दशपुर दिशा। दीपक सोनी
जावरा। रतलाम जिले के जावरा में राज्यपाल के हस्ताक्षर से जारी राजपत्र के आदेशों की अवहेलना का गंभीर मामला सामने आया है। रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा प्रतिबंधित भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई, जिसमें शासकीय अधिकारियों की कथित मिलीभगत की आशंका जताई जा रही है। यह मामला प्रस्तावित जावरा-उज्जैन फोरलेन सड़क निर्माण से जुड़ा है, जिसके लिए शासन ने भूतेड़ा (एटलेन) से होटल जोयो तिराहे तक की भूमि की खरीद-बिक्री पर रोक लगा रखी थी।
प्रतिबंध के बावजूद हुई रजिस्ट्री
शासकीय आदेश के अनुसार, पिछले छह माह से भूतेड़ा से महू-नीमच मार्ग पर होटल जोयो तिराहे तक सड़क किनारे की भूमि की रजिस्ट्री पर पूर्ण प्रतिबंध है। इस आदेश की जानकारी जावरा और रतलाम के रजिस्ट्रार कार्यालयों को भी दी गई थी। बावजूद इसके, बेगमपुरा के समीप सर्वे क्रमांक 244 की भूमि की रजिस्ट्री कर दी गई।

कैसे हुआ सौदा
जानकारी के अनुसार, सर्वे क्रमांक 244 की जमीन का 8 से 10 लोगों ने बटवारा कर लिया। इसके बाद साबिर पटेल और जुबेर पटेल ने इस जमीन का सौदा खाचरौद नाका के जनता परिसर निवासी ओमप्रकाश नागर (45) पिता मोहनलाल नागर के साथ किया। नागर ने गत माह की 26 तारीख को रजिस्ट्री के लिए स्लॉट बुक करवाया और 20 जून को उक्त जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवा ली।
सवालों के घेरे में रजिस्ट्रार कार्यालय
स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर हैरानी है कि 7 किलोमीटर के दायरे में भूमि की खरीद-बिक्री पर स्पष्ट प्रतिबंध होने के बावजूद रजिस्ट्री कैसे संभव हुई। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह सब कुछ अधिकारियों की सांठगांठ के बिना संभव था? इस मामले ने रजिस्ट्रार कार्यालय की कार्यप्रणाली पर भी सवाल ख raising किए हैं।
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और शासकीय आदेशों की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए हैं। लोगों का मानना है कि इस मामले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि दोषियों को सामने लाया जा सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।
Author: Dashpur Disha
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