मन्दसौर के राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस) में प्राचार्य पद पर वरिष्ठ प्राध्यापक को प्रभार देने को लेकर हाईकोर्ट ने 31 मार्च को आदेश कर दिया, वरिष्ठ प्राध्यापक ने ज्वॉइन कर लिया लेकिन कनिष्ठ प्राध्यापक डॉ.दुबे अब भी प्राचार्य बने हुए है
दशपुर दिशा । योगेश पोरवाल
मंदसौर। मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय, इंदौर खंडपीठ ने 31 मार्च 2026 को दिए गए आदेश में स्पष्ट रूप से डॉ.ज्योतिस्वरूप दुबे को प्रभारी प्राचार्य के पद से हटाने का निर्देश दिया था, लेकिन उसके बावजूद वे राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय (प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस) मंदसौर के प्राचार्य पद पर बने हुए हैं। याचिकाकर्ता डॉ.राजकपूर वर्मा ने वरिष्ठता के आधार पर इस पद का हकदार होने का दावा किया है था।

मामला डब्ल्यूपी नंबर 10250/2026 (डॉ.राजकपूर वर्मा बनाम मध्यप्रदेश शासन एवं अन्य) का है। 31 मार्च 2026 को न्यायालय ने प्रतिवादी नंबर-4 (डॉ.ज्योतिस्वरूप दुबे) द्वारा 24 जनवरी 2025 को जारी विवादित आदेश को अगली सुनवाई तक स्थगित रखने का आदेश दिया।
इस प्रकरण में न्यायालय ने साफ कहा वरिष्ठतम प्रोफेसर को ही प्राचार्य/प्रभारी प्राचार्य का प्रभार सौंपा जाए, जो कानूनी रूप से इस पद का हकदार है। याचिकाकर्ता डॉ.राजकपूर वर्मा ने कोर्ट में तथ्य पेश कर साबित किया कि वे डॉ.दुबे से सात वर्ष पांच माह वरिष्ठ हैं। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि हाईकोर्ट का स्टे आदेश उसी दिन से प्रभावी होता है, जिस दिन ऑर्डर जारी होता है।
स्टे का उल्लंघन कर रहे डॉ.दुबे
हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद डॉ. ज्योतिस्वरूप दुबे प्राचार्य पद छोड़ने का नाम नहीं ले रहे हैं। स्थानीय सूत्रों के अनुसार, वे “किसी अन्य आदेश” का इंतजार कर रहे हैं, जबकि न्यायालय का निर्देश साफ है कि वरिष्ठतम प्रोफेसर को तुरंत प्रभार सौंप दिया जाए।
दस्तावेज हेराफेरी की आशंका
डॉ.दुबे के कार्यकाल में कॉलेज में कई कामों में घपले-घोटाले की आशंका जताई जा रही है। कई आरटीआई आवेदनों में उन्होंने जानकारी उपलब्ध नहीं कराई, जिससे आरोप लग रहे हैं कि वे घोटालों को छिपाने का प्रयास कर रहे थे। अब हाईकोर्ट के आदेश के बाद आशंका जताई जा रही है कि डॉ.दुबे कॉलेज के महत्वपूर्ण दस्तावेजों में हेराफेरी कर सकते हैं।
डॉ. ज्योतिस्वरूप दुबे को जनवरी 2025 में जूनियर प्रोफेसर होने के बावजूद प्रभारी प्राचार्य बनाया गया था। इससे पहले वरिष्ठ प्रोफेसर डॉ.राजकपूर वर्मा को इस पद से हटाया गया था। डॉ. वर्मा ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर अपनी वरिष्ठता साबित की।
Author: Yogesh Porwal
वर्ष 2012 से पत्रकारिता के क्षेत्र में निरंतर सक्रिय है। राष्ट्रीय समाचार पत्र हमवतन, भोपाल मेट्रो न्यूज, पद्मिनी टाइम्स में जिला संवाददाता, ब्यूरो चीफ व वर्ष 2015 से मन्दसौर से प्रकाशित दशपुर दिशा समाचार पत्र के बतौर सम्पादक कार्यरत, एवं मध्यप्रदेश शासन द्वारा जिला स्तरीय अधिमान्य पत्रकार है। पोरवाल, खोजी पत्रकारिता के लिए चर्चित है तथा खोजी पत्रकारिता सम्मान से सम्मानित भी किए जा चुके है। योगेश पोरवाल ने इग्नू विश्वविद्यालय दिल्ली एवं स्वामी विवेकानंद सुभारती विश्वविद्यालय से जर्नलिज्म एंड मास कम्यूनिकेशन, न्यू मीडिया में पीजी डिप्लोमा और मास्टर डिग्री प्राप्त की, इसके अलावा विक्रम विश्वविद्यालय से एलएलबी, एलएलएम और वर्धमान महावीर ओपन विश्वविद्यालय से सायबर कानून में अध्ययन किया है।









