शिवगढ़। जयस भील एकता मिशन ने रतलाम जिले के शिवगढ़ थानांतर्गत रामपुरिया भीलान निवासी शम्भूसिंह गरवाल पर हुए जानलेवा हमले के विरोध में शिवगढ़ में जोरदार प्रदर्शन किया। संगठन के कार्यकर्ताओं और पीड़ित के परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग को लेकर विरोध मार्च निकाला और शिवगढ़ थाने का घेराव किया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कथित मिलीभगत और आदिवासियों पर अत्याचार करने वालों को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए डीजीपी के नाम एसडीओ किशोर पाटनवाला को ज्ञापन सौंपा।
ये है पूरा मामला
ज्ञापन के अनुसार, 23 जून 2025 को रामपुरिया भीलान (तहसील सैलाना) निवासी शम्भूसिंह पिता हीरा गरवाल रतलाम से अपने गांव लौट रहे थे। शिवगढ़-रतलाम रोड पर भेड़ली घाट के पास राहुल गुर्जर के ढाबे के निकट उनकी गाड़ी को रोककर कुछ लोगों ने उन पर हमला कर दिया। आरोपियों ने शम्भूसिंह को मां-बहन की गालियां दीं और जातिसूचक टिप्पणियां करते हुए कहा, “साले भीलड़े, तुझे काटकर फेंक देंगे, पुलिस हमारा कुछ नहीं बिगाड़ सकती, हमारी ऊपर तक सेटिंग है।” हमलावरों ने लाठी, लात और घूंसे से शम्भूसिंह को बेरहमी से पीटा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।

आरोपियों की हो चुकी पहचान
आरोपियों की पहचान सुरेश पिता भीकु गुर्जर, समरथ पिता अंतरसिंह गुर्जर, और मनोहर पिता उमरावसिंह गुर्जर, सभी निवासी रामपुरिया गुजरान (थाना शिवगढ़) के रूप में हुई है। ये सभी कथित तौर पर आपराधिक प्रवृत्ति के हैं और शम्भूसिंह के गांव में शासकीय जमीनों पर कब्जा करने की कोशिश कर रहे हैं।
पिछले हमले और पुलिस की निष्क्रियता
ज्ञापन में बताया गया कि शम्भूसिंह पढ़े-लिखे और जागरूक व्यक्ति हैं, जिसके कारण भूमाफिया उन्हें निशाना बना रहे हैं। पिछले साल इन्हीं हमलावरों ने शम्भूसिंह की पत्नी काना बाई पर खेत में हमला किया था, जिससे उनका हाथ दो जगह से टूट गया था। इस मामले में रतलाम न्यायालय में प्रकरण विचाराधीन है। इसके अलावा, शम्भूसिंह को पहले भी जान से मारने की धमकियां मिल चुकी हैं, जिनकी शिकायत शिवगढ़ थाने में दर्ज कराई गई थी। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। शिकायत पर थाने के एक अधिकारी खड़िया ने कथित तौर पर शम्भूसिंह को कहा, “ये गुर्जर लोग तो तुमको और मारेंगे।”
आदिवासी महिलाओं पर अत्याचार का आरोप
संगठन ने यह भी आरोप लगाया कि रामपुरिया गुजरान के कुछ असामाजिक तत्व आदिवासी महिलाओं के साथ जातीय अत्याचार कर रहे हैं। इन शिकायतों के बावजूद पुलिस ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि हमलावरों और उनकी मदद करने वाले पुलिस अधिकारियों की जांच हो तथ और तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए। साथ ही आदिवासियों के खिलाफ अत्याचार रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। ज्ञापन में यह भी कहा गया कि हमलावर शम्भूसिंह की हत्या कराना चाहते हैं, क्योंकि वे गांव में जागरूकता फैलाते हैं और शासकीय जमीनों पर कब्जे का विरोध करते हैं।
प्रदर्शन में शामिल रहे ये लोग
प्रदर्शन में सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार, जयस भील एकता मिशन के जिला अध्यक्ष विक्रम चारेल, बापू चारपोटा, ईश्वर चारपोटा, राजेश मैडा, छोटू गरवाल, राकेश मैडा, आदिवासी पार्टी के चंदू मैडा, सरपंच रमेश खराड़ी, मदन डामर, विनीत भाभर, कालू भाभर सहित सैकड़ों कार्यकर्ता शामिल हुए।
जयस भील एकता मिशन ने इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि दोषियों को सजा मिले और आदिवासी समुदाय में सुरक्षा का भरोसा कायम हो। पुलिस प्रशासन पर इस मामले में कार्रवाई का दबाव बढ़ गया है।
Author: Dashpur Disha
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