चौकाने वाला खुलासा- आरटीआई के जाल में उलझी जिम्मेदारों की शर्मनाक लापरवाही
शहर में जो पेयजल सप्लाय किया जा रहा उसमें कबूतर के अंडों का अंश और मल (बीट) मिलने का अंदेशा

फिल्टर प्लांट के क्लेरी फोक्युलेशन सिस्टम की विधुत मोटर दो माह से पडी बंद
सूत्र बता रहे हैं फिल्टर प्लांट की सफाई के दौरान मिला था कबूतर का शव
नागदा। शहर में गत दिनों मटमैला पानी सप्लाय का मामला अभी सुर्खियों में चल ही रहा था कि सूचना अधिकार की पकडृ में जिम्मेदारों की एक शर्मशार लापरवाही का चौकाने वाला मामला सामने आया है। शहर के हजारों जनता को जो पानी पिलाया जा रहा उसमें कबूतर के अंडे और मल (बीट)मिले होने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। चंबल तट स्थित नपा की जल आवर्धन योजना के तहत 22 करोड़ की लागत से बनी योजना के फिल्टर प्लांट के रख रखाब के प्रति हमारे जिम्मेदार कितने सजग उसकी पोल तो सामने आई लेकिन फिल्टर प्लांट के पानी से भरे चैबर के उपर बनी रैलिंग के नीचे कबुतरों ने अंडे दिए और अब बच्चे बन गए जो अभी भी विधमान है। वह इसी स्थान पर कबूतर की बीट की गंदगी के ढेर मिले है। मजेदार बात यह हैकि जहां कबुतरों ने अंडे दिए उसके ठीक नीचे शहर में जलापूर्ति होने वाला पानी भरा है। यह प्रमाणिक खुलासा आरटीआई एक्टिविस्ट कैलाश सनोलिया के एक सूचना अधिकार में सामने आया है। नपा के सक्षम अधिकारियों की उपस्थिति में उस स्थान के अधिकृत फोटों ओर वीडियो फुटेज प्राप्त हुए है। इन प्रमाणों को शुक्रवार को श्री सनोलिया ने एक प्रेसवार्ता में उजागर किया। इस मौके पर उन्होेने पत्रकारों को बताया एक और जहा हम सनातन संस्कृति की बात करते और जिस पानी का उपयोग पूजा पाठ, खाना बनाने, नहाने औरे पेयजल में करते है उस पानी के अंदर कबूतर की बीट, अंडे और कबूतर के शव जैेसे शर्मनाक अंश के मिलावट की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता है। जिस स्थान पर कबूतर के चुजे और बीट मिले है उसके ठीक नीच फिल्टर प्लांट का पानी भरा है। गंदगी के ढेर एकदम स्पष्ट ऐसे दिखाई दे रहें है जहां पर बिल्कुल भी स्पेस नही है। थोड़ी सेे हवा या कबूतर के पंखों की आहट से इनके अंश जो फिल्टर प्लांट सिस्टम का पानी नीचे भरा उसके अंदर टपकने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। यह सब कुछ सूचना अधिकार की एक विशेष धारा में फिल्टर प्लांट के निरीक्षण के उपरांत मांगे गए चित्र और वीडियों फुटेज के प्रमाण अधिकृत रूप से सामने आए हैं।
ये प्रमाण सामने आए
श्री सनोलिया के पर नपा के सहायक यंत्री और सूचना अधिकार व्यवस्था के सहायक लोकसूचना अधिकारी श्री रविदं मडलोई और फिल्टर प्लांट के सहायक प्रभारी श्री लिनस फ्रेकलिन शिेदे नेे उन्हें फिल्टर प्लांट का निरीक्षण के बाद चिन्हित स्थान के मौके की तस्वीरेे और वीडियों फुटेज विधिवत प्राप्त कराने की अनुमति दी। आवेदक को फिल्टर लांट का मौका निरीक्षण कराने के लिए नपा के सक्षम अधिकारी ने एक पत्र जारी किया था। दिनांक 17 अक्टूबर को प्लांट का निरीक्षण कर मौकेे से फोटो और वीडियों फुटेज संकलित किए। जिसके तहत प्लांट पर उपस्थित रहने का निर्देश आवेदक को दिया गया था।
ये प्रमाण प्राप्त संकलित किए
1.फिल्टर प्लांट के जिस स्थान पर कबूतर ने बच्चे दिए उसका वीडियों फुटेज जिसमें कबूतर बैठा हुआ दिखाई दे रहा है। यह स्थान एक दम असुरक्षित है, हवा के झोके से या बारिश से अंडे व कबूतर के बच्चों को नीचे गिरने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। यह वह स्थान है जहां फिल्टर प्लांट की विधुत मोटर चलती रहती है। जिसे फोक्युलेशन सिस्टम कहा जाता है। इस सिस्टम की मोटर लापरवाही के कारण यह अभी बंद पडी है। हालांकि 2 वर्ष से ये विधुत मोटरे बंद होने की जानकारी सामने आई है।
2.वह फोटो जहां कबूतर की बीट स्पष्ट दिखाई दे रही है जो हवा के एक झोंके से नीचे भरे उस पानी में गिर सकती है जो शहर के लोगों को पिलाया जा रहा है।
3.फिल्टर प्लांट के सहायक प्रभारी श्री शिंदे का वह वीडिैयों फुटेज जो इस बात को स्वीकार कर रहे है कि कबुतर ने फिल्टर प्लांट के उस स्थान पर बच्चे दिए जिसके नीचे भरा पानी शहर मे सप्लाय होता है। उनसे यह सवाल पूछा जा रहा है कि इस स्थान से अंडे बीट आदि नीचे भी गिर सकते है यह असुरक्षित स्थान है वे जवाब देने में मौन है।
4.प्लांट पर कार्यरत कर्मचारी फुटेज में इस बात को स्वीकार कर रहा है कि कबुतर के बच्चों के कारण हम फिल्टर प्लांट की मोटर लगभग दो माह से नहीं चला रहे हैं। उस से यह भी सवाल किया गया कि यहां इन बच्चों के उड जाने के बाद फिर कबूतर बच्चे देंगे वह आश्वस्त कर रहा है कि अब ऐसे नहीं होने देंगे। उसके पास इस बात का कोइ जवाब नहीं है कि अंडे और कबूतर की गंदगी नीचे भरे पानी में गिरती होगी। उसका यह कहना था कि हम इस बारे में घूम घूम कर देखते रहते है।
5.फिल्टर प्लांट के उस पूरे भाग का फोटो और वीडियों फुटेज जिसमें पानी के उपर वह रेलिंग है जिसमें कबूतर ने संतान उत्पति का घर बना रखा है।
फिल्टर प्लांट की जल आवर्धन योजना का शिलालेख पर नाम अंकित जिस पर शहर के राष्ट्रीय स्तर से लेकर स्थानीय एक दर्जन राजनेताओं के नाम अंकित है।

फिल्टर प्लांट की गत दिनों हुई सफाई में एक मृत कबुतर की बात सूत्रों से मिली है, मौके पर कर्मचारी ने पहले तो बताया कि ऐसा हुआ था लेकिन बाद में कैमरे के सामने यह कह रहा कि उसकी शिफट मे तो नहीं हुआ था अन्य शिपट की मुझे जानकारी नहीं है।
Author: Dashpur Disha
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