बड़ावदा के तत्कालीन और वर्तमान में रामपुरा पदस्थ नायब तहसीलदार मृगेन्द्र सिंह सिसौदिया के खिलाफ न्यायालय ने लिया संज्ञान; वीडियो, दस्तावेजी साक्ष्य और गवाहों के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं तहत कार्रवाई के आदेश
दशपुर दिशा । दीपक सोनी

जावरा। बहुचर्चित बड़ावदा वायरल मारपीट प्रकरण में महत्वपूर्ण न्यायिक घटनाक्रम सामने आया है। न्यायालय ने तत्कालीन नायब तहसीलदार टप्पा बड़ावदा एवं वर्तमान में रामपुरा, जिला नीमच पदस्थ मृगेंद्र सिंह सिसौदिया के विरुद्ध प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार पाए जाने पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 324, 323 एवं 294 के तहत संज्ञान लेने का आदेश पारित किया है।
प्रकरण के अनुसार, 11 मई 2023 को शाम करीब 4 बजे ग्राम बड़ावदा स्थित बालाजी रेस्टोरेंट पर परिवादी विनोद पिता अमरजी एवं विक्रम पिता अमरजी के साथ तत्कालीन नायब तहसीलदार द्वारा कथित रूप से पद एवं अधिकारों का दुरुपयोग करते हुए मारपीट की गई। आरोप है कि होटल में चाय बनाने की केतली से परिवादी के सिर एवं अन्य संवेदनशील अंगों पर प्रहार किया गया तथा सार्वजनिक स्थान पर अभद्र एवं अपमानजनक गालियां भी दी गईं। घटना का वीडियो उस समय सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से वायरल हुआ था।
परिवादी का आरोप है कि घटना का वीडियो सामने आने के बावजूद पुलिस द्वारा आपराधिक प्रकरण दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद परिवादी ने अपने अधिवक्ताओं एडवोकेट अनित बत्रा एवं एडवोकेट अर्पित चत्तर जैन के माध्यम से न्यायालय में परिवाद प्रस्तुत किया।
न्यायालय ने परिवादी के कथनों, दस्तावेजी साक्ष्यों एवं उपलब्ध सामग्री का परीक्षण करने के बाद पाया कि आरोपी के विरुद्ध प्रथम दृष्टया पर्याप्त आधार मौजूद हैं। न्यायालय ने अपने आदेश में उल्लेख किया कि केतली से सिर जैसे संवेदनशील अंग पर प्रहार किया जाना गंभीर प्रकृति का कृत्य है, जिससे गंभीर चोट अथवा मृत्यु की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। साथ ही सार्वजनिक स्थान पर कथित रूप से अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किए जाने के आरोप भी विचारणीय पाए गए।
इन तथ्यों के आधार पर न्यायालय ने परिवाद को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आरोपी मुकेश सिंह किसोंदिया के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 324, 323 एवं 294 के अंतर्गत संज्ञान लेने के आदेश पारित किए हैं।
परिवादी पक्ष के अधिवक्ता अर्पित चत्तर जैन ने बताया कि न्यायालय के इस आदेश से यह स्पष्ट हुआ है कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि इस आदेश से परिवादी को निष्पक्ष न्याय मिलने की उम्मीद और मजबूत हुई है।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।








