भोपाल। मध्यप्रदेश विधानसभा में सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने अपनी ही सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए सवालों की बौछार कर दी। ग्वालियर जिले के राजमाता विजयाराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय में विभिन्न पदों पर भर्ती प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर उन्होंने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पेश किया और तत्काल जांच कर पूरी भर्ती निरस्त करने की मांग की। इस मुद्दे पर सदन में जमकर हंगामा हुआ, जहां विधायक ने कृषि मंत्री को घेरते हुए लीपापोती का आरोप लगाया।
कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने विधायक के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि भर्ती प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी नहीं है। उन्होंने बताया कि विज्ञापन जारी कर साक्षात्कार आयोजित किए गए थे और बैठकों में कोई आपत्ति नहीं उठाई गई। मंत्री ने यह भी कहा कि मामले से जुड़े सभी दस्तावेज हाईकोर्ट में पेश कर दिए गए हैं और मामला विचाराधीन है। कई नियमों में संशोधन किए गए हैं, लेकिन किसी प्रकार की अनियमितता नहीं पाई गई है।

इसके जवाब में नरेंद्र सिंह कुशवाहा ने मंत्री की सफाई को नकारते हुए तीखे सवाल दागे। उन्होंने पूछा कि चार साल बाद भर्ती क्यों की गई और शासन से अनुमति क्यों नहीं ली गई? कुशवाहा ने कहा, “मैं खुद समिति का सदस्य हूं, इस कांड में हम क्यों फंसे? यह भ्रष्टाचार नहीं तो क्या है?” उन्होंने दावा किया कि तीन विधायकों ने पहले ही आपत्ति जताई थी, लेकिन 26 पदों को भर लिया गया। विधायक ने यह भी आरोप लगाया कि दो दिन पहले आए उम्मीदवारों की भर्ती दो दिनों में ही पूरी कर ली गई, जो पूरी तरह संदिग्ध है। उन्होंने मांग की कि पूरी भर्ती प्रक्रिया निरस्त की जाए।
मंत्री कंसाना ने दोहराया कि भर्ती पूरी तरह नियमों के अनुसार हुई है और कोई अनियमितता नहीं है। लेकिन कुशवाहा ने पलटवार करते हुए कहा कि 2022 में भर्ती करनी थी, तो 2026 में कैसे की गई? कोई अनुमति नहीं ली गई। उन्होंने मंत्री पर आरोप लगाया कि मामले में सही जवाब नहीं दिए जा रहे हैं और सिर्फ लीपापोती की जा रही है। इस बहस से सदन में काफी हंगामा हुआ, जो राज्य की राजनीति में आंतरिक असंतोष को उजागर करता है।
Author: Dashpur Disha
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