मंदसौर। भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष न्यायालय मंदसौर ने गुरुवार 27 नवंबर 2025 को तत्कालीन ग्रामोद्योग विस्तार अधिकारी जगदीश शर्मा को रिश्वत लेते हुए रंगे हाथों पकड़े जाने के मामले में दोषी करार देते हुए 4 वर्ष के सश्रम कारावास और 10,000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
मामला मार्च 2019 का है। ग्राम सेमली थाना नई आबादी निवासी आसिफ पुत्र वली मोहम्मद ने 19 मार्च 2019 को लोकायुक्त पुलिस उज्जैन में शिकायत की थी कि उसके बड़े भाई आरिफ ने तरापा (सेंटिंग) के लिए 5.33 लाख रुपये का लोन लिया था, जिसमें से 1.59 लाख रुपये की सब्सिडी जारी करने के लिए जिला हथकरघा कार्यालय मंदसौर के कार्यालय प्रभारी/सहायक संचालक द्वारा 20,000 रुपये रिश्वत की मांग की जा रही है।

शिकायत की प्रारंभिक तस्दीक के बाद लोकायुक्त टीम ने ट्रैप प्लान किया। 26 मार्च 2019 को आरोपी जगदीश शर्मा को मंदसौर के लक्ष्मीबाई चौराहे स्थित मेघा स्वीट्स चाय की दुकान पर शिकायतकर्ता आसिफ से 12,000 रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया।
लोकायुक्त पुलिस ने अपराध क्रमांक 49/2019 के तहत भ्रष्टाचार निवारण संशोधन अधिनियम 2018 की धारा 7, 13(1)(b) एवं 13(2) के अंतर्गत मुकदमा दर्ज किया। विवेचना पूरी होने के बाद 18 जुलाई 2022 को विशेष न्यायालय मंदसौर में चार्जशीट दाखिल की गई।
लगभग साढ़े छह वर्ष चले विचारण के बाद विशेष न्यायाधीश भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम मंदसौर ने 27 नवंबर 2025 को अपना फैसला सुनाते हुए आरोपी जगदीश शर्मा को दोषी ठहराया और 4 साल की कैद के साथ 10 हजार रुपये का अर्थदंड लगाया। अर्थदंड नहीं भरने पर अतिरिक्त कारावास की सजा का भी प्रावधान है।
Author: Dashpur Disha
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