गरोठ में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर बनाई गई आनंद धाम और गणेश विहार कॉलोनी की विकास अनुमति रद्द करने की कार्रवाई शुरू

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दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। गत दिवस दशपुर दिशा ने जिले के गरोठ में शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे कर विकसित की गई कॉलोनी आनंदधाम और गणेश विहार को लेकर प्रमुखता से खबर का प्रकाशन किया था। खबर के बाद सरकारी जमीन पर कॉलोनी विकसित करने के मामले में प्रशासन ने सख्त कदम उठाए हैं। बंजारी रोड पर स्थित आनंद धाम और गणेश विहार कॉलोनी में शासकीय और चारागाह भूमि के दुरुपयोग की पुष्टि के बाद तहसीलदार ने जांच प्रतिवेदन एसडीएम को सौंपा। इस रिपोर्ट के आधार पर एसडीएम कार्यालय ने दोनों कॉलोनियों की विकास अनुमति रद्द करने के लिए कॉलोनी सेल को पत्र लिखा है।

जानिए क्या है पूरा मामला
तहसीलदार की जांच में पाया गया कि गणेश विहार कॉलोनी में कॉलोनी मालिक कैलाशचंद्र गुप्ता और कॉलोनाइजर आशीष डबकरा ने सर्वे नंबर 596 की शासकीय चारागाह भूमि को कॉलोनी के रास्ते के रूप में उपयोग किया। वहीं, आनंद धाम कॉलोनी में भी शासकीय भूमि पर पेयजल टंकी और अन्य निर्माण किए गए। दोनों कॉलोनियों में आशीष डबकरा कॉलोनाइजर हैं।

हैरानी की बात यह है कि टाउन एंड कंट्री प्लानिंग, नीमच ने इन कॉलोनियों को पहले ही स्वीकृति दे दी थी, जबकि इनके प्रवेश द्वार और आंतरिक हिस्सों में शासकीय भूमि का उपयोग हुआ था। यह प्रशासनिक प्रक्रिया में गंभीर चूक मानी जा रही है। स्थानीय नागरिकों की शिकायतों के बाद तहसील स्तर पर जांच शुरू हुई, जिसके बाद यह खुलासा हुआ।

शुरू हुई प्रशासन की कार्रवाई
तहसीलदार ने अपनी रिपोर्ट में दोनों कॉलोनियों के नक्शे रद्द करने की अनुशंसा TNC विभाग को भेजी है। एसडीएम राहुल चौहान ने बताया कि “पटवारी रिपोर्ट और तहसील कार्यालय के प्रतिवेदन के आधार पर हमने कॉलोनी सेल को पत्र लिखा है कि दोनों कॉलोनियों में शासकीय भूमि का उपयोग किया गया है। इसके आधार पर नगर था ग्राम निवेश नीमच द्वारा दी गई विकास अनुमति रद्द की जाए।”

टीएंडसीपी की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
इस मामले ने दोनों कॉलोनी स्वीकृति देने वाली एजेंसी टीएंडसीपी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। शासकीय भूमि पर कॉलोनी विकास की अनुमति कैसे दी गई, इसे लेकर प्रशासनिक स्तर पर जांच की मांग तेज हो रही है। प्रशासन की इस कार्रवाई से भूमाफियाओं पर नकेल कसने की उम्मीद जताई जा रही है। कॉलोनी सेल द्वारा विकास अनुमति रद्द होने पर दोनों कॉलोनियों के भविष्य पर असर पड़ सकता है। ये कार्रवाई इन कॉलोनियों में भूखंड खरीदने वाले लोगों को शासकीय उलझनों में फंसने से बचाने में भी सहायक सिद्ध होगी।

शासकीय जमीनों पर कब्जा कर कॉलोनी विकसित करने वाले कॉलोनाइजर आशीष डपकरा का कॉलोनाइजर लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई भी स्थानीय प्रशासन को करनी चाहिए। क्योंकि जानबूझकर बार बार आशीष डपकरा अपनी हर कॉलोनी में सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण कर कॉलोनियां विकसित कर रहा है।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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