एडवोकेट ने कहा – स्थानांतरण आदेश कानूनी दुर्भावना से प्रेरित है और इसे व्हाट्सएप पर भेजकर उसी दिन कार्यमुक्त कर दिया
✍️दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मन्दसौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने मंदसौर जिले की उप/अतिरिक्त कलेक्टर एकता जायसवाल के स्थानांतरण आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी है। जायसवाल ने अपने खिलाफ 15 मई 2025 को जारी स्थानांतरण और कार्यमुक्ति आदेश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि यह आदेश भूमाफियाओ और शराब माफियाओ के दबाव में जारी किया गया, क्योंकि उन्होंने सरकारी जमीन की हड़पने और अवैध शराब गतिविधियों के खिलाफ कड़े कदम उठाए थे।

न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के पक्ष में मामला पाया और स्थानांतरण आदेश के साथ-साथ कार्यमुक्ति आदेश पर रोक लगा दी। कोर्ट ने याचिकाकर्ता को मंदसौर में अपने वर्तमान पद पर काम जारी रखने की अनुमति दी। साथ ही, प्रतिवादियों को सात कार्य दिवसों के भीतर नोटिस जारी करने और छह सप्ताह में जवाब देने का निर्देश दिया।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता मिनी रविंद्रन ने तर्क दिया कि जायसवाल को मंदसौर के कलेक्टर द्वारा कॉलोनी सेल और आबकारी शाखा का प्रभारी बनाया गया था। उन्होंने दस्तावेजों के आधार पर कहा कि स्थानांतरण आदेश कानूनी दुर्भावना से प्रेरित है और इसे व्हाट्सएप पर भेजकर उसी दिन एडीएम को कार्यमुक्त कर दिया गया, जो प्रक्रियात्मक अनियमितता को दर्शाता है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के सोमेश तिवारी मामले के फैसले का हवाला देते हुए आदेश को गैर-प्रशासनिक और बाहरी दबावों से प्रभावित बताया।
राज्य सरकार की ओर से सरकारी अधिवक्ता विशाल पंवार ने निर्देश लेने के लिए समय मांगा। मामले की अगली सुनवाई छह सप्ताह बाद होगी। यह मामला प्रशासनिक पारदर्शिता और माफियाओ के कथित प्रभाव को लेकर चर्चा में है।
Author: Dashpur Disha
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