गरोठ सीएमओ रहे वीरेंद्र मेहता की लोकायुक्त में प्रचलित है जांच, भानपुरा नप में प्रधानमंत्री आवास योजना में घोटाले की जांच में एक रिटायर्ड सहित दो अन्य सीएमओ शामिल
दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। मध्यप्रदेश के नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोपों से घिरे 67 वर्तमान और पूर्व मुख्य नगर पालिका अधिकारियों (सीएमओ) के खिलाफ जांच चल रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 20 आरोपी अधिकारी अभी भी विभिन्न नगरीय निकायों में प्रभारी सीएमओ के रूप में कार्यरत हैं। इतना ही नहीं, सात निकायों में तो लिपिकों को भी सीएमओ का प्रभार सौंपा गया है। यह खुलासा नगरीय विकास विभाग ने विधानसभा में विधायक केशव देसाई के सवाल के लिखित जवाब में किया है।

नगरीय विकास मंत्री का जवाब
नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने बताया कि जांच के निष्कर्ष के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, लेकिन इसकी समय-सीमा बताना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रभारी सीएमओ के लिए राजस्व निरीक्षक, राजस्व उपनिरीक्षक, अधीक्षक, मुख्य लिपिक सह लेखापाल, लेखापाल और सहायक ग्रेड-01 को नियुक्त करने का प्रावधान है। राजस्व वसूली की जिम्मेदारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी और उनके अधीनस्थ कर्मचारियों की होती है।
कहां-कहां जमे हैं आरोपी प्रभारी सीएमओ
नगरीय विकास विभाग के अनुसार, भ्रष्टाचार के आरोपी प्रभारी सीएमओ निम्नलिखित संभागों के नगरीय निकायों में कार्यरत हैं:
– भोपाल संभाग: बोड़ा, बरेली, टिमरनी
– इंदौर संभाग: पुनासा
– ग्वालियर संभाग: बड़ौनी, विजयपुर, सबलगढ़, गोहद, भिंड, नरवर, कैलारस
– शहडोल संभाग: जैतहारी
– सागर संभाग: पथरिया, छतरपुर, कारी, पवई, पृथ्वीपुर
– उज्जैन संभाग: भानपुरा, रामपुरा, सोयतकलां
कई निकायों में एकाधिक सीएमओ पर जांच
– विदिशा (लटेरी नगर परिषद): चार पूर्व सीएमओ के खिलाफ तालाब गहरीकरण में भ्रष्टाचार और खनिज रॉयल्टी चोरी के आरोप में लोकायुक्त में प्रकरण दर्ज।
– इंदौर (रानापुर नगर परिषद): तीन पूर्व सीएमओ के खिलाफ मुख्यमंत्री शहरी पेयजल योजना में पाइप लाइन कार्य में अनियमितता की जांच।
– उज्जैन (बड़नगर): लोकायुक्त छापे में आय से अधिक संपत्ति और गंभीर अनियमितताओं के बाद तीन पूर्व सीएमओ की जांच। यह छापा सीएमओ कुलदीप किन्शुक के घर पर पड़ा था जिसमें मौके पर गरोठ सीएमओ वीरेंद्र मेहता और एक अन्य सीएमओ भी लोकायुक्त की गिरफ्त में आए थे। तीनों के विरूद्ध लोकायुक्त प्रकरण प्रचलित है।
– मंदसौर (भानपुरा): वर्तमान और तीन पूर्व सीएमओ पर प्रधानमंत्री आवास योजना में अपात्र हितग्राहियों को लाभ देने के आरोप। इसी प्रकरण में अध्यक्ष को अयोग्य घोषित किया गया था। इसके अलावा शताब्दी मार्केट में दुकान आवंटन में गड़बड़ी का मामला भी लोकायुक्त जांच में प्रचलित है।
– अनूपपुर (जैतहारी): दो सीएमओ के खिलाफ शासकीय स्कूल की जमीन पर दुकान निर्माण और नीलामी में अनियमितता की लोकायुक्त जांच।
लिपिकों को भी सौंपा सीएमओ का प्रभार
सात नगरीय निकायों में लिपिकों को प्रभारी सीएमओ बनाया गया है, जो प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाता है। विभाग ने स्वीकार किया कि इन अधिकारियों को न तो निलंबित किया गया है और न ही प्रभार से हटाया गया है।
विधायक का सवाल, कार्रवाई का इंतजार
विधायक केशव देसाई ने पूछा था कि राजस्व वसूली की बकाया राशि वसूलने की जिम्मेदारी किसकी है और भ्रष्टाचार के आरोपी प्रभारी सीएमओ के खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। जवाब में विभाग ने जांच के बाद कार्रवाई की बात कही, लेकिन समय-सीमा की अनिश्चितता ने जनप्रतिनिधियों और जनता में असंतोष पैदा किया है।
प्रदेश के नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई में देरी और उनकी निरंतर नियुक्ति से प्रशासनिक पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। जनता और जनप्रतिनिधि जल्द से जल्द ठोस कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, ताकि भ्रष्टाचार पर लगाम लग सके और नगरीय निकायों का सुचारू संचालन सुनिश्चित हो।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









