दवा कंपनियों और डॉक्टरों के गठजोड़ का खुलासा : प्रदेश के 20 डॉक्टरों को मेडिकल काउंसिल ने किया नोटिस जारी

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

मन्दसौर के डॉ.विजयशंकर मिश्र को भी जारी हुआ नोटिस, एमपीएमसी ने डॉक्टरों से पासपोर्ट, आयकर रिटर्न, ऑडिट रिपोर्ट और बैंक डिटेल्स जैसे दस्तावेज मांगे

मन्दसौर। छिंदवाड़ा में श्रीसन फार्मा की कफ सिरप ‘कोल्ड्रिफ’ पीने से 25 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। इस दवा को परासिया के डॉ.प्रवीण सोनी पिछले 10 साल से मरीजों को प्रिस्क्राइब कर रहे थे। सूत्रों के मुताबिक, डॉ.सोनी और दवा कंपनी के बीच एक अघोषित करार था, हालांकि डॉ.सोनी ने मीडिया बातचीत में इससे इनकार किया। यह मामला दवा कंपनियों और डॉक्टरों के बीच अनैतिक गठजोड़ की गंभीर समस्या को उजागर करता है।

10 साल पुराना मामला: डॉक्टरों की ‘स्पॉन्सर्ड’ इटली यात्रा
मध्यप्रदेश में एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जो 10 साल से मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल की फाइलों में दबा हुआ है। रायपुर के सामाजिक कार्यकर्ता विकास तिवारी ने 28 अगस्त, 2015 को शिकायत दर्ज कराई थी कि मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 28 प्राइवेट डॉक्टरों ने 13 से 21 जुलाई, 2014 तक मुंबई की फार्मा कंपनी ‘यूएसवी लिमिटेड’ के खर्च पर सपरिवार इटली की सैर की थी। यह यात्रा कंपनी की दवाएं प्रिस्क्राइब करने के एवज में ‘इनाम’ थी, जो मेडिकल एथिक्स का खुला उल्लंघन है।
शिकायत में मध्यप्रदेश के 14 जिलों के 20 प्रतिष्ठित डॉक्टरों के नाम शामिल हैं। इनमें इंदौर, इटारसी, दमोह, कटनी, रीवा, सतना, नरसिंहपुर, खरगोन, धार, मंदसौर, जबलपुर, ग्वालियर, शुजालपुर और नीमच के डॉक्टर शामिल हैं।

मेडिकल काउंसिल की सुस्ती, 10 साल बाद भी सिर्फ नोटिस जारी
मध्यप्रदेश मेडिकल काउंसिल की लापरवाही का आलम यह है कि 10 साल बाद भी इस मामले में कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। नियमों के अनुसार, शिकायत का निपटारा 6 महीने में होना चाहिए, लेकिन काउंसिल ने अब तक केवल 8 डॉक्टरों के यात्रा टिकट और 16 के पासपोर्ट ही जुटाए हैं। तीन डॉक्टरों का सही पता तक नहीं मिला।

शिकायतकर्ता विकास तिवारी ने बताया कि काउंसिल ने उनसे ही डॉक्टरों की यात्रा की जानकारी मांगी, जबकि छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल ने कंपनी से डिटेल्स हासिल कर ली थी। तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर करने की चेतावनी दी, तब जाकर काउंसिल ने 30 सितंबर, 2025 को 20 डॉक्टरों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा।

एथिक्स कमेटी की सुनवाई में दस्तावेज के लिए अंतिम चेतावनी
7 अगस्त, 2025 को एथिक्स कम डिसीप्लीनरी कमेटी ने मामले की सुनवाई की। कमेटी ने माना कि चार बार पत्र भेजने के बावजूद डॉक्टरों ने पासपोर्ट, आयकर रिटर्न, ऑडिट रिपोर्ट और बैंक डिटेल्स जैसे दस्तावेज जमा नहीं किए। अब काउंसिल ने 15 दिन का अंतिम मौका देते हुए दस्तावेज जमा करने को कहा है, वरना अंतिम आदेश जारी होगा।

फार्मा कंपनियों पर भी कार्रवाई की मांग
विकास तिवारी ने कहा कि इस तरह के मामलों में सिर्फ डॉक्टरों को दोषी ठहराना ठीक नहीं। फार्मा कंपनियों पर भी Uniform Code for Pharmaceutical Marketing Practices (UCPMP), 2024 के तहत कार्रवाई होनी चाहिए। अनैतिक मार्केटिंग के लिए कंपनी का लाइसेंस निलंबित या ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।

अधिकारियों का पल्ला झाड़ना
मध्य प्रदेश मेडिकल काउंसिल की रजिस्ट्रार डॉ. दीप्ति चौरसिया ने कहा कि उन्होंने एक साल पहले ही पद संभाला है और मामले की सुनवाई एथिक्स कमेटी कर रही है। कमेटी की चेयरपर्सन और डायरेक्टर ऑफ मेडिकल एजुकेशन डॉ. अरुणा कुमार ने फाइल न देखने की बात कहकर पल्ला झाड़ लिया।

नोटिस प्राप्त 20 डॉक्टरों की सूची
इंदौर: डॉ.ए.बी. पटेल, डॉ.उमेश मसंद
इटारसी: डॉ.कन्हैयालाल जैसवानी
दमोह: डॉ.दर्शनमल संगतानी
कटनी: डॉ.प्रवीण वैश्य
रीवा: डॉ.राजेश सिंघल
सतना: डॉ.सुशील कुमार श्रीवास्तव, डॉ.राजेश जैन
नरसिंहपुर: डॉ.सचिंद्र मोदी, डॉ.गिरीश चरण दुबे
खरगोन: डॉ.रवि महाजन
धार: डॉ.विष्णु कुमार पाटीदार
मंदसौर: डॉ.विजय शंकर मिश्रा
जबलपुर: डॉ.नरेश कुमार बंसल, डॉ.विजय चावला, डॉ.अजय भण्डारी
ग्वालियर: डॉ.राजेश्वर सिंह जादौन
शुजालपुर: डॉ.एस.एन. गुप्ता
नीमच: डॉ.प्रकाश चंद्र पटेल, डॉ.रश्मि पटेल

Dashpur Disha
Author: Dashpur Disha

दशपुर दिशा समाचार पत्र भारत के प्रेस महापंजीयक कार्यालय नई दिल्ली से पंजीकृत है। दशपुर दिशा मालवांचल में खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित समाचार पत्र है। www. dashpurdisha.com हमारी अधिकृत वेबसाइट है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें

error: Content is protected !!