एक जांच दल का गठन किया, जिसमें डॉ. एसजी सूर्यवंशी, डॉ. बीएल रावत और डॉ. हर्षल पाटीदार शामिल थे। इसके बाद 21 मार्च 2025 को स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारी प्रकाश बनौधा और हेमंत व्यास को भी जांच दल में शामिल किया गया।
जांच में पाया गया कि राज्य सरकार के परिपत्र क्रमांक/1274/एसबीटीसी/2015, भोपाल, दिनांक 09/11/2015 के अनुसार निजी चिकित्सालयों को जारी रक्त के लिए प्रति यूनिट 1050 रुपये मरीज के परिजनों से लिए जा रहे हैं। यह राशि रोगी कल्याण समिति, जिला चिकित्सालय मंदसौर में जमा की जाती है। जांच दल ने यह भी पाया कि 9 फरवरी 2016 की नस्ती के आधार पर ब्लड बैंक के चिकित्सा अधिकारी को 150 रुपये, लैब टेक्नीशियन को 100 रुपये और लैब असिस्टेंट को 50 रुपये प्रति रक्ताधान के हिसाब से मानदेय देने की स्वीकृति स्थानीय स्तर पर ली गई थी।
हालांकि, जांच दल ने निष्कर्ष निकाला कि शासन के निर्देशानुसार अतिरिक्त मानव संसाधन के लिए 300 रुपये प्रति रक्ताधान का भुगतान होना था, लेकिन तत्कालीन रक्तकोष अधिकारी ने कलेक्टर/अध्यक्ष (कार्यकारी समिति) रोगी कल्याण समिति से अनुमति लेकर यह राशि पहले से कार्यरत कर्मचारियों को ही दी जा रही थी। यह भुगतान रोगी कल्याण समिति के माध्यम से उनके खातों में किया जा रहा था।
ढाई महीने बाद भी कार्रवाई शून्य
जांच रिपोर्ट को जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी अनुकूल जैन को 14 मई 2025 को कार्रवाई के लिए भेजा गया, लेकिन अब तक इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। सूत्रों के अनुसार, ब्लड बैंक में संविदा मेडिकल ऑफिसर के रूप में कार्यरत डॉ.सौरभ शर्मा, जो पूर्व सिविल सर्जन डॉ. डीके शर्मा के बेटे हैं, बताया जा रहा है कि वे पैथोलॉजिस्ट भी नहीं है उसके बावजूद उन्हें ब्लड बैंक में मेडिकल ऑफिसर बना रखा है। खैर ये प्रशासन के लिए जांच का विषय है।
विधानसभा में विधायक विपिन जैन ने पूछा कब होगी भ्रष्टचारियों पर कार्रवाई
मंदसौर के विधायक विपिन जैन ने इस मामले को विधानसभा में उठाया और उपमुख्यमंत्री, लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री राजेंद्र शुक्ल से निम्नलिखित सवाल पूछे:
1. ब्लड बैंक में 300 रुपये शुल्क वसूली के मामले में अब तक क्या कार्रवाई की गई?
2. क्या इस संबंध में कोई शासनादेश या जिला चिकित्सालय स्तर पर निर्णय लिया गया है?
3. यदि कार्रवाई नहीं हुई, तो इसके कारण और सरकार द्वारा कार्रवाई के लिए समयसीमा क्या है?
उपमुख्यमंत्री का जवाब
उपमुख्यमंत्री ने विधानसभा प्रश्न के जवाब में बताया कि मामले की जांच के लिए 20 मार्च 2025 और 21 मार्च 2025 को आदेश जारी कर जांच दल गठित किया गया था। जांच रिपोर्ट 14 मई 2025 को जिला पंचायत सीईओ को भेजी गई। उन्होंने कहा कि कोई शासनादेश जारी नहीं हुआ है और कार्रवाई प्रक्रिया में है। गुण-दोष के आधार पर कार्रवाई की जाएगी, लेकिन समयसीमा बताना संभव नहीं है।
मंदसौर जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक में भ्रष्टाचार का मामला जांच के बाद भी अनसुलझा बना हुआ है। जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों में इस मामले को लेकर नाराजगी बनी हुई है, और वे दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस मामले में आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, यह देखना बाकी है।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









