सीतामऊ शासकीय हॉस्पिटल के डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने एसडीओपी को कार्रवाई के लिए दिया आवेदन
मंदसौर। जिले के सीतामऊ तहसील के नाटाराम गांव में 22 अगस्त 2025 की रात करीब 10:30 बजे दो पक्षों के बीच हुए विवाद में गोलियां चलने की घटना सामने आई है। इस हिंसक झड़प में घायल हुए लोगों को उपचार के लिए सीतामऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, जहां मरीजों के साथ आए लोगों ने अस्पताल में तोड़फोड़ की और डॉक्टरों व नर्सिंग स्टाफ के साथ मारपीट की। इस घटना से अस्पताल में भय का माहौल बन गया, जिसके बाद चिकित्सकों और स्टाफ ने थाना सीतामऊ में आवेदन देकर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

क्या हुआ विवाद में
पुलिस और अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, नाटाराम गांव में दो पक्षों के बीच हुए विवाद में 12 लोग घायल हुए, जिनमें से चार को फायरआर्म से चोटें आई थीं। अन्य घायलों को सिर और शरीर के अन्य हिस्सों में गंभीर चोटें थीं। घायलों को उनके परिजन और मित्र अपने वाहनों से सीतामऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे।
अस्पताल में हंगामा और तोड़फोड़
अस्पताल में उपचार के दौरान मरीजों के साथ आए 60-70 लोगों की भीड़ ने आपस में झगड़ा शुरू कर दिया। इस दौरान उन्होंने इमरजेंसी वार्ड और एएनसी क्लिनिक के कांच के दरवाजे तोड़ दिए। एक कांच का टुकड़ा डॉ. सीताराम गोड के सीने पर गिरा, जिससे उन्हें चोट आई। चश्मा पहने होने के कारण वह गंभीर चोट से बच गए। भीड़ ने चिकित्सकों और स्टाफ के साथ अभद्र व्यवहार, झूमाझटकी और मारपीट की, जिससे ड्यूटी पर मौजूद स्टाफ में दहशत फैल गई।
इस हंगामे का असर अस्पताल में पहले से भर्ती मरीजों पर भी पड़ा। एक 64 वर्षीय मरीज, जाकिर हुसैन, जो हाई ब्लड प्रेशर का इलाज करा रहा था, डर के मारे इमरजेंसी वार्ड से भाग गया। अस्पताल की सरकारी संपत्ति और दस्तावेजों को भी नुकसान पहुंचाया गया, जिससे शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न हुई।
डॉक्टरों और स्टाफ का आवेदन
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सभी चिकित्सकों और नर्सिंग स्टाफ ने संयुक्त रूप से थाना सीतामऊ में आवेदन देकर इस घटना की निंदा की। आवेदन में कहा गया कि ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी हैं, जिनकी शिकायत पुलिस को दी गई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। स्टाफ ने डॉक्टर प्रोटेक्शन एक्ट 2008 और शासकीय कार्य में बाधा डालने की धाराओं के तहत सख्त कार्रवाई की मांग की है।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
अस्पताल स्टाफ ने बताया कि सीतामऊ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में पहले भी इस तरह की घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन प्रशासन और पुलिस की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इस बार की घटना ने चिकित्सा कर्मियों की सुरक्षा और अस्पतालों में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
नाटाराम गांव में दो पक्षों के बीच हिंसक विवाद और उसके बाद अस्पताल में हुई तोड़फोड़ व मारपीट की घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था और चिकित्सा सुविधाओं की स्थिति को उजागर किया है। अस्पताल स्टाफ की मांग है कि दोषियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए जाएं। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।
Author: Dashpur Disha
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