दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मन्दसौर। जिले की भानपुरा तहसील के ग्राम अन्त्रालिया में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता भर्ती प्रक्रिया में अवैध वसूली का मामला सामने आया है। आवेदक हेमलता लोहार के पिता मदनलाल लोहार ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी के चयन के बाद एक व्यक्ति ने सत्ता और रसूख का दम दिखाकर उनसे पैसे की मांग की और धमकी दी।
मदनलाल लोहार के अनुसार, उनकी पुत्री हेमलता ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के पद के लिए ऑनलाइन आवेदन किया था। शासन द्वारा निर्धारित नियमों और योग्यता के आधार पर हेमलता का चयन सूची में नाम शामिल हुआ। लेकिन जैसे ही चयन सूची जारी हुई, प्रेमपुरिया निवासी बालाराम गायरी उनके घर पहुंचा और दावा किया कि हेमलता का चयन उसने अपने प्रभाव और स्थानीय नेताओं के सहयोग से करवाया है।
मदनलाल ने बताया कि बालाराम ने उनसे 10,000 रुपये फोनपे (नंबर 8462867556) के जरिए वसूल लिए और अब 80,000 रुपये की अतिरिक्त मांग कर रहा है। बालाराम ने धमकी दी कि यदि पैसे नहीं दिए गए तो हेमलता का नाम चयन सूची से हटा दिया जाएगा।

पुलिस में शिकायत, लेकिन कार्रवाई नहीं
मदनलाल ने इस मामले की शिकायत 8 सितंबर को भानपुरा थाने में दर्ज की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद 9 सितंबर को उन्होंने मंदसौर पुलिस अधीक्षक को डाक रजिस्ट्री के माध्यम से आवेदन भेजा। उन्होंने बताया कि उनके पास बालाराम की धमकियों की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी मौजूद है। इसके बावजूद पुलिस प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
पत्रकारों को सौंपे सबूत
न्याय न मिलने पर मदनलाल ने भानपुरा के पत्रकारों को सभी सबूत और ऑडियो रिकॉर्डिंग सौंपकर मामले को सार्वजनिक करने की गुहार लगाई। उन्होंने कहा कि सत्ता और रसूख की आड़ में दलाली का धंधा खुलेआम चल रहा है, जिससे आम नागरिक और मेहनती युवा परेशान हैं।
पुलिस और आरोपी का पक्ष
भानपुरा पुलिस अधिकारी रमेश डांगी ने कहा, “आवेदन मेरे संज्ञान में नहीं है। जल्द ही संज्ञान लेकर कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि 8 सितंबर को दी गई शिकायत अब तक उनके ध्यान में नहीं आई, जो पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाता है।
वहीं, बालाराम गायरी ने फोन पर बातचीत में आरोपों को निराधार बताया। उसने दावा किया कि उसने मदनलाल को 30,000 रुपये नकद दिए थे और वह उसी राशि की वसूली कर रहा था।
क्षेत्र में दलाली का बढ़ता बोलबाला
यह मामला मंदसौर जिले में सत्ता के दम पर दलाली और धमकियों की बढ़ती प्रवृत्ति को उजागर करता है। एक ओर मेहनती युवा अपनी योग्यता के बल पर नौकरी पाने के लिए कड़ा संघर्ष कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर दलाल सत्ता की आड़ में अवैध वसूली कर रहे हैं। डर के कारण कई लोग दलाली देने को मजबूर हैं, लेकिन बोलने से कतराते हैं।
सवालों के घेरे में प्रशासन और जनप्रतिनिधि
इस घटना ने न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं, बल्कि यह भी पूछा जा रहा है कि क्या जनप्रतिनिधि और प्रशासन ऐसी घटनाओं से अनजान हैं? क्या इस तरह की दलाली को रोकने के लिए कोई ठोस कदम उठाए जाएंगे?
मदनलाल और उनके परिवार को अब पुलिस और प्रशासन से न्याय की उम्मीद है। इस मामले में जल्द कार्रवाई न होने पर क्षेत्र में अवैध वसूली और धमकियों का यह सिलसिला और बढ़ सकता है।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









