शिकायत के बाद हुआ खुलासा, तत्कालीन तहसीलदार आरएल मुनिया को एडीएम ने दी चेतावनी – भविष्य में अध्ययन कर प्रदत्त शक्तियों के तहत ही कार्य करें
शामगढ़। दिनांक 21 फरवरी 2022 को शामगढ़ के तत्कालीन तहसीलदार आरएल मुनिया की भूमाफियों के साथ सांठगांठ को दशपुर दिशा ने उजागर किया था। खबर का शीर्षक था भूमाफियाओं के संरक्षक है शामगढ़ तहसीलदार आरएल मुनिया।
खबर के पीछे की सच्चाई ये थी कि उस समय शामगढ़ में भूमाफियाओं के वो काम भी हुए जो कभी किसी अधिकारी ने नहीं करें। इसी कारण शामगढ़ से अन्यत्र स्थानांतरण होने के बावजूद काफी समय तक तहसीलदार ने शामगढ़ नहीं छोड़ा था। पिछले साल आरएल मुनिया पुनः स्थानांतरित होकर मन्दसौर जिले के सुवासरा में पदस्थ हुए है। उन्होंने शामगढ़ में जो कारनामे किए है उनकी गवाही खुद सरकारी आदेश दे रहे है।
तहसीलदार आरएल मुनिया के समय का एक प्रकरण कलेक्टर न्यायालय। में चल रहा था, जिस पर दो तीन साल सुनवाई के बाद फैसला आ गया। आदेश में पुराने आदेश को निरस्त करके तहसीलदार को अध्ययन करके और शक्तियों के तहत ही कार्य करने की चेतावनी भी दी गई है। पढ़िए क्या है पूरा मामला –

जिले की शामगढ़ तहसील में राजस्व विभाग में एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। अधिकारियों ने नियमों को ताक पर रखकर पुराने रिकॉर्ड में फर्जी सुधार कर जमीन का क्षेत्रफल बढ़ाया और उसे बेचकर करोड़ों रुपये का खेल रचा। इस मामले ने पूरे विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
खसरा नंबर 183/8 की भूमि मूल रूप से ईश्वर सिंह और दिलीप सिंह राजपूत निवासी शामगढ़ के नाम दर्ज थी, जिसका क्षेत्रफल 0.017 हेक्टेयर था। बाद में इस जमीन का एक हिस्सा पार्वती बाई पत्नी बद्रीलाल महाजन को बेचा गया। लेकिन यहां से शुरू हुआ भ्रष्टाचार का सिलसिला। तहसीलदार शामगढ़ ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता 1959 की धारा 115 का उल्लंघन करते हुए पुराने रिकॉर्ड में अवैध बदलाव किया और क्षेत्रफल को 0.017 हेक्टेयर से बढ़ाकर 0.043 हेक्टेयर कर दिया। बढ़ाए गए क्षेत्रफल को राजकुमार पिता बंशीधर छाबड़ा, जाति पंजाबी और विजय कुमार के नाम दर्ज कर दिया गया। सुधार के तुरंत बाद, 29 मार्च 2022 को विक्रय पत्र क्रमांक MP249422022A1338601 के जरिए इस जमीन का लेन-देन कर दिया गया, जिससे करोड़ों रुपये का फायदा हुआ।
इस पूरे घोटाले की शिकायत पत्रकार अनिल जोशी ने की थी। शिकायत पर जांच शुरू हुई, जिसमें सामने आया कि तहसीलदार ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर यह गड़बड़ी की। अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) गरोठ ने धारा 50 के तहत तहसीलदार के अवैध आदेश को रद्द कर दिया। मामला कलेक्टर मंदसौर और अपर कलेक्टर न्यायालय तक पहुंचा, जहां पुष्टि हुई कि सुधार पूरी तरह गैरकानूनी था।
यह मामला राजस्व विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार की एक मिसाल है। अधिकारियों ने न केवल नियमों को कुचला, बल्कि पुराने रिकॉर्ड को भी छेड़ा, जिससे आम नागरिकों का विश्वास हिला है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि ऐसे घोटाले छोटे स्तर पर लगातार चल रहे हैं, लेकिन इस बार सबूतों के साथ पर्दाफाश हुआ। अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग उठ रही है।
इस प्रकरण के आदेश में अपर कलेक्टर एकता जायसवाल ने तत्कालीन तहसीलदार के द्वारा इस मामले में दिए आदेश को मध्यप्रदेश भू राजस्व संहिता 1959 की धारा 115 में प्रदत अधिकारियों का अतिक्रमण बताया और भविष्य के लिए चेतावनी दी कि अधिनियम के अनुसार ही कार्य करें।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









