कल्पना कीजिए, उन मासूम आंखों की, जो स्कूल जाते हुए सपनों और उत्साह से भरी होती हैं, लेकिन एक पल में वे धूप में पसीना बहाकर भारी वाहन धकेलने को मजबूर कर दी जाती हैं। शिक्षा के नाम पर बच्चों की जान जोखिम में डालने की यह देने वाली घटना लॉरेल इंटरनेशनल स्कूल शामगढ़ में हुई, जहां वाहन खराब होने पर स्टाफ ने वैकल्पिक व्यवस्था की बजाय बच्चों से ही व्यस्त सड़क पर धक्का लगवाया। यह न सिर्फ लापरवाही का चरम है, बल्कि अभिभावकों के विश्वास को ठेस पहुंचाने वाली घटना, जो पूछती है – क्या हमारे बच्चों की सुरक्षा इतनी सस्ती है?
मंदसौर। शिक्षा के मंदिर में बच्चों की सुरक्षा को ताक पर रखकर लापरवाही की हद पार करने वाला मामला सामने आया है। लॉरेल इंटरनेशनल स्कूल शामगढ़ के स्कूल वाहन के अचानक खराब हो जाने पर, जिम्मेदारों ने कोई वैकल्पिक व्यवस्था करने की बजाय मासूम स्कूली बच्चों से ही भारी बस को व्यस्त बाजार में धक्का लगवाने का अमानवीय काम करवाया। यह घटना न केवल बच्चों की जान जोखिम में डालने वाली है, बल्कि अभिभावकों के विश्वास को भी गहरा आघात पहुंचाती है, जो अपने बच्चों को स्कूल भेजते हुए उनके सुरक्षित लौटने की उम्मीद में जीते हैं।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, यह शर्मनाक वाकया मेलखेड़ा रोड स्थित सिविल हॉस्पिटल के सामने हुआ। स्कूल वाहन अचानक बंद हो गया, जिसके बाद ड्राइवर और स्कूल स्टाफ ने बच्चों को नीचे उतारकर उनसे बस धक्का लगवाया। मासूम बच्चे लगभग 500 फीट तक चिलचिलाती धूप में सड़क पर खड़े होकर भारी वाहन को धकेलते रहे, और अंत में उसे सिविल हॉस्पिटल परिसर तक ले जाकर स्टार्ट किया गया। व्यस्त मार्ग पर यह दृश्य देखकर राहगीरों और स्थानीय नागरिकों में भारी आक्रोश फैल गया। लोगों ने सवाल उठाया कि क्या स्कूल प्रशासन के लिए बच्चों की सुरक्षा से ज्यादा महत्वपूर्ण उनका समय और सुविधा है?
मामले पर स्कूल संचालक रवि काला ने सफाई देते हुए कहा कि आज स्कूल वाहन का ड्राइवर बदला गया था, जिस कारण यह स्थिति उत्पन्न हुई। उन्होंने इसे चालक की गलती बताते हुए स्वीकार किया कि बच्चों से धक्का नहीं लगवाया जाना चाहिए था। हालांकि, यह सफाई अभिभावकों की चिंताओं को शांत करने में नाकाफी साबित हो रही है।
ब्लॉक शिक्षा अधिकारी देवेंद्र सिसोदिया ने कहा कि उन्हें इस घटना की जानकारी नहीं है, क्योंकि वे उज्जैन में मीटिंग में व्यस्त थे। उन्होंने आश्वासन दिया कि वापस लौटकर पूरे मामले की जांच की जाएगी। लेकिन सवाल यह है कि जांच के नाम पर क्या यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा, या वाकई में सख्त कार्रवाई होगी?
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









