मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने नर्सिंग कॉलेजो की सीबीआई से करवाई थी जांच जिसमें सैकड़ों कॉलेज अयोग्य पाए गए थे, अब पैरामेडीकल कॉलेजों की जांच करेगा क्यूसीआई
✍️दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने पैरामेडिकल कॉलेजों में मान्यता प्रक्रिया में अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) को सभी पैरामेडिकल कॉलेजों की गहन जांच के आदेश दिए हैं। जांच में कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया, बुनियादी सुविधाओं, प्रयोगशालाओं, शिक्षकों और पाठ्यक्रम की गुणवत्ता की पड़ताल होगी। कोर्ट ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि कॉलेज परिसर में केवल पैरामेडिकल कोर्स ही संचालित हों, अन्य कोई शैक्षणिक संस्थान नहीं।

नर्सिंग घोटाले में अयोग्य कॉलेजों को दे दी पैरामेडीकल कोर्स की मान्यता
मामला 14 जुलाई 2025 को मध्यप्रदेश पैरामेडिकल काउंसिल द्वारा 166 संस्थानों को सत्र 2023-24 के लिए पूर्वव्यापी मान्यता देने से शुरू हुआ। हाईकोर्ट ने इसे तर्कहीन और असामान्य करार देते हुए सवाल उठाया कि 2025 में दी गई मान्यता के आधार पर 2023-24 में कोर्स कैसे संचालित हो सकते हैं? कई कॉलेजों ने बिना मान्यता या अपर्याप्त सुविधाओं के बावजूद छात्रों को प्रवेश दिया। कुछ कॉलेजों को सीबीआई ने नर्सिंग कॉलेज घोटाले में अयोग्य पाया था, फिर भी उन्हें पैरामेडिकल कोर्स की मान्यता दी गई।
याचिकाकर्ताओं की आपत्ति
लॉ स्टूडेंट्स एसोसिएशन सहित अन्य पक्षों ने इस पर आपत्ति जताई। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि बिना मान्यता और बुनियादी ढांचे के कॉलेजों में दाखिला देकर छात्रों का भविष्य खतरे में डाला गया। हाई कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई शुरू की।
जानिए पूरे प्रकरण में कब क्या हुआ
– 16 जुलाई 2025: हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सत्र 2023-24 और 2024-25 के लिए मान्यता व प्रवेश प्रक्रिया पर रोक लगाई। कोर्ट ने पूर्वव्यापी मान्यता को सामान्य बुद्धि के खिलाफ बताया और पैरामेडिकल काउंसिल से जवाब मांगा।
– 1 अगस्त 2025: सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगाई, जिससे प्रवेश प्रक्रिया फिर शुरू हो सकी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट की सुनवाई और क्यूसीआई की जांच को जारी रखने की अनुमति दी।
– 8 अगस्त 2025: हाई कोर्ट ने पैरामेडिकल काउंसिल को सभी कॉलेजों की मान्यता से जुड़े दस्तावेज सीलबंद लिफाफे में जमा करने का आदेश दिया। क्यूसीआई को जांच में यह सुनिश्चित करने को कहा गया कि कॉलेज केवल पैरामेडिकल कोर्स ही संचालित करें।
भारतीय गुणवत्ता परिषद क्या है
भारतीय गुणवत्ता परिषद (क्यूसीआई) 1996 में स्थापित एक स्वायत्त संगठन है, जो भारत सरकार के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत काम करता है। इसका उद्देश्य शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में गुणवत्ता मानकों को लागू करना और ‘मेड इन इंडिया’ की विश्वसनीयता को बढ़ाना है।
अगली सुनवाई 12 अगस्त को
हाई कोर्ट में अगली सुनवाई 12 अगस्त 2025 को होगी। क्यूसीआई की जांच और कोर्ट के फैसले से पैरामेडिकल कॉलेजों की मान्यता प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रों के हितों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठने की उम्मीद है।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









