जमीन को कब्जे से मुक्त करवाने का क्रेडिट लेने वाले जनभागीदारी समिति अध्यक्ष नरेश चंदवानी और पीजी कॉलेज प्राचार्य डॉ.जेएस दुबे की चुप्पी दे रही सवालों को जन्म!
दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय की छात्रावास भूमि सर्वे नंबर 623 को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद फिर से सुर्खियों में है। यह भूमि पोस्ट ऑफिस के पास नई आबादी अफीम गोदाम रोड पर स्थित है, जहां एक व्यक्ति ने कोर्ट के आदेश के आधार पर भूस्वामी बनकर निर्माण कार्य शुरू कर दिया। हालांकि, एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं के हंगामे और विरोध के बाद तहसीलदार ने सीमांकन होने तक निर्माण कार्य रोक दिया है। महाविद्यालय प्रशासन और जनभागीदारी समिति की चुप्पी ने सवाल खड़े कर दिए हैं, जबकि पहले इसी भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने के लिए आंदोलन हुए थे।

वर्षों पुराना विवाद और एबीवीपी के पिछले प्रयास
यह विवाद नया नहीं है। कई वर्षों से जब भी कोई व्यक्ति इस भूमि पर कब्जा करने का प्रयास करता, महाविद्यालय प्रशासन और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद उसे हटा देते थे। पिछले साल सूरखेड़ा का एक व्यक्ति खुद को मालिक बताकर कब्जा करने पहुंचा था, लेकिन एबीवीपी के आंदोलन से उसे रोका गया। उस समय जनभागीदारी समिति के अध्यक्ष नरेश चंदवानी ने नवम्बर 2024 में इसकी अगुवाई की और प्रेस नोट जारी कर क्रेडिट लिया।
चंदवानी ने प्रेस नोट में कहा था-“शासकीय महाविद्यालय की करोड़ों की जमीन अतिक्रमण से मुक्त करवाई। कुछ तथाकथित लोगों द्वारा नई आबादी अफीम गोदाम रोड पर कॉलेज की जमीन पर पक्का निर्माण हो रहा था। सूचना मिलते ही मैं और एबीवीपी के छात्र मौके पर पहुंचे और अतिक्रमण हटवाया।” जानकारी के अनुसार, अतिक्रमणकारी पक्ष की 5 हजार वर्ग फीट जमीन रास्ते में चली गई थी, जबकि उन्होंने कॉलेज की 15 हजार वर्ग फीट जमीन पर ग्रीन नेट लगाकर कब्जा कर लिया था। चंदवानी ने बताया कि अतिक्रमणकर्ता कोर्ट केस जीतने का दावा कर रहे थे, लेकिन कोई दस्तावेज नहीं दिखाया। कलेक्टर द्वारा कब्जा दिलवाने की प्रक्रिया भी नहीं अपनाई गई। मंदसौर एसडीएम ने तीन सदस्यीय दल गठित कर जांच करवाई थी। बताया जा रहा है कि जमीन शहर के किसी व्यक्ति ने खरीद ली उसके बार जनभागीदारी अध्यक्ष पीछे हट गए।
प्राचार्य ने प्रकाशित करवाई थी जाहिर सूचना
इस घटना के बाद महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. जेएस दुबे ने 2 जून 2025 को दैनिक समाचार पत्र में सार्वजनिक सूचना प्रकाशित कराई। इसमें स्पष्ट किया गया कि “सर्व साधारण को सूचित किया जाता है कि सर्वे नंबर 623 की शासकीय भूमि महाविद्यालय की है। इसकी चर्तुःसीमा इस प्रकार है – पूर्व में ईसाई समाज का चर्च और महाविद्यालय की भूमि, दक्षिण-पश्चिम में अफीम गोदाम रोड, उत्तर में पुलिस कॉलोनी रोड। कोई व्यक्ति इस पर विक्रय, बंटवारा, कब्जा या खरीद-फरोख्त न करे, वरना न्यायालयीन कार्रवाई होगी।”
इन कदमों से लग रहा था कि भूमि सुरक्षित हो गई है, लेकिन छह महीने बाद स्थिति उलट गई।
कोर्ट केस जीतकर शुरू किया निर्माण
अब वही व्यक्ति, जो वर्षों से प्रयासरत था, कोर्ट से केस जीतकर भूस्वामी बन गया और निर्माण शुरू कर दिया। एबीवीपी पदाधिकारियों ने प्राचार्य को ज्ञापन सौंपा, लेकिन डॉ. दुबे ने कोर्ट आदेश का हवाला देकर हाथ खड़े कर दिए। सूत्रों के अनुसार, कोर्ट में महाविद्यालय का पक्ष मजबूत तरीके से नहीं रखा गया, जिससे जमीन हाथ से निकल गई। जनभागीदारी अध्यक्ष नरेश चंदवानी और प्राचार्य की कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, जो पहले सक्रिय थे। दशकों तक कॉलेज के प्राचार्य इस जमीन को बचाते रहे लेकिन खुद को ज्यादा स्मार्ट समझने वाले प्राचार्य दुबे के कार्यकाल में महत्वपूर्ण जमीन हाथ से निकल गई।
NSUI का हंगामा के बाद लगी निर्माण पर रोक
कल एनएसयूआई कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुंचकर हंगामा किया और निर्माण रुकवाया। तहसीलदार ने कहा कि सीमांकन बाकी है, इसलिए कार्य बंद रहेगा। इससे भूमि विवाद फिर से गरमा गया है। स्थानीय लोग और छात्र संगठन मांग कर रहे हैं कि शासकीय जांच हो और भूमि की रक्षा की जाए।
इस पूरे मामले की स्थिति से जनता को अवगत करवाने की जिम्मेदारी जनभागीदारी अध्यक्ष नरेश चंदवानी और पीजी कॉलेज प्राचार्य डॉ.जे.एस दुबे की है। लेकिन दोनों की ओर से अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









