भोपाल। मध्यप्रदेश के प्रतिष्ठित एलएनसीटी समूह पर 200 करोड़ रुपये के वित्तीय घोटाले का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध शाखा ने समूह के शीर्ष संचालकों पर धोखाधड़ी और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में एफआईआर दर्ज की है। इस मामले ने भोपाल और इंदौर के शैक्षणिक और सामाजिक जगत में हड़कंप मचा दिया है।
आरोपों का विवरण
एलएनसीटी समूह के चेयरमैन नील संघवी (63) ने आरोप लगाया कि समूह ने एसबीआई, आईसीआईसीआई, एचडीएफसी और अन्य बैंकों से 21 दिनों में 21.90 करोड़ रुपये से अधिक के लोन लिए। ये राशि शैक्षणिक गतिविधियों और सामाजिक सेवाओं के लिए ली गई थी, लेकिन इसका उपयोग निजी कंपनियों और चौकसे परिवार के कर्ज चुकाने में किया गया।

– 32 करोड़ का बैंक लोन: आकाशा फाउंडेशन के नाम पर लिया गया, लेकिन चौकसे परिवार के निजी कर्ज चुकाने में उपयोग हुआ।
– 15 करोड़ का टर्म लोन: LNCT मेडिकल कॉलेज के नाम पर लिया गया, लेकिन निजी ट्रस्ट के कर्ज उतारने में खर्च किया गया।
– 8.22 करोड़ की फीस: छात्रों से वसूली गई राशि निजी कंपनियों और परिवार के खातों में डायवर्ट की गई।
– 49.74 लाख की छात्रवृत्ति: छात्रों के लिए आई राशि चौकसे परिवार की कंपनी के खाते में भेजी गई।
– 50.67 करोड़ का सिद्धांत लेन-देन: केवल कागजी वापसी दिखाई गई।
– 33.46 करोड़ और 8.75 करोड़: निर्माण कार्य के नाम पर ठेकेदार कंपनियों को दिए गए, लेकिन वास्तविक काम नहीं हुआ।
– 1.68 करोड़ की दवाइयाँ और 38 लाख की किताबें: चौकसे परिवार की कंपनियों से खरीदी गईं।
– 20.17 करोड़ का अनिश्चित लोन: LNCT यूनिवर्सिटी के नाम पर लिया गया, लेकिन केवल 2.50 करोड़ का हिसाब दिया गया।
– 35 करोड़ की निकासी: मई 2025 में कोटक महिंद्रा बैंक से एक महीने में उठाए गए।
प्रकरण दर्ज जांच शुरू
ईओडब्ल्यू ने जयनारायण चौकसे, अनुपम चौकसे, धर्मेंद्र चौकसे, रेखा चौकसे, पूनम चौकसे, पूर्णिमा चौकसे (सभी भोपाल) और आकाश जायसवाल (बिलासपुर, छत्तीसगढ़) के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। नील संघवी की शिकायत के आधार पर जांच शुरू हुई, जिसमें 2021 से 2025 तक की अवधि में कई वित्तीय अनियमितताएँ और धोखाधड़ी के सबूत मिले। सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित एडहॉक कमेटी ने भी इन अनियमितताओं की पुष्टि की थी।
600 कर्मचारियों का फर्जीवाड़ा
जांच में सामने आया कि एलएनसिटी ने 600 कर्मचारियों का रिकॉर्ड दिखाया, लेकिन पीएफ पोर्टल पर केवल 4 कर्मचारियों के नाम दर्ज हैं। यह भी आरोप है कि संस्था का उद्देश्य शिक्षा और सामाजिक सेवाओं के बजाय निजी कंपनियों और परिवार को लाभ पहुँचाना था।
शैक्षणिक जगत में हड़कंप
एलएनसिटी समूह मध्यप्रदेश के सबसे बड़े शैक्षणिक और स्वास्थ्य संस्थानों में शुमार रहा है। इस घोटाले ने छात्रों, अभिभावकों और शिक्षाविदों में आक्रोश पैदा किया है। सवाल उठ रहा है कि जो संस्था भविष्य गढ़ने का दावा करती थी, उसने छात्रों की फीस और सरकारी मदद को निजी लाभ का जरिया क्यों बनाया?
EOW की जांच जारी है और इस मामले में और खुलासे होने की संभावना है। यह घोटाला मध्यप्रदेश के शैक्षणिक और वित्तीय क्षेत्र में सुधारों की जरूरत को रेखांकित करता है।
Author: Dashpur Disha
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