हाई रिस्क प्रेग्नेंसी के इलाज में लापरवाही के आरोप की जांच में शांतिराज हॉस्पिटल में 3 दिन इलाज पर रही रोक; जांच के बाद सेवाएं पूर्ववत शुरू करने की अनुशंसा

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नगर के रेलवे स्टेशन रोड़ स्थित शांतिराज हॉस्पिटल आज अचानक सोशल मीडिया पर चली ख़बरों के कारण सुर्खियों में आ गया। सोशल मीडिया पर शांतिराज हॉस्पिटल में इलाज पर रोक की खबरें चली जिसके बाद दशपुर दिशा ने पूरे मामले की पड़ताल की जिसमें पाया कि जांच के दौरान कमियां पाई जाने पर हॉस्पिटल में प्रसूति रोग सम्बन्धित ऑपरेशन इत्यादि पर रोक लगाई गई थी जो कमियों में सुधार के बाद पुनः हटा दी गई। पढ़िए पूरी ख़बर..

दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। नगर के स्टेशन रोड़ स्थित शांतिराज अस्पताल में गर्भवती महिला अंजना प्रजापति के उपचार को लेकर सामने आई शिकायत की जांच में अस्पताल की उपचार व्यवस्था और मरीज के प्रबंधन से जुड़े कई गंभीर बिंदु सामने आए हैं। पांच चिकित्सकों की जांच टीम ने शिकायत से संबंधित दस्तावेजों, उपचार प्रक्रिया और अस्पताल का निरीक्षण करने के बाद अपनी जांच अभिमत रिपोर्ट प्रस्तुत की है।
प्राप्त जांच रिपोर्ट के अनुसार, अंजना प्रजापति हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की मरीज थीं। 2 जुलाई 2026 को सोनोग्राफी में uteroplacental insufficiency एवं brain sparing effect की जानकारी सामने आई थी। जांच टीम के अनुसार, इस स्थिति के आधार पर उसी दिन मरीज को भर्ती कर डिलीवरी कराया जाना उचित था, लेकिन मरीज को भर्ती करने के बजाय डॉक्टर द्वारा घर भेज दिया गया और तीन दिन बाद आने के लिए कहा गया।

अगले दिन दिखे फिटल डिस्ट्रेस के संकेत
रिपोर्ट में बताया गया है कि 3 जुलाई को दोपहर करीब 12:30 बजे प्रसूता दोबारा अस्पताल पहुंची और बताया गया कि बच्चा कम घूम रहा है, जो fetal distress का संकेत था। जांच रिपोर्ट के अनुसार इस दौरान मरीज की PIH Profile तथा सोनोग्राफी नहीं कराई गई।
रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब दो दिन इंतजार के बाद मरीज को एक्सिडेंटल हेमरेज की स्थिति में ऑपरेशन के लिए ले जाया गया और बच्चा मृत पाया गया। जांच टीम ने अपने अभिमत में लिखा है कि खतरे को देखते हुए यदि ऑपरेशन जल्दी कर दिया जाता तो संभवतः मां और बच्चे को खतरे से बचाया जा सकता था।

ऑपरेशन से पहले ही रक्त की व्यवस्था जरूरी थी
जांच में यह भी सामने आया कि ऑपरेशन से पहले महिला का हीमोग्लोबिन 9.9 था, जबकि ऑपरेशन के बाद यह 6.3 ग्राम प्रतिशत रह गया। जांच टीम के मुताबिक ऐसी संभावित स्थिति में ऑपरेशन से पहले ही रक्त की व्यवस्था की जानी चाहिए थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इससे मरीज की गंभीर स्थिति होने से बचने की संभावना थी।

हालत बिगड़ने के बाद रेफर करने में भी देरी
जांच रिपोर्ट के मुताबिक ऑपरेशन के करीब 3 से 4 घंटे बाद महिला की स्थिति बिगड़ने लगी और यूरिन आउटपुट नहीं आ रहा था। ऐसी स्थिति में मरीज को तत्काल उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर किया जाना चाहिए था, जहां नेफ्रोलॉजिस्ट की सुविधा उपलब्ध हो। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार मरीज को ऑपरेशन के करीब 6 घंटे बाद रेफर किया गया।

