आस्था के बीच कचरे का अंबार! बोर्डिया कुंवा बालाजी मंदिर परिसर में बदबू और गंदगी पर भड़के अनिल दसेड़ा, नगर पालिका को दी चेतावनी
दशपुर दिशा । दीपक सोनी
जावरा। बोर्डिया कुंवा स्थित अति प्राचीन श्री बालाजी मंदिर के समीप नगर पालिका द्वारा लगातार कचरा डाले जाने से पूरा क्षेत्र मिनी ट्रेंचिंग ग्राउंड में तब्दील हो गया है। इस गंभीर स्थिति को लेकर पूर्व नगर पालिका अध्यक्ष अनिल दसेड़ा ने नगर पालिका प्रशासन को तीन दिन का अल्टीमेटम देते हुए स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तीन दिवस के भीतर मंदिर परिसर के पास से कचरा नहीं हटाया गया, तो चौथे दिन श्रद्धालुओं एवं स्थानीय नागरिकों के जनसहयोग से इस मिनी ट्रेंचिंग ग्राउंड को हटाने का आंदोलन किया जाएगा।


अनिल दसेड़ा ने कहा कि आज स्वच्छता अभियान केवल सरकारी नारा नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक के जीवन का हिस्सा बन चुका है। लोग घरों और दुकानों में डस्टबिन रख रहे हैं तथा कचरा वाहनों में कचरा डाल रहे हैं। इसके बावजूद जावरा शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह चरमराई हुई है। उन्होंने कहा कि सफाई कर्मचारियों की मेहनत पर कोई सवाल नहीं है, बल्कि असली समस्या सफाई व्यवस्था का संचालन करने वाले अधिकारियों की लापरवाही है। समय पर संसाधन, वाहन, उपकरण और आवश्यक सामग्री उपलब्ध नहीं होने से रोज का कचरा रोज नहीं उठ पा रहा है।
उन्होंने बताया कि दिल्ली प्रवास के दौरान उन्हें बोर्डिया कुंवा बालाजी मंदिर के श्रद्धालुओं का फोन आया कि मंदिर के समीप नगर पालिका ने कचरे का स्थायी ढेर बना दिया है। जावरा लौटने के बाद उन्होंने समाजसेवी बाबूलाल कोठारी, दीपक परमार, आशीष कोठारी, मयंक कोठारी, मनोहर लाल शर्मा पुकारी, सतीश हेमावत, लोकेश शर्मा, मयूर कोठारी, जय डांगी सहित अन्य साथियों के साथ मौके का निरीक्षण किया।
निरीक्षण के दौरान मंदिर परिसर के आसपास कचरे के बड़े-बड़े ढेर मिले, जिनसे उठने वाली दुर्गंध पूरे क्षेत्र में फैल रही थी। हवा के साथ बदबू आसपास की बस्तियों तक पहुंच रही है, जिससे श्रद्धालुओं, लहसुन मंडी एवं सब्जी मंडी जाने वाले किसान, व्यापारी, मजदूर, हम्माल तथा कुम्हारीपुरा, ढोलीपुरा, महावीर कॉलोनी, हनुमान गली, खिड़की दरवाजा और बोर्डिया कुंवा क्षेत्र के सैकड़ों नागरिकों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने बताया कि गत 5 जून को स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए दिल्ली से आई टीम के साथ मुख्य नगर पालिका अधिकारी भी यहां पहुंचे थे। उस समय नागरिकों ने उनका स्वागत कर कचरे की समस्या से अवगत कराया था। मुख्य नगरपालिका अधिकारी ने तत्काल कचरा हटाने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन एक माह बीत जाने के बावजूद न केवल कचरा नहीं हटाया गया बल्कि प्रतिदिन नया कचरा भी वहीं डाला जा रहा है।
खिड़की दरवाजा निवासी समाजसेवी बाबूलाल कोठारी ने कहा कि पूरे बोर्डिया कुंवा क्षेत्र में प्लास्टिक और अन्य कचरा हवा में उड़ता रहता है, जिससे दिनभर गंदगी का वातावरण बना रहता है। मंदिर आने वाले श्रद्धालु, महिलाएं, किसान और व्यापारी नाक पर रूमाल रखकर निकलने को मजबूर हैं। यह स्थिति नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अनिल दसेड़ा ने मौके से ही मुख्य नगरपालिका अधिकारी से मोबाइल पर चर्चा कर कहा कि स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से मंदिर के पास बना यह मिनी ट्रेंचिंग ग्राउंड तत्काल हटाया जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि “यदि तीन दिन के भीतर यहां से कचरा नहीं हटाया गया तो चौथे दिन श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के साथ जनसहयोग से इस कचरे को स्वयं हटाया जाएगा और इसके लिए नगर पालिका प्रशासन जिम्मेदार होगा।”
दसेड़ा ने बताया कि मानसून शुरू होने से पहले भी उन्होंने नगर पालिका को इस स्थान पर कचरा नहीं डालने की चेतावनी दी थी, लेकिन प्रशासन ने गंभीरता नहीं दिखाई। उन्होंने कहा कि आस्था के केंद्र को कचरे का अड्डा बनाना न केवल धार्मिक भावनाओं का अपमान है, बल्कि हजारों लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ है। अब समय आ गया है कि नगर पालिका सफाई व्यवस्था में सुधार लाकर जिम्मेदारी के साथ कार्य करे, अन्यथा जनआंदोलन अपरिहार्य होगा।
Author: Dashpur Disha
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