अस्पताल के निरीक्षण में भी मिलीं कई कमियां
जांच दल ने शांतिराज अस्पताल का निरीक्षण भी किया। रिपोर्ट में उल्लेख है कि अस्पताल में HDU, ICU और NICU की सुविधा उपलब्ध नहीं थी। ऑपरेशन थिएटर के निरीक्षण में ऑक्सीजन व्यवस्था से संबंधित उपकरणों पर जंग, ड्रग ट्रॉली पर जंग और कई स्थानों पर पेंट नहीं होने जैसी कमियां पाई गईं।
इसके अलावा OT टेबल का गद्दा कई जगह से फटा हुआ था और टेप से चिपकाया गया था। कुछ स्थानों से गद्दे के फटे हुए टुकड़े गायब थे। जांच टीम ने इसे प्रभावी asepsis (संक्रमण नियंत्रण) में कठिनाई पैदा करने वाला बताया।

महिला को पहले से हाई रिस्क बताया गया था
जांच में महिला के MCP कार्ड का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार ANM द्वारा गर्भावस्था के दौरान Rubella (जर्मन खसरा) संक्रमण के कारण महिला को हाई रिस्क चिन्हित किया गया था। रिपोर्ट में यह भी दर्ज है कि महिला के प्रथम प्रसव में भी IUGD (गर्भस्थ शिशु की गर्भ में मृत्यु) हो चुकी थी।

जांच टीम ने निष्कर्ष में कहा है कि अंजना हाई रिस्क प्रेग्नेंसी की मरीज थीं और उनके प्रबंधन के लिए HDU, ICU तथा NICU जैसी सुविधाएं आवश्यक थीं, जो शांतिराज अस्पताल में उपलब्ध नहीं थीं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मां और बच्चे को हुआ खतरा एक्सिडेंटल हेमरेज के कारण हुआ, जो PIH मरीजों में होने वाले खतरों में से एक है और जिसका हर बार पूर्वानुमान लगाना संभव नहीं होता। हालांकि, जांच टीम ने यह भी स्पष्ट किया कि मरीज की समय पर डिलीवरी करा दी जाती तो इन खतरों से बचाया जा सकता था।
जांच रिपोर्ट पर पांच चिकित्सकों के हस्ताक्षर हैं। रिपोर्ट में अस्पताल की व्यवस्थाओं, उपचार के दौरान लिए गए निर्णयों और मरीज को रेफर किए जाने के समय को लेकर महत्वपूर्ण टिप्पणियां दर्ज की गई हैं।

सोशल मीडिया पर अस्पताल बंद होने को लेकर चली चर्चा
सीएमएचओ कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार दिनांक-03/09/2026 द्वारा 1.डॉ.कपिल शर्मा स्त्री रोग विशेषज्र शांतिराज हॉस्पिटल, रेलवे स्टेशन रोड, मंदसौर (म.प्र.) 2.संचालक, शांतिराज हॉस्पिटल, रेलवे स्टेशन रोड, मंदसौर (म.प्र.) को निर्देशित किया गया कि आगामी आदेश तक आप शांतिराज हॉस्पिटल, मंदसौर में किसी भी प्रकार का प्रसव संबंधी कार्य नहीं किया जाएगा। जिसमें सामान्य प्रसव, सिजेरियन ऑपरेशन (LSCS) अथवा अन्य प्रसूुति सम्बन्धित ऑपरेशन /प्रक्रिया साम्मिलित है साथ ही अस्पताल में उक्त निर्देश का कडाई से पालन सुनिश्चित करें तथा डॉ.कपिल शर्मा अथवा अस्पताल के किसी भी चिकित्सक/कर्मचारी द्वारा प्रसव संबंधी कार्य न किया जाए।
दूसरी तरफ अस्पताल प्रबंधन के हवाले से खबर मिली है कि अस्पताल में जांच तक प्रसूति ऑपरेशन, सिजेरियन ऑपरेशन पर रोक लगाई गई थी। जो जांच टीम ने जांच के बाद पुनः बहाल कर दी। जांच दल की सूचना के बाद हॉस्पिटल में तीन दिन तक कोई ऑपरेशन नहीं हुआ। जांच उपरांत दिनांक 08/09/2026 को पुनः ऑपरेशन थियेटर, लेबर रूम इत्यादि प्रकिया पूर्ववत जारी करने की अनुशंसा कर दी गई थी।

Yogesh Porwal
Author: Yogesh Porwal

वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।

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